फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Punjab cotton belt 71% decline in production many reasons including lack of quality seeds

पंजाब की कॉटन बेल्ट को झटका: कपास उत्पादन में 71 फीसदी की गिरावट, गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी समेत कई कारण

Mon, 10 Mar 2025 02:59 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 10 Mar 2025 02:59 PM IST
सार

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में कपास का उत्पादन और खेती का क्षेत्र लगातार कम हो रहा है। मालवा क्षेत्र, जो कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। किसान अब धान और गेहूं जैसी अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे फसल विविधीकरण के प्रयासों को झटका लगा है। 

विज्ञापन
Punjab cotton belt 71% decline in production many reasons including lack of quality seeds
कपास का उत्पादन - फोटो : Social Media

विस्तार

पंजाब की कपास उत्पादक पट्टी को पिछले पांच वर्षों में कपास उत्पादन में 71 प्रतिशत की भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही, कपास की खेती का क्षेत्र भी घटकर आधा रह गया है। 

विज्ञापन


गुलाबी सुंडी के प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण बीजों और कीटनाशकों की कमी के कारण किसान कपास की खेती से दूर हो रहे हैं। राज्य सरकार ने अब केंद्र से बीजी3 बीज उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि कपास की खेती को पुनर्जीवित किया जा सके।

विज्ञापन

ताजा स्थिति

उत्पादन में गिरावट: 2020-21 में 7.73 लाख गांठों से घटकर 2024-25 में 2.20 लाख गांठों तक।
खेती क्षेत्र में कमी: 2.52 लाख हेक्टेयर से घटकर 1 लाख हेक्टेयर तक।
सरकार की मांग: केंद्र से बीजी3 बीज उपलब्ध कराना।
चिंता: किसानों का धान और गेहूं की ओर रुख करना, जिससे भूजल स्तर पर दबाव बढ़ेगा।
अन्य राज्यों की स्थिति: हरियाणा और राजस्थान में कपास का उत्पादन पंजाब से बेहतर है।

विविधीकरण के प्रयासों को झटका

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में कपास का उत्पादन और खेती का क्षेत्र लगातार कम हो रहा है। मालवा क्षेत्र, जो कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। किसान अब धान और गेहूं जैसी अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे फसल विविधीकरण के प्रयासों को झटका लगा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से बीजी3 किस्म के बीज उपलब्ध कराने का आग्रह किया है, जो गुलाबी सुंडी के प्रकोप को कम करने में मदद कर सकते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, यदि कपास की खेती पर गुलाबी सुंडी का प्रभाव जारी रहता है, तो किसान पूरी तरह से धान की खेती में बदल जाएंगे, जिससे भूजल स्तर पर और अधिक दबाव पड़ेगा।

हरियाणा और राजस्थान आगे

कपास उत्पादन में हरियाणा और राजस्थान पंजाब से आगे हैं। 2024-25 में हरियाणा ने 4.76 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की और 9.75 लाख गांठों का उत्पादन किया, जबकि राजस्थान ने 6.62 लाख हेक्टेयर में खेती की और 19.76 लाख गांठों का उत्पादन किया।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed