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पंजाब में एक जून से धान रोपाई: मान सरकार का फैसला, चिंतित विशेषज्ञ बोले-प्रदेश में भू जल संकट को न्योता

Fri, 18 Apr 2025 03:22 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 18 Apr 2025 03:22 PM IST
सार

कृषि विशेषज्ञों ने मान सरकार के फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि तय सीजन से 20 दिन पहले धान की रोपाई करने से प्रदेश के कई इलाकों में आगे चलकर भूजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।  

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Paddy plantation in Punjab from June 1 experts  worried Bhagwant Mann government decision,
धान की फसल - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब के किसानों की धान की पैदावार सही मूल्यों पर उठाई जा सके, इसके लिए मान सरकार ने इस बार एक जून से धान की रोपाई शुरू करने का फैसला किया है। पंजाब के कृषि वैज्ञानिकों जैसे डॉ. एसएस जोहल और अन्य ने सीएम को पत्र लिखकर धान की जल्द रोपाई के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
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पहले 15 से 20 जून से प्रदेश में धान की रोपाई शुरू होती थी, इस बार सरकार ने एक जून से किसानों को धान की पैदावार के लिए बिजली और नहरी पानी मुहैया कराने का शेड्यूल तक जारी कर दिया है। मान सरकार के इस फैसले का कृषि विशेषज्ञ और राज्य के भू जल स्तर की मॉनिटरिंग करने वाली एजेंसियां आलोचना कर रही हैं। 
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कृषि विशेषज्ञों और इन एजेंसियों का यह तर्क है कि तय सीजन से 20 दिन पहले धान की रोपाई करने से प्रदेश के कई इलाकों में आगे चलकर भूजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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विशेषज्ञों की मानें तो यह कदम गिरते भू जल स्तर की मौजूदा स्थिति को और नीचे धकेल सकता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जनवरी में जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 59.17 प्रतिशत क्षेत्र में जलस्तर 2 मीटर तक घटा है, जबकि 0.08 प्रतिशत क्षेत्र में जलस्तर 2-4 मीटर गिरा है और 1 प्रतिशत क्षेत्र में जलस्तर 4 मीटर से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में धान की फसल पहले शुरू करने का असर सीधे तौर पर भू जल स्तर पर देखने को मिल सकता है।

धान की नमी के संकट से किसानों को उबारने के लिए कदम

एक जून से प्रदेश में शुरू हो रहे धान की रोपाई के सीजन पर मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसानों को केंद्र की नमी वाली शर्त के कारण होने वाले नुकसान से उबारा जा सके। सीएम का यह तर्क है कि 1 जून से प्रदेश के जिन हिस्सों में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी, वह 15 से 20 सितंबर तक अपनी पैदावार तैयार कर लेंगे। 15 से 20 सितंबर के बीच पैदावार तैयार होने से किसानों को नमी के तय मानक के संकट से नहीं जूझना पड़ेगा।


केंद्र ने धान की पैदावार को लेकर 18 प्रतिशत नमी तय की है। अगर धान की पैदावार में 18 प्रतिशत से अधिक नमी पाई जाती है तो किसानों को मंडियों में धक्के खाने पड़ते हैं, यहां तक कि उन्हें तय रकम भी नहीं मिल पाती। सीएम ने कहा कि सितंबर में धान की फसल तैयार होने पर नमी 16 से 18 प्रतिशत के बीच ही रहेगी, क्योंकि इस समय ड्राई मौसम और पश्चिमी हवाओं के चलते नमी बेहद कम होती है, जबकि 15 से 20 जून को शुरू होने वाली धान की रोपाई अक्टूबर में जाकर तैयार होती है, इससे ओस और मौसम परिवर्तन की वजह से नमी बढ़ जाती है, 18 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर एजेंसियां धान उठाने में भी आनाकानी करती हैं।
 
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