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बाढ़ मुआवजे में हुए घोटाले की जांच करेंगे एडीसी व एसडीएम
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फिरोजपुर। बाढ़ मुआवजे में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच एडीसी और एसडीएम करेंगे। डिप्टी कमिश्नर फिरोजपुर ने उक्त घोटाले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट मांगी है, ताकि पंजाब सरकार को भेजी जा सके। तीन सितंबर को उक्त दोनों अधिकारियों को जांच करने संबंधी पत्र जारी किया है, पांच दिन बीत चुके हैं, अभी तक संबंधित अधिकारी पीड़ित गांवों तक नहीं पहुंचे हैं। उधर, सीमांत गांव के किसानों का कहना है कि अधिकारी उनके पास आएंगे तो सच्चाई से अवगत करवाएंगे। लेकिन अभी तक उनके पास कोई भी अधिकारी बाढ़ मुआवजे में हुए घोटाले की जांच संबंधी नहीं पहुंचा है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार के माल, पुनर्वास एवं डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की ओर से ग्यारह अगस्त 2021 को उक्त घोटाले की जांच करने संबंधी आदेश जारी हुए थे। अब डिप्टी कमिश्नर फिरोजपुर ने तीन सितंबर को एडीसी और एसडीएम को जांच सौंप दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है, जो पंजाब सरकार को भेजी जानी है। जब इस बात की जानकारी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर से सटे सीमांत गांव जल्लोके, भानेवाला, हजारा सिंह वाला, टेंडी वाला, गट्टी राजोके, कालू वाला, माछीवाड़ा, चूड़ी वाला, कमाले वाला, खुंदर गट्टी व निहाला किलचा के किसानों तक पहुंची तो उनका कहना था कि अभी तक उनके पास कोई अधिकारी बाढ़ मुआवजे में हुए घोटाले संबंधी पूछताछ के लिए नहीं आया है। यदि अधिकारी आते हैं तो उन्हें सच्चाई से अवगत करवाएंगे। किसानों का कहना है कि इस संबंधी उन्होंने विधायक से भी बातचीत की थी, उन्होंने आश्वासन दिया था कि उनका बनता हक दिलवाया जाएगा।
यह है मामला
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2018 में फिरोजपुर के सीमांत क्षेत्र में बाढ़ आने से हजारों एकड़ जमीन में लगी विभिन्न प्रकार की फसल बर्बाद हो गई थी। उक्त वर्ष का लगभग 19 करोड़ का मुआवजा कुछ माह पूर्व आया था। बॉर्डर के जिन किसानों को मुआवजा मिलना था उन्हें नहीं मिला। जिन किसानों को मुआवजा मिला भी है, उन्हें नष्ट हुई फसल का पूरा मुआवजा नहीं मिला था। हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे दर्जनों गांवों के किसानों ने माल विभाग के अधिकारियों को मुआवजा में हुए घोटाले की शिकायत की थी। अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। कई किसानों ने आरटीआई के जरिये फिरोजपुर के माल विभाग से जानकारी भी मांगी थी कि किन-किन किसानों को कितना मुआवजा बांटा है, लेकिन अधिकारियों ने जानकारी मुहैया नहीं करवाई थी। उसके बाद भारतीय किसान संघ ने पंजाब सरकार को शिकायत की थी। यही नहीं कई सियासी नेताओं ने भी शिकायतें की थी कि माल विभाग के कई अधिकारियों के अलावा कुछ सियासी नेता भी इसमें शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार के माल, पुनर्वास एवं डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की ओर से ग्यारह अगस्त 2021 को उक्त घोटाले की जांच करने संबंधी आदेश जारी हुए थे। अब डिप्टी कमिश्नर फिरोजपुर ने तीन सितंबर को एडीसी और एसडीएम को जांच सौंप दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है, जो पंजाब सरकार को भेजी जानी है। जब इस बात की जानकारी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर से सटे सीमांत गांव जल्लोके, भानेवाला, हजारा सिंह वाला, टेंडी वाला, गट्टी राजोके, कालू वाला, माछीवाड़ा, चूड़ी वाला, कमाले वाला, खुंदर गट्टी व निहाला किलचा के किसानों तक पहुंची तो उनका कहना था कि अभी तक उनके पास कोई अधिकारी बाढ़ मुआवजे में हुए घोटाले संबंधी पूछताछ के लिए नहीं आया है। यदि अधिकारी आते हैं तो उन्हें सच्चाई से अवगत करवाएंगे। किसानों का कहना है कि इस संबंधी उन्होंने विधायक से भी बातचीत की थी, उन्होंने आश्वासन दिया था कि उनका बनता हक दिलवाया जाएगा।
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यह है मामला
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2018 में फिरोजपुर के सीमांत क्षेत्र में बाढ़ आने से हजारों एकड़ जमीन में लगी विभिन्न प्रकार की फसल बर्बाद हो गई थी। उक्त वर्ष का लगभग 19 करोड़ का मुआवजा कुछ माह पूर्व आया था। बॉर्डर के जिन किसानों को मुआवजा मिलना था उन्हें नहीं मिला। जिन किसानों को मुआवजा मिला भी है, उन्हें नष्ट हुई फसल का पूरा मुआवजा नहीं मिला था। हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे दर्जनों गांवों के किसानों ने माल विभाग के अधिकारियों को मुआवजा में हुए घोटाले की शिकायत की थी। अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। कई किसानों ने आरटीआई के जरिये फिरोजपुर के माल विभाग से जानकारी भी मांगी थी कि किन-किन किसानों को कितना मुआवजा बांटा है, लेकिन अधिकारियों ने जानकारी मुहैया नहीं करवाई थी। उसके बाद भारतीय किसान संघ ने पंजाब सरकार को शिकायत की थी। यही नहीं कई सियासी नेताओं ने भी शिकायतें की थी कि माल विभाग के कई अधिकारियों के अलावा कुछ सियासी नेता भी इसमें शामिल हैं।
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