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पंजाब विधानसभा चुनाव: स्थानीय मुद्दों में उलझ रही आम आदमी पार्टी, मजीठिया से माफी बनी सिरदर्द 

Fri, 24 Dec 2021 12:35 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 24 Dec 2021 12:35 PM IST
सार

चाहे मामला बादलों की बसों को दिल्ली एयरपोर्ट तक जाने की अनुमति देने का हो या एसवाईएल मामले में यू टर्न लेने का, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल कई बार पंजाब के स्थानीय मुद्दों पर घिर चुके हैं। 

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Aam Aadmi Party is on Backfoot at Local issues in Punjab Assembly Elections
अरविंद केजरीवाल - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में विधानसभा चुनाव में मजबूत पार्टी बनकर उभर रही आम आदमी पार्टी स्थानीय मुद्दों को लेकर पूरी तरह से बैकफुट पर जाने लगी है। केजरीवाल की मजीठिया से लिखित माफी हो या बादल परिवार की इंडो कैनेडियन बसों पर केजरीवाल सरकार की दया दृष्टि, पंजाब के चुनावों में अहम मुद्दा बनती जा रही है।

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बादल परिवार की बसों पर मेहरबानी से सवाल

टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बादल परिवार की इंडो कैनेडियन बसों को नियमानुसार स्टेज कैरियर परमिट लेना अनिवार्य है लेकिन इंडो कैनेडियन बसें आराम से दिल्ली एयरपोर्ट तक जा रही हैं जबकि पंजाब सरकार की वोल्वो बसों को दिल्ली का बस अड्डा क्रास नहीं करने दिया जा रहा है। केजरीवाल सरकार ने पंजाब सरकार की वोल्वो बसों का पहिया जाम कर दिया लेकिन इंडो कैनेडियन को खुलेआम छूट दे रखी है। दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग ने पंजाब की सरकारी बसों को नवंबर 2018 में दिल्ली एयरपोर्ट पर जाने से रोक दिया।

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हालांकि सरकारी वोल्वो बसें काफी किफायती थी। उनका किराया दिल्ली एयरपोर्ट के लिए महज 1050 रुपये था। सरकारी बसें एयरपोर्ट से सस्ते किराए में सवारियों को लाती और ले जाती थी। इसके विपरीत प्राइवेट बस इंडो कैनेडियन को इसकी छूट दी गई। पंजाब के परिवहन मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वडिंग इस मुद्दे को चुनावी जनसभा में जोर शोर से उठा रहे हैं। इस मामले में आम आदमी पार्टी बैकफुट पर हैं। हाल ही में चुनावी जनसभा में राजा वडिंग ने खुलेआम कहा कि केजरीवाल सरकार बादल परिवार की बसों पर इतनी मेहरबान क्यों है। इंडो कैनेडियन बसें टूरिस्ट परमिट पर चल रही हैं और पंजाब सरकार की बसों को रोका जा रहा है। 

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एसवआईएल पर आप का स्टैंड क्लीयर नहीं...

केजरीवाल पहले भी एसवाईएल नहर के मुद्दे पर विरोधी दलों के निशाने पर रहे हैं। एक बार उन्होंने पंजाब के हक में बयान दिया था तो हरियाणा ने भौंहे तानते हुए उन्हें याद दिलाया था कि दिल्ली को पानी हरियाणा से मिलता है। इसके बाद केजरीवाल ने यू-टर्न भी मारा था लेकिन, अब पंजाब के चुनावी दिनों में एसवाईएल नहर पर उनके स्टैंड से जुड़ा सवाल केजरीवाल का पीछा करता हुआ नजर आ रहा है। विधायक सुशील रिंकू का कहना है कि केजरीवाल पंजाब के साथ धोखा करते हैं। जब वह शंभू बैरियर क्रास करते हैं उनका रंग बदल जाता है। हरियाणा व दिल्ली पहुंचते ही पंजाब विरोधी बातें करना शुरू कर देते हैं। एसवआईएल का मुद्दा पंजाब का सबसे अहम मामला है और केजरीवाल दिल्ली व हरियाणा में जाकर पंजाब विरोधी बात करने लगते हैं।

चंडीगढ़ पर भी है विवाद

चंडीगढ़ पंजाब का ही होना चाहिए क्योंकि जब पंजाब व हरियाणा अलग अलग राज्य बने थे तो देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि कुछ समय के लिए चंडीगढ़ साझा राजधानी रहेगी और बाद में पंजाब को मिल जाएगी। फिर 1985 में राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत चंडीगढ़ को पंजाब के सुपुर्द किए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन 26 जनवरी 1986 को राजीव गांधी सरकार ने ऐन वक्त पर हाथ खींच लिए और चंडीगढ़ के पंजाब के पास जाने की पूरी कवायद धरी रह गई। आज भी पंजाब चंडीगढ़ पर अपना पूरा हक जताता है। पंजाब की यह मांग हर बार चुनाव में जोर शोर से उठती है। इस बार भी यह मांग जोर पकड़ने लगी है।

ऐसी चर्चा भी शुरू हो चुकी है कि चंडीगढ़ पंजाब को दिया जा सकता है और केंद्र सरकार फैसला ले सकती है। इस बीच अरविंद केजरीवाल ने इसको कोरी अफवाह बता दिया। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश प्रधान मोना जयसवाल का कहना है कि चंडीगढ़ पंजाब का है और रहेगा। बाकी रही आम आदमी पार्टी की बात, उनका अपना घर इसलिए बिखर रहा है क्योंकि वह पंजाब विरोधी बातें करते हैं। पंजाब में बात यहां के स्थानीय मुद्दों की करते हैं लेकिन दिल्ली में जाते ही पंजाब को दुश्मन मानने लगते हैं।

केजरीवाल की मजीठिया से माफी पर घिरे 

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर की अदालत में पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया पर नशा कारोबार को लेकर लगाए आरोपों के संबंध में माफीनामा देकर पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया था। इसके बाद उनकी पार्टी में बगावती सुर उठने लगे थे। आप विधायक व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा और विधायक कंवर संधू ने इसे गलत बताते हुए विरोध जताया। वहीं भगवंत मान ने इस्तीफा तक दे दिया था। अब यह जिन्न बोतल से फिर बाहर आ गया है। पुलिस ने मजीठिया पर तस्करी का केस दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही केजरीवाल का माफीनामा भी वायरल हो गया है। कांग्रेस इसको चुनावी प्रचार में खूब भूना रही है। भाजपा के पूर्व प्रधान मनोरंजन कालिया का कहना है कि केजरीवाल गिररिट से भी ज्यादा तेज रंग बदलते हैं। 

पंजाब की रिवायती पार्टियां आप से घबराती हैं और उलट प्रचार करती हैं- राजविंदर कौर

पंजाब की आप की महिला इकाई की प्रधान राजविंदर कौर थियाड़ा का कहना है कि हर सूबे के अपने मुद्दे होते हैं और उन मुद्दों पर चुनाव होता है। पंजाब की रिवायती पार्टियों को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, जिस कारण वह घबरा रही हैं। केजरीवाल अगर पंजाब की पराली को लेकर बात करते हैं तो पंजाब के वातावरण को शुद्ध करने की बात करते हैं। पराली से इथनाल बनाने की बात करते हैं तो राजनीति शुरू हो जाती है। आम आदमी पार्टी पंजाब में डटकर यहां के मुद्दों पर खड़ी हैं।

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