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वाइल्ड लाइफ अधिकारियों ने ब्यास नदी में छोड़े दस घड़ियाल
Updated Mon, 25 Dec 2017 10:26 PM IST
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वाइल्ड लाइफ अधिकारियों ने ब्यास नदी में छोड़े दस घड़ियाल
हरिके पत्तन में घड़ियाल छोड़ने का किसान कर रहे विरोध
पंजाब में घड़ियाल खत्म होने के कारण की जा रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। सतलुज-ब्यास का संगम हरिके पत्तन दरिया में घड़ियाल छोड़े जाने के विरोध को देखते हुए सोमवार को वाइल्ड लाइफ अधिकारियों ने गांव गड्डेवाल के पास बहती ब्यास नदी में दस घड़ियाल छोड़े। इस दौरान विधानसभा हलके बाबा बकाला के विधायक संतोख सिंह भालपुरिया भी उपस्थित थे।
फिरोजपुर के डीएफओ चरणजीत सिंह ने बताया कि हरिके पत्तन से 60 किमी ऊपर ब्यास नदी में सोमवार सुबह लगभग 10.30 बजे 10 घड़ियाल छोड़े गए। हरिके पत्तन में भी घड़ियाल छोड़े जाने हैं लेकिन किसान घड़ियाल छोड़ने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। किसानों की मांगों की एक रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी गई है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन बहुत नीचे हैं। पानी अधिक होने पर घड़ियाल उनके खेतों में आकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि हरिके पत्तन में घड़ियाल छोड़ने में विलंब हो रहा है। पंजाब की नदियों व दरियाओं में घड़ियाल प्रजाति खत्म हो चुकी थी। इसलिए पंजाब की नदियों में घड़ियाल छोड़े जा रहे हैं।
मौके पर पंजाब के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डा. कुलदीप सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर गीतांजली कंवर, निधि श्रीवास्तव, अमृतसर के डीएफओ राजेश गुलाटी उपस्थित थे।
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फोटो संख्या-25एफजेडआरपी01
कैप्शन--फिरोजपुर के डीएफओ की मौजूदगी में विधानसभा हलके बाबा बकाला के विधायक संतोख सिंह ब्यास नदी में घडिय़ाल छोड़ते हुए।
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हरिके पत्तन में घड़ियाल छोड़ने का किसान कर रहे विरोध
पंजाब में घड़ियाल खत्म होने के कारण की जा रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। सतलुज-ब्यास का संगम हरिके पत्तन दरिया में घड़ियाल छोड़े जाने के विरोध को देखते हुए सोमवार को वाइल्ड लाइफ अधिकारियों ने गांव गड्डेवाल के पास बहती ब्यास नदी में दस घड़ियाल छोड़े। इस दौरान विधानसभा हलके बाबा बकाला के विधायक संतोख सिंह भालपुरिया भी उपस्थित थे।
फिरोजपुर के डीएफओ चरणजीत सिंह ने बताया कि हरिके पत्तन से 60 किमी ऊपर ब्यास नदी में सोमवार सुबह लगभग 10.30 बजे 10 घड़ियाल छोड़े गए। हरिके पत्तन में भी घड़ियाल छोड़े जाने हैं लेकिन किसान घड़ियाल छोड़ने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। किसानों की मांगों की एक रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी गई है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन बहुत नीचे हैं। पानी अधिक होने पर घड़ियाल उनके खेतों में आकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि हरिके पत्तन में घड़ियाल छोड़ने में विलंब हो रहा है। पंजाब की नदियों व दरियाओं में घड़ियाल प्रजाति खत्म हो चुकी थी। इसलिए पंजाब की नदियों में घड़ियाल छोड़े जा रहे हैं।
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मौके पर पंजाब के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डा. कुलदीप सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर गीतांजली कंवर, निधि श्रीवास्तव, अमृतसर के डीएफओ राजेश गुलाटी उपस्थित थे।
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फोटो संख्या-25एफजेडआरपी01
कैप्शन--फिरोजपुर के डीएफओ की मौजूदगी में विधानसभा हलके बाबा बकाला के विधायक संतोख सिंह ब्यास नदी में घडिय़ाल छोड़ते हुए।