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राणा गुरजीत सिंह को बर्खास्त किया जाए- खैहरा
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:29 PM IST
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राणा गुरजीत सिंह को बर्खास्त किया जाए: खैरा
जालंधर। पंजाब के मंत्री राणा गुरजीत सिंह के बेटे इंद्र प्रताप सिंह के ईडी के राडार पर आने के बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता सुखपाल खैरा ने एक वीडियो जारी किया है। जिसमें खैरा ने कहा कि राणा गुरजीत सिंह एक अपराधी है, जिसे बार-बार अपराध करने की आदत है। ऐसे लोगों को कैबिनेट मंत्री पद पर रहने का कोई हक नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को तत्काल राणा को बर्खास्त कर देना चाहिए।
सभी केंद्र
बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह का बेटा ईडी के राडार पर
8 मिलियन डालर की अवैध ढंग से ट्रांजेक्शन की आशंका
राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह को 17 जनवरी को ईडी ने बुलाया
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर।
पंजाब के बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह अब एक नए विवाद में फंस गए हैं। उनके बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना इजाजत विदेशों में ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट (जीडीआर) के माध्यम से करीब 18 मिलियन डॉलर जुटाए और फिर उसे मदिरा आईलैंड, पुर्तगाल के एक बैंक में जमाकर इस राशि को भारत में अपनी कंपनी राणा शुगर्स लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर किया। ईडी ने मंत्री के बेटे को राडार पर लिया है। उसे 17 जनवरी को सम्मन कर बुलाया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने राणा इंद्र प्रताप सिंह को नोटिस भेजकर 17 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय को शंका है कि राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह ने विदेशों में कंपनी के शेयर बेचकर गैर कानूनी तरीके से पैसा एकत्र किया। 1992 में राणा गुरजीत सिंह द्वारा स्थापित राणा शुगर्स लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम पर इकट्ठा किया गया, जिसका मुख्यालय चंडीगढ़ में है। राणा गुरजीत सिंह के बेटे इंद्र प्रताप इस कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं।
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सूत्रों के मुताबिक राणा इंदर प्रताप सिंह ने फेमा का उल्लंघन कर न केवल अवैध तरीके से पैसा जुटाया, बल्कि विदेशी निवेशकों के जरिये विदेशी बैंकों से उठाए कर्ज की गारंटी भी दी। राणा शुगर लिमिटेड ने भारतीय रिजर्व बैंक को इस राशि के बारे में कोई सूचना नहीं दी। जबकि फेमा नियमों के तहत रिजर्व बैंक को विदेशों में जुटाए धन की जानकारी देना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक ईडी के ध्यान में यह गड़बड़झाला सेबी द्वारा लाया गया है। क्योंकि राणा की कंपनी ने सेबी को भी 17 मिलियन डालर जुटाने की सूचना नहीं दी थी। राणा शुगर्स लिमिटेड ने डिपार्टमेंट ऑफ इकनोमिक अफेयर्स द्वारा 19 जनवरी 2000 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि नियमों के तहत ही विदेशों से पैसा जुटाया है। प्रवर्तन निदेशालय राणा शुगर्स लिमिटेड के जवाब से संतुष्ट नहीं है। राणा शुगर्स ने साल 2005-06 से 2007-08 की ऑडिट बैलेंस शीट की कापियों समेत कंपनी की तरफ से जारी जीडीआर की जानकारी जुटाई थी। लेकिन ईडी ने असंतुष्टि जाहिर करते हुए 2 जनवरी को इंद्र प्रताप सिंह को सम्मन जारी किए हैं। नोटिस के आधार पर राणा शुगर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राणा इंद्र प्रताप सिंह को व्यक्तिगत रूप से 17 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय में हाजिर होने के लिए कहा है। राणा गुरजीत सिंह के बेटे को ईडी की ओर से सम्मन जारी करने की घटना के बाद सूबे की राजनीति गरमा गई है।
हमने कोई कानून नहीं तोड़ा : इंद्र प्रताप सिंह
मंत्री के बेटे इंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हमने कोई कानून नहीं तोड़ा। आरबीआई और ईडी की तरफ से मांगी सारी जानकारी उन्हें मुहैया करा दी गई है। ईडी ने मुझसे निजी तौर पर कोई अधिक जानकारी नहीं मांगी। वैसे उन्होंने कहा कि यह सारी गड़बड़ी कंपनी के खातों का प्रबंध देखने वाले लोगों कारण हुई है।
