{"_id":"67cbac52547de4be990fe21a","slug":"women-farmer-panchayats-on-khanauri-shambhu-and-ratanpura-border-international-womens-day-2025-03-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: खनौरी, शंभू और रतनपुरा बाॅर्डर पर महिला किसान पंचायतें, हर काम महिला शक्ति के हवाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: खनौरी, शंभू और रतनपुरा बाॅर्डर पर महिला किसान पंचायतें, हर काम महिला शक्ति के हवाले
Sat, 08 Mar 2025 08:02 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 08 Mar 2025 08:02 AM IST
सार
महिला किसान पंचायतों में मंच संचालन से लेकर एमएसपी के गारंटी कानून पर होने वाली विचार चर्चा तक सब कुछ महिलाओं के जिम्मे रहेगा। पूरे दिन का कार्यक्रम नारी शक्ति को समर्पित रहेगा।
विज्ञापन
महिला किसान पंचायत
- फोटो : संवाद/फाइल
विस्तार
खनौरी, शंभू व रतनपुरा बाॅर्डर पर आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिला किसान पंचायतें होंगी। कार्यक्रमों में पंजाब, हरियाणा समेत राजस्थान से महिलाएं शामिल होंगी।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि दिल्ली मोर्चे के वक्त भी महिलाओं ने बड़ा योगदान दिया था। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में मंच संभालने से लेकर अपने घर के पुरुषों की गैरमौजूदगी में खेतों में भी काम किया था। इसलिए नारी शक्ति को सलाम करने के लिए महिला दिवस के मौके पर शनिवार को बॉर्डरों पर महिला किसान पंचायतें करवाई जा रही हैं। बता दें कि आज डल्लेवाल का आमरण अनशन 102वें दिन में दाखिल हो गया।
डल्लेवाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब जंग के मैदान में जूझने की बात आई है, तो माई भागो की ओर से अपने वीरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंग को लड़ा गया। जीवन की कल्पना महिलाओं के बगैर नहीं की जा सकती है। किसी भी बेहतर समाज को सृजित करने के लिए महिलाओं को मान-सत्कार देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाॅर्डरों पर आंदोलन को एक साल का समय हो गया है। अब तक इस आंदोलन में महिलाओं का बड़ा योगदान रहा है। आगे भी इसी तरह से नारी शक्ति का साथ मिलता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि दिल्ली मोर्चे के वक्त भी महिलाओं ने बड़ा योगदान दिया था। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में मंच संभालने से लेकर अपने घर के पुरुषों की गैरमौजूदगी में खेतों में भी काम किया था। इसलिए नारी शक्ति को सलाम करने के लिए महिला दिवस के मौके पर शनिवार को बॉर्डरों पर महिला किसान पंचायतें करवाई जा रही हैं। बता दें कि आज डल्लेवाल का आमरण अनशन 102वें दिन में दाखिल हो गया।
विज्ञापन
डल्लेवाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब जंग के मैदान में जूझने की बात आई है, तो माई भागो की ओर से अपने वीरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंग को लड़ा गया। जीवन की कल्पना महिलाओं के बगैर नहीं की जा सकती है। किसी भी बेहतर समाज को सृजित करने के लिए महिलाओं को मान-सत्कार देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाॅर्डरों पर आंदोलन को एक साल का समय हो गया है। अब तक इस आंदोलन में महिलाओं का बड़ा योगदान रहा है। आगे भी इसी तरह से नारी शक्ति का साथ मिलता रहेगा।
विज्ञापन