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जाली दस्तावेज से बन गया नंबरदार

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Jalandhar
Jalandhar Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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जालंधर। आदमपुर के गांव जलपोत के एक व्यक्ति द्वारा जाली दस्तावेजों के आधार पर नंबरदार बनने का मामला सामने आया है। आरोप है कि उस व्यक्ति ने खुद को 15 साल की उम्र में स्कूल का ड्राइंग शिक्षक दर्शा दिया। इसके बाद डिवीजनल कमिश्नर व प्रशासनिक अधिकारियों को जाली दस्तावेजों के झांसे में लेकर नंबरदार की कुर्सी हथिया ली। गांव के लोगों पर रौब झाड़ने वाले इस जालसाज की पोल उस समय खुल गई जब उसके बारे में अंदरखाते कुछ लोगों ने जांच की तो पाया कि उसके सारे दस्तावेज नकली हैं। उच्चस्तरीय जांच के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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जलपोत गांव निवासी अनूप सिंह, अमरजीत सिंह, गुरमीत राम, दर्शन लाल आदि ने इस बारे में एसएसपी देहाती को को शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि उनके गांव का नंबरदार रघुबीर सिंह फर्जी मास्टर की डिग्री लेकर घूमता है, वह न तो शिक्षक है और न ही स्नातक है। इन दस्तावेजों के आधार पर वह गांव का नंबरदार भी नियुक्त कर दिया गया था। रघुबीर सिंह ने 2005 में नंबरदार पद के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन के साथ उसने शिक्षक व तजुर्बे का फर्जी दस्तावेज लगा दिया और खुद की उम्र 45 साल बताई। डिवीजनल कमिश्नर ने रघुबीर सिंह को नंबरदार नियुक्त कर दिया, तो दूसरे उम्मीदवार बावा सिंह हाईकोर्ट में चले गए।
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हाईकोर्ट ने इस केस में डीसी को नोटिस जारी कर जांच करने को कहा था। मामले की जांच शुरू हुई तो गांव हजारा के स्कूल का रिकार्ड खंगाला गया, जिसमें उसका कोई विवरण नहीं मिला। साफ हो गया कि वह इस स्कूल का शिक्षक नहीं है। दिलचस्प बात है कि 2005 में रघुबीर सिंह ने नंबरदार के लिए आवेदन किया था तो अपनी उम्र 45 साल बताते हुए 1975 का प्रमाण पत्र जारी किया था। 2005 के आवेदन के हिसाब से 1975 में रघुबीर की उम्र 15 साल बनती थी। जांच अधिकारी के समक्ष शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों व कागजातों के साथ यह बात उठाई गई कि कोई व्यक्ति 15 साल की उम्र में स्नातक कर स्कूल का मास्टर कैसे लग सकता है? इसकी बारीकी से जांच हुई तो सामने आया कि सारे दस्तावेज जाली थे। आखिरकार रघुबीर सिंह के खिलाफ जालसाजी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कर लिया गया है।
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