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केंद्रीय कृषि मंत्री ने %सीचेवाल माडल% की महत को समझा
Updated Sun, 25 Mar 2018 10:08 PM IST
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केंद्रीय मंत्री ने सीचेवाल मॉडल की महता जानी
संत सीचेवाल ने बताया, यह माडल सूबे की आर्थिकता को दे सकता है बढ़ावा
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने पंजाब के सीचेवाल माडल की बारीकियों को समझा कि कैसे दूषित पानी का संशोधन कर खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से कृषि भवन नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय कृषि खोज पर तीसरी राष्ट्रीय कांफ़्रेंस के दौरान पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सीचेवाल मॉडल के बारे में चर्चा की। संत सीचेवाल ने दूषित जल को खेती लायक बनाकर नदियां-दरियाओं को दूषित होने से बचाने का आह्वान किया। दो दशक पहले सीचेवाल माडल को स्थापित करने वाले संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को बताया कि पंजाब कैसे जलसंकट से जूझ रहा है और भूजल किस तरह बर्बाद हो रहा है। सूबे में गहराते जल संकट का हल निकालते हुए गांव सीचेवाल में छप्पड़ के पानी को कुदरती तरीकों से संशोधित कर खेती के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। बाबा नानक की नगरी सुल्तानपुर लोधी के शहर का गंदा पानी जो पहले नदी में जाता था, को रोककर 13 किलोमीटर तक खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। दसूहा शहर का पानी पांच किलोमीटर तक सिंचाई में लग रहा है। कपूरथला का पानी 18 किलोमीटर तक खेती को लगाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जा रही है।
-12500 गांवों वाले पंजाब में 13.50 लाख मोटरें खतरे की घंटी
संत सीचेवाल ने कांफ्रेंस में सूबे के जल संकट की भयावह तस्वीर दिखाते हुए बताय कि पंजाब में 12500 के करीब गांव हैं और 13. 50 लाख से अधिक मोटरें भूजल दोहन कर रही हैँ। सूबे के एक गांव बीणेवाल का जिक्र करते हुए बताया कि यहां पर खेती के लिए 1200 फुट गहरी मोटर लग चुकी है, जो सूबे में जलसंकट के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने बताया कि अप्रवासी पंजाबियों की मदद से 125 के करीब गांवों में छप्पड़ों का पानी संशोधन करके खेती में इस्तेमाल करने लायक बनाया गया है। यह पद्वति पूरे सूबे के गांवों और शहरों में भी लागू हो सकती है। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से 100 के करीब और गांवों में सीचेवाल मॉडल को अपनाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कुदरत के अनकूल पानी को साफ करके खेती के लिए इस्तेमाल किए जाने का जो माडल संत सीचेवाल ने देश के आगे रखा है, वह प्रशंसनीय है। इस को खेती प्रधान सूबों में लागू करने के लिए विचार किया जाएगा।
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संत सीचेवाल ने बताया, यह माडल सूबे की आर्थिकता को दे सकता है बढ़ावा
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने पंजाब के सीचेवाल माडल की बारीकियों को समझा कि कैसे दूषित पानी का संशोधन कर खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से कृषि भवन नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय कृषि खोज पर तीसरी राष्ट्रीय कांफ़्रेंस के दौरान पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सीचेवाल मॉडल के बारे में चर्चा की। संत सीचेवाल ने दूषित जल को खेती लायक बनाकर नदियां-दरियाओं को दूषित होने से बचाने का आह्वान किया। दो दशक पहले सीचेवाल माडल को स्थापित करने वाले संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को बताया कि पंजाब कैसे जलसंकट से जूझ रहा है और भूजल किस तरह बर्बाद हो रहा है। सूबे में गहराते जल संकट का हल निकालते हुए गांव सीचेवाल में छप्पड़ के पानी को कुदरती तरीकों से संशोधित कर खेती के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। बाबा नानक की नगरी सुल्तानपुर लोधी के शहर का गंदा पानी जो पहले नदी में जाता था, को रोककर 13 किलोमीटर तक खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। दसूहा शहर का पानी पांच किलोमीटर तक सिंचाई में लग रहा है। कपूरथला का पानी 18 किलोमीटर तक खेती को लगाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जा रही है।
-12500 गांवों वाले पंजाब में 13.50 लाख मोटरें खतरे की घंटी
संत सीचेवाल ने कांफ्रेंस में सूबे के जल संकट की भयावह तस्वीर दिखाते हुए बताय कि पंजाब में 12500 के करीब गांव हैं और 13. 50 लाख से अधिक मोटरें भूजल दोहन कर रही हैँ। सूबे के एक गांव बीणेवाल का जिक्र करते हुए बताया कि यहां पर खेती के लिए 1200 फुट गहरी मोटर लग चुकी है, जो सूबे में जलसंकट के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने बताया कि अप्रवासी पंजाबियों की मदद से 125 के करीब गांवों में छप्पड़ों का पानी संशोधन करके खेती में इस्तेमाल करने लायक बनाया गया है। यह पद्वति पूरे सूबे के गांवों और शहरों में भी लागू हो सकती है। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से 100 के करीब और गांवों में सीचेवाल मॉडल को अपनाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कुदरत के अनकूल पानी को साफ करके खेती के लिए इस्तेमाल किए जाने का जो माडल संत सीचेवाल ने देश के आगे रखा है, वह प्रशंसनीय है। इस को खेती प्रधान सूबों में लागू करने के लिए विचार किया जाएगा।
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