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शारदीय नवरात्र 2026: हाथी पर सवार होकर आएंगी मां भगवती, बरसेगी सुख-समृद्धि; अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना

Mon, 28 Sep 2026 01:03 PM IST
Nivedita नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 28 Sep 2026 01:03 PM IST
सार

चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के उत्तरार्ध काल में कलश स्थापना करना शुभ रहेगा। 11 अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। इसी दौरान कलश स्थापना की जा सकती है।

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Sharadiya Navratri 2026 Goddess Bhagwati to arrive riding on elephant Kalash Sthapana Abhijit Muhurat
Navratri - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

शारदीय नवरात्र इस बार 11 अक्तूबर, रविवार से शुरू होंगे। सेक्टर-30 के ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। 

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उन्होंने बताया कि 10 अक्तूबर शनिवार की रात 9:15 बजे अमावस्या समाप्त होगी और रात 9:16 बजे से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। प्रतिपदा 11 अक्तूबर की रात 9:28 बजे तक रहेगी। इसलिए नवरात्र का आरंभ 11 अक्तूबर को होगा।
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पंडित मिश्र ने बताया कि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के उत्तरार्ध काल में कलश स्थापना करना शुभ रहेगा। 11 अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। इसी दौरान कलश स्थापना की जा सकती है। चित्रा नक्षत्र 10 अक्तूबर रात 9:38 बजे से शुरू होकर 11 अक्तूबर रात 10:28 बजे तक रहेगा। वैधृति योग 10 अक्तूबर रात 10 बजे से 11 अक्तूबर रात 9 बजे तक रहेगा।
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कन्या पूजन से जुड़े हैं अलग-अलग फल
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष एवं सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि देवी व्रत में कुमारी पूजन का विशेष महत्व है। सामर्थ्य के अनुसार नवरात्र में प्रतिदिन नौ कुमारियों के चरण धोकर उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजा करने का विधान है।

एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य की प्राप्ति
दो कन्याओं से भोग और मोक्ष।
तीन कन्याओं से धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति।
चार कन्याओं से राज पक्ष से सम्मान।
पांच कन्याओं से विद्या की प्राप्ति।
छह कन्याओं से सभी प्रकार के सुख।
सात कन्याओं से प्रतिष्ठित पद।
आठ कन्याओं से धन-संपदा।
नौ कन्याओं के पूजन से राज्य और प्रभुत्व की प्राप्ति का विधान बताया गया है।

नवरात्र की तिथियां
पहला नवरात्र 11 अक्तूबर
दूसरा नवरात्र 12 अक्तूबर
तीसरा नवरात्र 13 अक्तूबर
चौथा नवरात्र 14 अक्तूबर
पांचवां नवरात्र 15 अक्तूबर
छठा नवरात्र 16 अक्तूबर
सातवां नवरात्र 17 अक्तूबर
आठवां नवरात्र 18 अक्तूबर
नवम नवरात्र 19 अक्तूबर अष्टमी और नवमी
दशमी 20 अक्तूबर नवमी और दशमी

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