Sangrur By Election: भगवंत मान ने संभाला प्रचार, लोगों का फीका जोश देख फिर से कॉमेडी का तड़का लगाने को विवश हुए सीएम
सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की यह पहली सियासी अग्नि परीक्षा है। भगवंत मान के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है क्योंकि वे इस सीट से लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके हैं।
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संगरूर लोकसभा सीट पर 23 जून को उपचुनाव होना है। भगवंत मान ने सीएम बनने के बाद इस सीट से इस्तीफा दिया था। पंजाब विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ जीती आम आदमी पार्टी के लिए संगरूर के उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खुद प्रचार का मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी प्रत्याशी गुरमेल सिंह की जीत तय करने में सीएम कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
वहीं सियासी जानकारों का मानना है कि सियासी जमीन को खिसकता देख सीएम फ्रंट फुट पर आ गए हैं। उपचुनाव में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड और बेरोजगारी मुद्दे ने आप की परेशानी काफी बढ़ा दी है। भगवंत मान की चुनावी गतिविधियों में पहले जैसा जादू नहीं दिख रहा है। लोगों के आप के प्रति फीके पड़े जोश को धार देने के लिए सीएम मान फिर से कॉमेडी का तड़का लगाने को विवश हो गए हैं।
कई जगह हुआ विरोध
संसदीय क्षेत्र में कई जगहों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने भी आप की चिंता बढ़ा दी है। संगरूर और सुनाम में बेरोजगार जत्थेबंदियां सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं। मुख्यमंत्री के रोड शो का पहले की तरह जादू दिखाई नहीं दे रहा है। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए मुख्यमंत्री के समागम बेहद सीमित रखे जा रहे हैं ताकि विरोध करने वालों के आने से पहले ही रैली आदि समाप्त हो जाए।
सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की यह पहली सियासी अग्नि परीक्षा है। भगवंत मान के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है क्योंकि वे इस सीट से लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके हैं। इस उपचुनाव को लेकर उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम मान अपने भाषणों में संगरूर संसदीय सीट को आम आदमी पार्टी की सियासी राजधानी बता रहे हैं। उपचुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और सभी दलों के नेताओं ने अपनी सरगर्मियों को गति दे दी है लेकिन मतदाताओं की अजीब खामोशी यहां नए समीकरण बनने के संकेत जरूर दे रही है।