10 माह की सरकार में चौथी बार विवादों में फंसे राणा गुरजीत सिंह, विपक्ष को मिला चौथी बार मुद्दा
खनन को लेकर अभी विवाद ठंडा नहीं हुआ था ईडी ने घेर लिया मंत्री के बेटे को
सुरिंदर पाल
जालंधर। कैप्टन सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को ऊर्जा मंत्री राणा गुरजीत सिंह एक सॉफ्ट टारगेट के रूप में मिल रहे हैं। पिछले दस माह में चौथी बार राणा गुरजीत सिंह विवादों में घिरे हैं और विपक्ष को दोबारा एक मुद्दा दे दिया है। राणा गुरजीत सिंह के कट्टर विरोधी आप विधायक सुखपाल खैहरा विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और उनके लगातार हमले राणा गुरजीत पर चल रहे हैं। खैहरा को अब एक नया मुद्दा मिल गया है।
पिछले साल सत्ता में आने के बाद खनन की नीलामी के बाद खुलासा हुआ 26 करोड़ रुपए की बोली लगाकर रेत खनन का अधिकार हासिल करने वाला शख्स अमित बहादुर (36) राणा गुरजीत सिंह का रसोइया रहा है। पता चला कि उसने बीते तीन सालों में सिर्फ एक लाख रुपए का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। अमित बहादुर के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अकाउंट के खाते की जानकारी के दौरान सामने आया कि बीते एक अप्रैल (2017) तक उनके अकाउंट में महज में 4,840 रुपए की राशि जमा थी। कैप्टन अमरिंदर की सरकार में पहली बार खनन बोली 19 अप्रैल को लगाई गई थी। जबकि नीलामी में खनन का हासिल का अधिकार करने वाले शख्स को 21 और 22 मई तक इसकी राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे। बहादुर के अकाउंट में बीते एक साल के दौरान 18,000 से 22,000 रुपए तक की राशि रही है। अमित बहादुर ने 21 मई (2017) नवानशहर के शादीपुर खुर्द में 26.51 करोड़ की बोली लगाकर जीती गई खनन अधिकार की पहली किस्त 13.23 करोड़ रुपए जमा की। इसको लेकर खासा हंगामा खड़ा हो गया क्योंकि इसके अलावा तीन लोगों को और एक-एक टेंडर मिले थे, जिसमें कुलविंदर पाल, बलराज सिंह और तीसरे हैं गुरविंदर सिंह। ये तीनो भी पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कम्पनी में उनके निजी कर्मचारी हैं जिनकी तनख्वाह 20 से 25 हजार रुपए से ज्यादा नहीं थी। इस मामले में जहां आप के नेताओं ने जमकर धावा बोला वहीं शिअद भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई मांगी। कैप्टन को इस मामले में रिटायर जज के नेतृत्व में आयोग का गठन करना पड़ा।
राणा पर विवाद बिजली मंत्री को लेकर भी उठा और मामला हाईकोर्ट तक गया। विधायक एचएस फूलका ने तो खुलेआम आरोप लगाया कि राणा गुरजीत सिंह जो कि राणा शूगर लिमिटेड के सह-संस्थापक हैं और वह पंजाब स्टेट पावर निगम लिमिटेड को बिजली बेच रही है। इस तरह यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री होने के नाते राणा पावरकॉम को कंट्रोल कर रहे हैं, इस तरह से वह खुद की कंपनी से बिजली खरीद रहे हैं।
तीसरा विवाद एक हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले के ठेकेदार गुरिंदर सिंह को लेकर पैदा हुआ और उसके तार राणा गुरजीत सिंह से जुड़ते पाये गए। गुरिंद्र सिंह ने राणा गुरजीत सिंह के चार्टर्ड अकाऊंटैंट टी.एन. सिंगला के भतीजे जतिन गर्ग के खाते में 23 मई को 5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे और उसी दिन गर्ग ने उक्त राशि की 50 फीसदी राशि की अदायगी राजबीर इंटरप्राइजिज (जिसने खनन प्राप्ति के लिए राणा गुरजीत सिंह के पूर्व कर्मचारियों द्वारा बोली लगाई) को ट्रांसफर कर दी थी। खैहरा ने शोर मचाया कि उन्होंने गत 13 व 17 अक्तूबर को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह को सबूतों के साथ यह जानकारी दी थी कि राणा गुरजीत सिंह के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों आरजीएस ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड व आरजे टैक्सफेव ने क्रमश: 36 लाख व 4.52 करोड़ रुपए का खदान घोटाले में शामिल राजबीर इंटरप्राइजिज में निवेश किया। तीन विवादों के इलावा गन्ना खरीद को लेकर भी राणा विप्ष के निशाने पर रहे कि उनकी कंपनी किसानों को चूस रही है। उनकी शूगर मिला 35-35 क्विंटल गन्ना कम तोलकर किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है। अभी तीनों मुख्य विवादों की आग ठंडी नहीं हुई थी कि ईडी का नया बवाल खड़ा हो गया है।
