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सरपंचों ने अपने-अपने गांव के नशेड़ियों की तैयार नहीं की सूची
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:13 PM IST
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सरपंचों ने अपने-अपने गांव के नशेड़ियों की तैयार नहीं की सूची
सीमांत गांवों में बड़ी संख्या में हैं नशेड़ी
फिरोजपुर में सवा माह में नशे से मर चुके 15 नौजवान
अनिल कुमार
हुसैनीवाला बार्डर (फिरोजपुर)। जिला फिरोजपुर में सवा माह के भीतर नशे के सेवन से 15 नौजवानों की मौत के बाद भी सीमावर्ती गांवों में नशेड़ी नौजवानों की जिंदगी बचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम होता नजर नहीं आ रहा है। अभी तक किसी भी गांव के सरपंच ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है ताकि उन्हें इलाज के लिए नशा छुड़वाओं सेंटर में दाखिल करवा सके।
हुसैनीवाला बार्डर और सतलुज दरिया पार के बीच बसे लगभग 21 गांव व बस्तियों में दौरा करने पर एक बात स्पष्ट हो गई, किसी भी गांव के सरपंचों ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है ताकि उनका इलाज नशा छुड़वाओ सेंटरों में करवाकर उनकी जान बचाई जा सके। जबकि उक्त गांवों में नशेड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा है। यहां के कई नौजवान हेरोइन, स्मैक, नशीली गोलियां का सेवन करने के अलावा इंजेक्शन भी लगाते हैं। ग्रामीणों से पूछा गया कि नशेड़ियों की जानकारी हासिल करने के लिए पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे हैं तो जवाब मिला नहीं।
सीमावर्ती गांव गट्टी राजोके, हजारा सिंह वाला, टिंडी वाला, जलोके, चांदी वाला, खुंदर, भखड़ा व सीने वाला के अलावा कई बस्तियों में दौरा कर पता चला है कि उक्त गांवों में नशेड़ी नौजवानों की संख्या काफी है। लेकिन किसी भी सरपंच ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार कर उनके इलाज के लिए कोई योजना नहीं बनाई है। यहां पर कई नौजवान हेरोइन, स्मैक का सेवन करते हैं। पाकिस्तान का बार्डर उक्त गांवों से सटा हुआ है और पाकिस्तान से हेरोइन की खेप आना आम बात है। कई बार बीएसएफ ने यहां से हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी है। नशे को खत्म करने और नशेड़ी नौजवानों का इलाज करवाने के लिए रोजाना अधिकारियों की बैठकें हो रही है, जो कागजों तक सीमित है। हकीकत में सीमातर्वी गांवों में नशेड़ियों के इलाज के लिए कार्य नहीं हो रहा है।
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उधर, गांव जलोके के सरपंच सुरजीत सिंह का कहना है कि गांव में किसी नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है। गांव में कुछेक नौजवान है जो मेडिकल नशा करते हैं। एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि इलाज करवाने संबंधी नौजवानों से बातचीत करेंगे। इसी तरह गांव गट्टी राजोके जीत सिंह ने कहा कि गांव में ऐसे किसी व्यक्ति की सूची तैयार नहीं की है जो नशा करते हैं। यहां पर शराब का नशा ज्यादा है। यही हाल सभी गांवों के सरपंचों का है जिन्होंने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है।
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सीमांत गांवों में बड़ी संख्या में हैं नशेड़ी
फिरोजपुर में सवा माह में नशे से मर चुके 15 नौजवान
अनिल कुमार
हुसैनीवाला बार्डर (फिरोजपुर)। जिला फिरोजपुर में सवा माह के भीतर नशे के सेवन से 15 नौजवानों की मौत के बाद भी सीमावर्ती गांवों में नशेड़ी नौजवानों की जिंदगी बचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम होता नजर नहीं आ रहा है। अभी तक किसी भी गांव के सरपंच ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है ताकि उन्हें इलाज के लिए नशा छुड़वाओं सेंटर में दाखिल करवा सके।
हुसैनीवाला बार्डर और सतलुज दरिया पार के बीच बसे लगभग 21 गांव व बस्तियों में दौरा करने पर एक बात स्पष्ट हो गई, किसी भी गांव के सरपंचों ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है ताकि उनका इलाज नशा छुड़वाओ सेंटरों में करवाकर उनकी जान बचाई जा सके। जबकि उक्त गांवों में नशेड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा है। यहां के कई नौजवान हेरोइन, स्मैक, नशीली गोलियां का सेवन करने के अलावा इंजेक्शन भी लगाते हैं। ग्रामीणों से पूछा गया कि नशेड़ियों की जानकारी हासिल करने के लिए पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे हैं तो जवाब मिला नहीं।
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सीमावर्ती गांव गट्टी राजोके, हजारा सिंह वाला, टिंडी वाला, जलोके, चांदी वाला, खुंदर, भखड़ा व सीने वाला के अलावा कई बस्तियों में दौरा कर पता चला है कि उक्त गांवों में नशेड़ी नौजवानों की संख्या काफी है। लेकिन किसी भी सरपंच ने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार कर उनके इलाज के लिए कोई योजना नहीं बनाई है। यहां पर कई नौजवान हेरोइन, स्मैक का सेवन करते हैं। पाकिस्तान का बार्डर उक्त गांवों से सटा हुआ है और पाकिस्तान से हेरोइन की खेप आना आम बात है। कई बार बीएसएफ ने यहां से हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी है। नशे को खत्म करने और नशेड़ी नौजवानों का इलाज करवाने के लिए रोजाना अधिकारियों की बैठकें हो रही है, जो कागजों तक सीमित है। हकीकत में सीमातर्वी गांवों में नशेड़ियों के इलाज के लिए कार्य नहीं हो रहा है।
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उधर, गांव जलोके के सरपंच सुरजीत सिंह का कहना है कि गांव में किसी नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है। गांव में कुछेक नौजवान है जो मेडिकल नशा करते हैं। एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि इलाज करवाने संबंधी नौजवानों से बातचीत करेंगे। इसी तरह गांव गट्टी राजोके जीत सिंह ने कहा कि गांव में ऐसे किसी व्यक्ति की सूची तैयार नहीं की है जो नशा करते हैं। यहां पर शराब का नशा ज्यादा है। यही हाल सभी गांवों के सरपंचों का है जिन्होंने नशेड़ी नौजवानों की सूची तैयार नहीं की है।