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आईएसआई की साजिश का खुलासा: बब्बर खालसा से जुड़ रहे लुधियाना धमाके के तार, नदीम अंजुम बुन रहा नापाक तानाबाना

Sat, 25 Dec 2021 01:30 AM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 25 Dec 2021 01:30 AM IST
सार

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मंसूबे पंजाब को लेकर नापाक है। अब लुधियाना बम धमाके के तार भी जुड़ने लगे हैं। आईएसआई चीफ नदीप अंजुम की आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के प्रमुख वधावा सिंह से जगजाहिर हैं। बब्बर खालसा के पीछे आईएसआई का पूरा हाथ है। 

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Big reveals in Ludhiana court bomb blast case Pakistan intelligence agency plotting
लुधियाना कोर्ट में तैनात कमांडो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या का तानाबान बुनने वाला आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल सूबे में फिर से सिर उठाने लगा है। लुधियाना कोर्ट कांप्लेक्स धमाके के तार पाकिस्तान में बैठे बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह से जुड़ने के बाद भारत की खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गईं हैं और नए सिरे से होमवर्क किया जा रहा है। 

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जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम की पंजाब के आतंकी संगठनों से गहरी नजदीकियां व जुगलबंदी सूबे में नापाक वारदात का तानाबाना बुनने में कामयाब रही हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि लुधियाना कोर्ट में हुए धमाके के पीछे बब्बर खालसा का हाथ है। इस धमाके को बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह ने अंजाम दिया है और उसने इस काम में स्थानीय गैंगस्टर हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा सिंह की मदद ली है। 
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बब्बर खालसा एक ऐसा आतंकवादी संगठन है, जिसका मुख्य मकसद एक स्वतंत्र सिख देश खालिस्तान बनाना है। बब्बर खालसा के सदस्य कनाडा, जर्मनी, यूके और भारत के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक रिंदा कुछ बरसों पहले पाकिस्तान भाग गया था और उसने वहीं से पंजाब में कुछ गैंगस्टरों को इस धमाके के लिए तैयार किया था। 

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खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पंजाब में पिछले चार साल में 32 आतंकी मॉड्यूल तोड़े जा चुके हैं। अभी भी एक दर्जन और मॉड्यूल होने की आशंका जताई जा रही है। आईबी के वरिष्ठ सूत्रों की माने तो पाकिस्तान के पूर्व आर्मी इंटेलीजेंस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम के आईएसआई प्रमुख बनने के बाद पंजाब में आतंकी गतिविधियां बढ़ने और आतंकी घुसपैठ के लिए पंजाब के साथ लगती भारत-पाक सीमा का इस्तेमाल करने की आशंका बढ़ गई है।
 
आमतौर पर आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है लेकिन पहली बार आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने नियुक्ति की है। लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम आर्मी चीफ बाजवा के खास सिपहसालारों में हैं और उसकी काफी नजदीकियां बब्बर खालसा इंटरनेशनल के चीफ वधावा सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के रंजीत सिंह नीटा, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के प्रधान लखबीर सिंह रोडे से हैं। 

अंजुम पंजाब और कश्मीर की सीमावर्ती भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है और पंजाब की स्थिति पर पूरी नजर रख रहा है। आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम पाकिस्तानी सेना की पंजाब रेजिमेंट से हैं और वह कराची कोर कमांडर के साथ ही कमांड एंड स्टाफ कॉलेज क्वेटा के कमांडेंट के रूप में भी काम कर चुका है। 

एलओसी पर भी काफी समय तक वह तैनात रहा है, जिस कारण उनका नेटवर्क पंजाब के आतंकी संगठनों के साथ काफी गहरा है। हाल ही में 6 अक्तूबर 2021 को अंजुम को यह पद दिया गया तो उन्होंने इसके बाद से पंजाब के आतंकी संगठनों के प्रमुखों के साथ बैठक भी की थी, जिसमें वधावा सिंह भी शरीक हुआ था।

आतंकी संगठन बब्बर खालसा 1978 में बना था। कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन के साथ-साथ भारत के कुछ हिस्सों में सक्रिय बब्बर खालसा चीफ वाधवा सिंह पाकिस्तान में छिपा है। बब्बर खालसा को पूरा सहयोग मेहल सिंह द्वारा किया जा रहा है, जो संगठन का उप प्रमुख है। वधावा सिंह व मेहल सिंह दोनों उन 20 आतंकियों में शामिल हैं, जिन्हें भारत अपने हवाले करवाना चाहता है। 

वाधवा सिंह ने 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी। इसके अलावा जनवरी 2004 में हत्या के आरोपी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल से भागने का मास्टरमाइंड भी इसे माना जाता है। पिछले साल दिल्ली के बुराड़ी इलाके से बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से भारी गोला बारूद व हथियार बरामद हुए थे। उनका निशाना 1984 के सिख विरोधी दंगे में शामिल रहे वरिष्ठ नेताओं व सतलुज-यमुना लिंक परियोजना पर काम कर रहे इंजीनियरों की हत्या करना था। 

आला अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक देश की खुफिया एजेंसियां इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन को लेकर अपनी जांच कर नेटवर्क ध्वस्त कर रही थी, क्योंकि बार-बार सामने आ रहा था कि पंजाब में टिफिन बम भेजने में लखबीर सिंह रोडे का हाथ है लेकिन अब बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दोबारा सक्रिय होने से एजेंसियों ने नए सिरे से होमवर्क करना शुरू कर दिया है। दरअसल, पिछले साल सिख फॉर जस्टिस की यूके में कांफ्रेंस में तमाम आतंकी संगठन एक मंच पर आ गए थे, जिसमें बब्बर खालसा प्रमुख था। इसके बाद से आईबी अन्य एजेंसियां बब्बर खालसा पर निगरानी रखे थे लेकिन इस बीच इंडियन सिख यूथ फेडरेशन सक्रिय हो गया।

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