सुरिंदर पाल
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जालंधर। पंजाब के मंत्री राणा गुरजीत सिंह के बेटे इंद्र प्रताप सिंह के ईडी के राडार पर आने के बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता सुखपाल खैरा ने एक वीडियो जारी किया है। जिसमें खैरा ने कहा कि राणा गुरजीत सिंह एक अपराधी है, जिसे बार-बार अपराध करने की आदत है। ऐसे लोगों को कैबिनेट मंत्री पद पर रहने का कोई हक नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को तत्काल राणा को बर्खास्त कर देना चाहिए।
सभी केंद्र
बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह का बेटा ईडी के राडार पर
8 मिलियन डालर की अवैध ढंग से ट्रांजेक्शन की आशंका
राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह को 17 जनवरी को ईडी ने बुलाया
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर।
पंजाब के बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह अब एक नए विवाद में फंस गए हैं। उनके बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना इजाजत विदेशों में ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट (जीडीआर) के माध्यम से करीब 18 मिलियन डॉलर जुटाए और फिर उसे मदिरा आईलैंड, पुर्तगाल के एक बैंक में जमाकर इस राशि को भारत में अपनी कंपनी राणा शुगर्स लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर किया। ईडी ने मंत्री के बेटे को राडार पर लिया है। उसे 17 जनवरी को सम्मन कर बुलाया गया है।
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प्रवर्तन निदेशालय ने राणा इंद्र प्रताप सिंह को नोटिस भेजकर 17 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के लिए कहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय को शंका है कि राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह ने विदेशों में कंपनी के शेयर बेचकर गैर कानूनी तरीके से पैसा एकत्र किया। 1992 में राणा गुरजीत सिंह द्वारा स्थापित राणा शुगर्स लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम पर इकट्ठा किया गया, जिसका मुख्यालय चंडीगढ़ में है। राणा गुरजीत सिंह के बेटे इंद्र प्रताप इस कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं।
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सूत्रों के मुताबिक राणा इंदर प्रताप सिंह ने फेमा का उल्लंघन कर न केवल अवैध तरीके से पैसा जुटाया, बल्कि विदेशी निवेशकों के जरिये विदेशी बैंकों से उठाए कर्ज की गारंटी भी दी। राणा शुगर लिमिटेड ने भारतीय रिजर्व बैंक को इस राशि के बारे में कोई सूचना नहीं दी। जबकि फेमा नियमों के तहत रिजर्व बैंक को विदेशों में जुटाए धन की जानकारी देना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक ईडी के ध्यान में यह गड़बड़झाला सेबी द्वारा लाया गया है। क्योंकि राणा की कंपनी ने सेबी को भी 17 मिलियन डालर जुटाने की सूचना नहीं दी थी। राणा शुगर्स लिमिटेड ने डिपार्टमेंट ऑफ इकनोमिक अफेयर्स द्वारा 19 जनवरी 2000 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि नियमों के तहत ही विदेशों से पैसा जुटाया है। प्रवर्तन निदेशालय राणा शुगर्स लिमिटेड के जवाब से संतुष्ट नहीं है। राणा शुगर्स ने साल 2005-06 से 2007-08 की ऑडिट बैलेंस शीट की कापियों समेत कंपनी की तरफ से जारी जीडीआर की जानकारी जुटाई थी। लेकिन ईडी ने असंतुष्टि जाहिर करते हुए 2 जनवरी को इंद्र प्रताप सिंह को सम्मन जारी किए हैं। नोटिस के आधार पर राणा शुगर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राणा इंद्र प्रताप सिंह को व्यक्तिगत रूप से 17 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय में हाजिर होने के लिए कहा है। राणा गुरजीत सिंह के बेटे को ईडी की ओर से सम्मन जारी करने की घटना के बाद सूबे की राजनीति गरमा गई है।
हमने कोई कानून नहीं तोड़ा : इंद्र प्रताप सिंह
मंत्री के बेटे इंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हमने कोई कानून नहीं तोड़ा। आरबीआई और ईडी की तरफ से मांगी सारी जानकारी उन्हें मुहैया करा दी गई है। ईडी ने मुझसे निजी तौर पर कोई अधिक जानकारी नहीं मांगी। वैसे उन्होंने कहा कि यह सारी गड़बड़ी कंपनी के खातों का प्रबंध देखने वाले लोगों कारण हुई है।
10 माह की सरकार में चौथी बार विवादों में फंसे राणा गुरजीत सिंह, विपक्ष को मिला चौथी बार मुद्दा
खनन को लेकर अभी विवाद ठंडा नहीं हुआ था ईडी ने घेर लिया मंत्री के बेटे को
सुरिंदर पाल
जालंधर। कैप्टन सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को ऊर्जा मंत्री राणा गुरजीत सिंह एक सॉफ्ट टारगेट के रूप में मिल रहे हैं। पिछले दस माह में चौथी बार राणा गुरजीत सिंह विवादों में घिरे हैं और विपक्ष को दोबारा एक मुद्दा दे दिया है। राणा गुरजीत सिंह के कट्टर विरोधी आप विधायक सुखपाल खैहरा विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और उनके लगातार हमले राणा गुरजीत पर चल रहे हैं। खैहरा को अब एक नया मुद्दा मिल गया है।
पिछले साल सत्ता में आने के बाद खनन की नीलामी के बाद खुलासा हुआ 26 करोड़ रुपए की बोली लगाकर रेत खनन का अधिकार हासिल करने वाला शख्स अमित बहादुर (36) राणा गुरजीत सिंह का रसोइया रहा है। पता चला कि उसने बीते तीन सालों में सिर्फ एक लाख रुपए का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। अमित बहादुर के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अकाउंट के खाते की जानकारी के दौरान सामने आया कि बीते एक अप्रैल (2017) तक उनके अकाउंट में महज में 4,840 रुपए की राशि जमा थी। कैप्टन अमरिंदर की सरकार में पहली बार खनन बोली 19 अप्रैल को लगाई गई थी। जबकि नीलामी में खनन का हासिल का अधिकार करने वाले शख्स को 21 और 22 मई तक इसकी राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे। बहादुर के अकाउंट में बीते एक साल के दौरान 18,000 से 22,000 रुपए तक की राशि रही है। अमित बहादुर ने 21 मई (2017) नवानशहर के शादीपुर खुर्द में 26.51 करोड़ की बोली लगाकर जीती गई खनन अधिकार की पहली किस्त 13.23 करोड़ रुपए जमा की। इसको लेकर खासा हंगामा खड़ा हो गया क्योंकि इसके अलावा तीन लोगों को और एक-एक टेंडर मिले थे, जिसमें कुलविंदर पाल, बलराज सिंह और तीसरे हैं गुरविंदर सिंह। ये तीनो भी पंजाब सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कम्पनी में उनके निजी कर्मचारी हैं जिनकी तनख्वाह 20 से 25 हजार रुपए से ज्यादा नहीं थी। इस मामले में जहां आप के नेताओं ने जमकर धावा बोला वहीं शिअद भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई मांगी। कैप्टन को इस मामले में रिटायर जज के नेतृत्व में आयोग का गठन करना पड़ा।
राणा पर विवाद बिजली मंत्री को लेकर भी उठा और मामला हाईकोर्ट तक गया। विधायक एचएस फूलका ने तो खुलेआम आरोप लगाया कि राणा गुरजीत सिंह जो कि राणा शूगर लिमिटेड के सह-संस्थापक हैं और वह पंजाब स्टेट पावर निगम लिमिटेड को बिजली बेच रही है। इस तरह यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री होने के नाते राणा पावरकॉम को कंट्रोल कर रहे हैं, इस तरह से वह खुद की कंपनी से बिजली खरीद रहे हैं।
तीसरा विवाद एक हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले के ठेकेदार गुरिंदर सिंह को लेकर पैदा हुआ और उसके तार राणा गुरजीत सिंह से जुड़ते पाये गए। गुरिंद्र सिंह ने राणा गुरजीत सिंह के चार्टर्ड अकाऊंटैंट टी.एन. सिंगला के भतीजे जतिन गर्ग के खाते में 23 मई को 5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे और उसी दिन गर्ग ने उक्त राशि की 50 फीसदी राशि की अदायगी राजबीर इंटरप्राइजिज (जिसने खनन प्राप्ति के लिए राणा गुरजीत सिंह के पूर्व कर्मचारियों द्वारा बोली लगाई) को ट्रांसफर कर दी थी। खैहरा ने शोर मचाया कि उन्होंने गत 13 व 17 अक्तूबर को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह को सबूतों के साथ यह जानकारी दी थी कि राणा गुरजीत सिंह के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों आरजीएस ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड व आरजे टैक्सफेव ने क्रमश: 36 लाख व 4.52 करोड़ रुपए का खदान घोटाले में शामिल राजबीर इंटरप्राइजिज में निवेश किया। तीन विवादों के इलावा गन्ना खरीद को लेकर भी राणा विप्ष के निशाने पर रहे कि उनकी कंपनी किसानों को चूस रही है। उनकी शूगर मिला 35-35 क्विंटल गन्ना कम तोलकर किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है। अभी तीनों मुख्य विवादों की आग ठंडी नहीं हुई थी कि ईडी का नया बवाल खड़ा हो गया है।
सुरिंदर पाल