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किसान तैयार: बॉर्डर बेल्ट की 45000 एकड़ जमीन पर होनी है धान की रोपाई, सेना-बीएसएफ के निर्देश का इंतजार

Tue, 13 May 2025 03:49 PM IST
निवेदिता वर्मा हरीश शर्मा, अमर उजाला, अमृतसर
हरीश शर्मा, अमर उजाला, अमृतसर Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 13 May 2025 03:49 PM IST
सार

अभी बाॅर्डर बेल्ट में किसी भी तरह की किसानी गतिविधि बंद है। बॉर्डर बेल्ट के हजारों किसानों ने अपनी तरफ से तैयारी पूरी कर ली है। उन्हें बस सेना व बीएसएफ के आदेशों का इंतजार है। अभी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

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Paddy is to be planted on 45000 acres of land in Punjab border belt waiting for instructions from Army and BSF
धान की फसल - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब के बॉर्डर पर ड्रोन हमलों के धमाकों की गूंज थम गई है। गांव छोड़ कर गए गए लोग लौटने लगे हैं, लेकिन उन्हें अब भी एक चिंता सता रही है कि वे करीब 45000 एकड़ जमीन पर धान की रोपाई कर पाएंगे या नहीं। 

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अभी सारी बेल्ट में किसी भी तरह की किसानी गतिविधि बंद है। बॉर्डर बेल्ट के हजारों किसानों ने अपनी तरफ से तैयारी पूरी कर ली है। उन्हें बस सेना व बीएसएफ के आदेशों का इंतजार है। अभी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

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जून में होती है धान की रोपाई

संघर्षविराम के बाद बॉर्डर एरिया में हालात बदलने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि अप्रैल में गेहूं की कटाई के बाद जून-जुलाई में धान की रोपाई होती है। वहीं, बहुत से किसान सब्जियां भी उगाते हैं। पंजाब की 553 किलोमीटर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। अब उम्मीद है कि दो-चार दिनों में किसानों को उनकी जमीन में जाने की छूट दे दी जाएगी। 

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गांव थोबा के रहने वाले सुरजीत सिंह का कहना है कि संघर्ष  विराम होने से वह अब अपनी जमीन पर खेती कर पाएंगे। आने वाले दिनों में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, पाकिस्तान को सबक सिखाना भी बहुत जरूरी था। इसी गांव के बलबीर सिंह का कहना है कि यह वक्त धान की पनीरी तैयार करने का है। मगर तनाव के चलते हम जमीन में नहीं जा पा रहे थे। अब उम्मीद है कि जल्द काम शुरू होगा। धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है। इससे सभी किसान काफी खुश हैं।

किसान सुरिंदर सिंह कहते हैं कि सीमा के आस-पास के गांवों के लोगों का मनोबल बढ़ रहा है। गेहूं की फसल कट चुकी है। नई फसल की तैयारी चल रही थी, लेकिन पाकिस्तान के हमलों के कारण सारा काम ठप पड़ गया था। मगर अब किसानों को उम्मीद जग गई है कि तनाव कम हो गया और धीरे-धीरे किसानों को कामकाज की छूट मिल सकेगी। आने वाले दिनों में वह अपनी जमीनों पर आसानी से खेती कर पाएंगे। हालांकि, अभी कुछ दिनों तक सेना और बीएसएफ ने जमीन पर खेती करने से मना किया है। किसान बिट्टू थोबा और जगजीत का भी कहना है कि तनाव कम होने के चलते किसान सब्जियां बीज पाएंगे। इससे आने वाले दिनों में लोगों को सब्जियों के दाम में होने वाली बढ़ोतरी से राहत मिलेगी।

अभी नहीं मिले सेना से निर्देश

अमृतसर के डीसी साक्षी साहनी का कहना है कि अभी तक बीएसएफ या सेना की तरफ से कोई निर्देश नहीं मिले हैं, जैसे ही निर्देश मिलेंगे, किसानों को खेतों में काम करने की अनुमति दे दी जाएगी।  

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