{"_id":"6a2a373fbcf44af7eb07ff76","slug":"plea-to-transfer-divorce-case-rejected-high-court-rules-working-wife-claim-unacceptable-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"तलाक का केस स्थानांतरण की मांग खारिज: हाईकोर्ट ने कहा-कामकाजी पत्नी का यात्रा में असमर्थता का दावा अस्वीकार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तलाक का केस स्थानांतरण की मांग खारिज: हाईकोर्ट ने कहा-कामकाजी पत्नी का यात्रा में असमर्थता का दावा अस्वीकार्य
Thu, 11 Jun 2026 09:51 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 11 Jun 2026 09:51 AM IST
सार
मोहाली में काम करने वाली महिला के पति ने पटियाला की फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। महिला ने मामला मोहाली में ट्रांसफर करने की मांग की थी।हाईकोर्ट ने कहा कि तीन घंटे की यात्रा को असाधारण कठिनाई नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वैवाहिक मामलों में अक्सर पत्नी की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मुकदमों का स्थानांतरण किया जाता है लेकिन पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यह कोई स्वचालित अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
अदालत ने पटियाला में लंबित वैवाहिक विवाद को मोहाली स्थानांतरित करने की मांग कर रही एक कामकाजी महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पेशेवर रूप से सक्रिय व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि वह सुनवाई के लिए करीब तीन घंटे की यात्रा करने में असमर्थ है।
विज्ञापन
पटियाला की फैमिली कोर्ट में पति ने तलाक की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले को एसएएस नगर (मोहाली) स्थानांतरित करने की मांग की। उसका तर्क था कि पटियाला स्थित अदालत तक पहुंचने में उसे लंबा सफर तय करना पड़ता है जिससे उसे असुविधा होती है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला पेशेवर रूप से सक्रिय है और नियमित रूप से अपने कार्यों का निर्वहन कर रही है। ऐसे में केवल अदालत में पेशी के लिए यात्रा को असंभव या अत्यधिक कठिन बताना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ट्रांसफर याचिकाओं का उद्देश्य वास्तविक और गंभीर कठिनाइयों का समाधान करना है, न कि केवल सुविधा के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना।
हाईकोर्ट ने कहा कि आधुनिक परिवहन सुविधाओं और बेहतर संपर्क व्यवस्था के दौर में तीन घंटे की यात्रा को असाधारण कठिनाई नहीं माना जा सकता। यदि कोई व्यक्ति अपने पेशेवर दायित्वों के लिए नियमित रूप से आवागमन कर सकता है तो अदालत में पेश होने के लिए यात्रा करना भी उसके लिए असंभव नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि वैवाहिक मामलों में पत्नी की सुविधा एक महत्वपूर्ण पहलू जरूर है लेकिन यह ऐसा असीमित सिद्धांत नहीं है जिसके आधार पर हर मामले में मुकदमे का स्थानांतरण कर दिया जाए। अदालत को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना होता है। यदि रिकॉर्ड पर कोई ठोस और असाधारण कारण नहीं है तो केवल सुविधा के आधार पर ट्रांसफर का आदेश नहीं दिया जा सकता।