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सिविल अस्पताल में लैब टेस्ट न होने से मरीज परेशान
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:12 PM IST
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सिविल अस्पताल में लैब टेस्ट न होने से मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद (फिरोजपुर)।
भले ही शहर में करोड़ों की लागत से नया सिविल अस्पताल बनकर तैयार हो गया है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है। छोटे-छोटे टेस्टों के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंगलवार को भी देखने को मिला कि जब मरीज लैब टेस्ट करवाने पहुंचे तो लैब में टेस्ट सामग्री नहीं थी। इस कारण मरीजों को बाहर की लैब से टेस्ट करवाने पड़े जो बहुत महंगे थे।
कुलदीप सिंह पुत्र हंसा सिंह निवासी हजारा राम सिंह वाला ने बताया कि वह अपनी बीमार पत्नी का उपचार करवाने के लिए सिविल अस्पताल आए थे। जब वहां लैब टेस्ट करवाने की बात आई तो उन्होंने कहा कि लैब में टेस्ट करने के लिए सामग्री मौजूद नहीं है और एक-दो दिन लग सकते हैं इसलिए आप बाहर से टेस्ट करवा लें। कुलदीप सिंह ने बताया कि 104 नंबर पर डायल करके पूछा गया तो उन्होंने 19 नंबर रूम पर जाने को कहा लेकिन 19 नंबर रूम में कोई नहीं था। जब कोई हल नहीं हुआ तो आखिरकार फिर उसने प्राइवेट लैब से टेस्ट करवाया। टेस्ट काफी महंगा था। उन्होंने बताया कि अगर सरकार सरकारी अस्पताल में लैब टेस्ट की सुविधा देती है तो वहां सामग्री भी होनी चाहिए ताकि निर्धारित टेस्ट हो सके लेकिन वहां मौजूद स्टाफ किसी भी जिम्मेदारी को लेने को तैयार नहीं है। स्थानीय अस्पताल की एसएमओ डा. अमिता चौधरी का कहना है कि बीच में छुट्टियां आने के कारण लैब टेस्ट के लिए सामग्री नहीं पहुंच पाई। जल्द ही टेस्ट सामग्री अस्पताल में आ जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद (फिरोजपुर)।
भले ही शहर में करोड़ों की लागत से नया सिविल अस्पताल बनकर तैयार हो गया है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है। छोटे-छोटे टेस्टों के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंगलवार को भी देखने को मिला कि जब मरीज लैब टेस्ट करवाने पहुंचे तो लैब में टेस्ट सामग्री नहीं थी। इस कारण मरीजों को बाहर की लैब से टेस्ट करवाने पड़े जो बहुत महंगे थे।
कुलदीप सिंह पुत्र हंसा सिंह निवासी हजारा राम सिंह वाला ने बताया कि वह अपनी बीमार पत्नी का उपचार करवाने के लिए सिविल अस्पताल आए थे। जब वहां लैब टेस्ट करवाने की बात आई तो उन्होंने कहा कि लैब में टेस्ट करने के लिए सामग्री मौजूद नहीं है और एक-दो दिन लग सकते हैं इसलिए आप बाहर से टेस्ट करवा लें। कुलदीप सिंह ने बताया कि 104 नंबर पर डायल करके पूछा गया तो उन्होंने 19 नंबर रूम पर जाने को कहा लेकिन 19 नंबर रूम में कोई नहीं था। जब कोई हल नहीं हुआ तो आखिरकार फिर उसने प्राइवेट लैब से टेस्ट करवाया। टेस्ट काफी महंगा था। उन्होंने बताया कि अगर सरकार सरकारी अस्पताल में लैब टेस्ट की सुविधा देती है तो वहां सामग्री भी होनी चाहिए ताकि निर्धारित टेस्ट हो सके लेकिन वहां मौजूद स्टाफ किसी भी जिम्मेदारी को लेने को तैयार नहीं है। स्थानीय अस्पताल की एसएमओ डा. अमिता चौधरी का कहना है कि बीच में छुट्टियां आने के कारण लैब टेस्ट के लिए सामग्री नहीं पहुंच पाई। जल्द ही टेस्ट सामग्री अस्पताल में आ जाएगी।
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