बेअदबी की घटनाओं के पीछे सुखबीर बादल, सैनी व डेरा प्रमुख की सांठगांठः एसआईटी
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कोटकपूरा गोलीकांड की घटना में एसआईटी द्वारा दो दिन पहले फरीदकोट की अदालत में दायर चार्जशीट में बेअदबी की घटनाओं के पीछे तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के बीच सांठगांठ होने का दावा किया है।
एसआईटी के अनुसार तत्कालीन पंजाब सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2015 को राज्य के इंटेलिजेंस चीफ एचएस ढिल्लों का बिना किसी वजह से तबादला कर दिया गया था और उनकी जगह जूनियर रैंक वाले डीआईजी आरके जायसवाल को इंटेलिजेंस चीफ नियुक्त किया गया और उन्हें सीधे डीजीपी पंजाब को रिपोर्ट करने की हिदायत दी गई थी।
चार्जशीट में लिखा गया है कि इंटेलिजेंस चीफ के तबादले के बाद ही महज 20 दिनों के भीतर बरगाड़ी समेत राज्यभर के अलग-अलग हिस्सों में बेअदबी की 15 घटनाएं सामने आई थी और यह सब साजिश के तहत ही पेश आई थी। एसआईटी के सदस्य व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा जांच के आधार पर तैयार चार्जशीट के अनुसार इंटेलिजेंस चीफ ढिल्लों के तबादले के बाद कई सीनियर अधिकारी उक्त पद पर तैनात होने को तैयार थे। लेकिन एक जूनियर अधिकारी को पद पर तैनात किया गया और उनके नियुक्त होते ही एक के बाद एक बेअदबी की घटनाएं पेश आने लगी।
एसआईटी ने सुखबीर सिंह बादल व डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुलाकात को भी सवालों के घेरे में लिया है। यह मुलाकात फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने करवाई थी और दोनों को ( डेरा प्रमुख व अक्षय कुमार) को अपनी-अपनी फिल्मों की क्रमवार पंजाब सरकार व एसजीपीसी से हरी झंडी लेनी थी।
इस मुलाकात के बाद ही 24 सितंबर 2015 को डेरा प्रमुख को श्री अकाल तख्त साहिब से माफी मिली और 25 सितंबर को उनकी फिल्म एमएसजी टू रिलीज की गई। इसके बाद 2 अक्टूबर को अक्षय कुमार की फिल्म सिंह इज ब्लिंग भी रिलीज होने का रास्ता साफ हो गया। एसआईटी के अनुसार इंटेलिजेंस चीफ के तबादले के बारे में जब सुखबीर सिंह बादल व सुमेध सिंह सैनी से पूछताछ की गई थी तो दोनों ही एसआईटी को संतुष्ट नहीं करवा पाए।