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कारगिल के शूरवीर: 12 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारकर कैप्टन रघुनाथ ने फहराया था तिरंगा

Tue, 26 Jul 2022 09:47 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट
नवदीप शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 26 Jul 2022 09:47 AM IST
सार

कैप्टन विक्रम बत्तरा की शहादत के बाद रघुनाथ सिंह ने कमान संभाली। वह अपने साथियों के साथ रेंगते हुए धीरे धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ते चले गए। इस दौरान उन्होंने पाक सेना के ग्रुप कमांडर इम्तियाज खां समेत 12 पाक सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया।  

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Inspiring Story of Veer Chakra winner Captain Raghunath Singh fought in Kargil war
कारगिल युद्ध जीतने के बाद तिरंगा फहराते सेना के जवान। - फोटो : फाइल

विस्तार

कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन विक्रम बत्तरा की शहादत का बदला लेने वाले वीर चक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह की शूरवीरता को भला कौन भूल सकता है। इन्हें दुश्मनों के सीने पर संगीनें गाड़कर बर्फीली चोटी पर तिरंगा फहराने का गौरव हासिल है। इससे पहले उन्होंने 12 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। 

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पठानकोट के गांव घरोटा निवासी वीरचक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह के जेहन में आज भी कारगिल युद्ध की यादें ताजा हैं। रघुनाथ बताते हैं कि महज 18 महीने की नौकरी के बाद ही कैप्टन विक्रम बत्तरा को कारगिल जाना पड़ा। वह खुद भी बतौर सूबेदार उनके साथ थे। 22 जून 1999 को द्रास सेक्टर की प्वाइंट 5140 चोटी पर दुश्मन ने कब्जा जमाया हुआ था। कैप्टन बत्तरा ने अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए 10 पाक सैनिकों को मारकर उस चोटी पर तिरंगा फहराया। चोटी फतेह करने के बाद कैप्टन बत्तरा ने अपने कमांडिंग अफसर को फोन कर कहा कि सर! ‘यह दिल मांगे मोर’। अब मुझे दूसरा टास्क दें। कैप्टन बत्तरा का ‘यह दिल मांगे मोर’ का जयघोष सारे देश में चर्चित रहा। 

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Inspiring Story of Veer Chakra winner Captain Raghunath Singh fought in Kargil war
कैप्टन रघुनाथ सिंह और कुंवर रविंदर विक्की। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

जूनियर को बचाते हुए शहीद हुए थे कैप्टन बत्तरा

रघुनाथ आगे बताते हैं कि 7 जुलाई 1999 को उन्हें और कैप्टन विक्रम बत्तरा को मास्को घाटी की प्वाइंट 4875 की चोटी को दुश्मन से आजाद कराने का टास्क मिला। ऊंचाई पर कब्जा जमाए बैठे पाकिस्तानी दुश्मनों को निशाना बनाना मुश्किल हो रहा था। कैप्टन बत्तरा ने अपनी कुशल रणनीति से न केवल पाकिस्तानी दुश्मनों को मौत के घाट उतारा बल्कि इस दुर्गम चोटी को आजाद भी करा लिया। मिशन पूरा हो चुका था।

तभी उनकी नजर अपने जूनियर साथी लेफ्टिनेंट नवीन पर पड़ी, जिनका पांव दुश्मन की ओर से फेंके ग्रेनेड से बुरी तरह जख्मी हो गया था। कैप्टन बत्तरा अपने साथी को कंधे पर उठा सुरक्षित जगह पर लेकर जा रहे थे। इसी दौरान पाक सैनिकों ने नजदीक से उन पर हमला कर दिया। एक गोली उनके सीने को भेदती हुई निकल गई। खून से लथपथ होने के बावजूद विक्रम बत्तरा ने पहले नवीन को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया फिर अपनी राइफल से पाकिस्तानी सेना के पांच सैनिकों को ढेर कर दिया। इसके बाद भारत माता का यह वीर सपूत धरती मां की गोद में गहरी नींद में सो गया।  

कैप्टन रघुनाथ ने लिया था कैप्टन बत्तरा की शहादत का बदला

इस वाकये को बयां करते हुए कैप्टन रघुनाथ सिंह की आंखें भर आती हैं। रुंधे गले से वह बताते हैं कि वीरता की ऐसी मिसाल कोई दूसरी नहीं मिल सकती। अपने जूनियर साथी को बचाने के लिए कुर्बान हो जाने विरले ही होते हैं। कैप्टन विक्रम बत्तरा उनमें सिरमौर हैं। उन्हें लाखों रुपये के पैकेज की नौकरी मिली थी, जिसे ठोकर मारकर उन्होंने भारतीय सेना को चुना। कैप्टन बत्तरा की शहादत के बाद रघुनाथ सिंह ने कमान संभाली। वह अपने साथियों के साथ रेंगते हुए धीरे धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ते चले गए। इस दौरान उन्होंने पाक सेना के ग्रुप कमांडर इम्तियाज खां समेत 12 पाक सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। चोटी फतेह करने के बाद जवानों ने बर्फीली चोटी पर तिरंगा फहराकर कैप्टन बत्तरा की शहादत का बदला भी ले लिया। इस बहादुरी के लिए रघुनाथ सिंह को तत्कालीन राष्ट्रपति ने वीरचक्र से सम्मानित किया।

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कारगिल युद्ध में 13 जैक राइफल यूनिट को मिले हैं सबसे ज्यादा वीरता पदक

कैप्टन रघुनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय सेना के इतिहास में 13 जैक राइफल इकलौती ऐसी यूनिट है, जिसे कारगिल के एक ही ऑपरेशन में दो परमवीर चक्र, 8 वीर चक्र, 13 सेना मेडल व 30 सीओएस वीरता पदक मिले हैं। 

शौर्य की ऐसी मिसाल कोई दूसरी नहीं: विक्की

शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद महासचिव कुंवर रविंदर विक्की ने बताया कि कारगिल युद्ध भारतीय सेना की अद्भुत शौर्य गाथा को दर्शाता है। जिन कठिन परिस्थितियों में सेना ने यह युद्ध लड़ा, उसकी मिसाल विश्व में अन्य कहीं नहीं मिलती। कैप्टन बत्तरा की शहादत व कैप्टन रघुनाथ सिंह की शूरवीरता से युवा पीढ़ी हमेशा प्रेरणा लेती रहेगी। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले देश के 528 सैनिकों की शहादत का दुख तो है, मगर भारतीय सेना ने इस युद्ध में विजय पताका फहराते हुए पूरे विश्व में अपनी ताकत का लोहा मनवाया। अपने जांबाज सैनिकों पर देश को हमेशा गर्व रहेगा।
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