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लैंड पूलिंग स्कीम का विरोध: किसानों ने निकाला ट्रैक्टर मार्च, संयुक्त किसान मोर्चा के तले आवाज की बुलंद
Wed, 30 Jul 2025 05:15 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 30 Jul 2025 05:15 PM IST
सार
जगरांव में भाकियू एकता डकोंदा ने जगरांव ब्लॉक के लगभग 18 गांवों के किसानों से संपर्क कर इस मार्च की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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अमृतसर में किसानों का ट्रैक्टर मार्च
- फोटो : संवाद
विस्तार
पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ राजनीतिक दल इसके खिलाफ लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं किसान संगठन भी एकजुट हो गए हैं। सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी के विरोध में बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर पंजाब में अलग-अलग शहरों में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला।
ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए किसानों ने इस सरकार की लैंड पूलिंग नीति को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। एसकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि राज्य सरकार इस नीति के जरिये किसानों की उपजाऊ जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। यह पूरी तरह से किसान विरोधी है।
लुधियाना के समराला, जोधान, कूमकलां, जगरांव और डाखा में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने भी एसकेएम के आह्वान को समर्थन देते हुए अमृतसर, जालंधर, मानसा, बठिंडा और संगरूर सहित कई जिलों में ट्रैक्टर मार्च निकाला।
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केएमएम नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि राज्य सरकार को किसानों की बढ़ती नाराजगी के चलते यह नीति तुरंत वापस लेनी चाहिए।
हम ट्रैक्टर मार्च के जरिये स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि हम अपनी जमीन नहीं देंगे। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मजदूरों, युवाओं और महिलाओं की भी ऐतिहासिक भागीदारी रही। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और अब किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे।
आप सरकार की इस लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर विपक्षी दल और किसान संगठन इसकी तीखी आलोचना कर रहे हैं। इस नीति को किसानों की जमीन छीनने की लूट योजना बताया है।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए नीति को किसान हितैषी बता रही है। पंजाब कैबिनेट ने पिछले महीने लैंड पूलिंग नीति को मंजूरी दी थी और यह स्पष्ट किया था कि किसी भी जमीन मालिक से एक इंच जमीन भी जबरन नहीं ली जाएगी।सरकार के अनुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले मालिक को बदले में 1,000 वर्ग गज का विकसित रिहायशी प्लॉट और 200 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट दिया जाएगा।सरकार का दावा है कि यह नीति राज्य में पारदर्शी और योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है।
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ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए किसानों ने इस सरकार की लैंड पूलिंग नीति को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। एसकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि राज्य सरकार इस नीति के जरिये किसानों की उपजाऊ जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। यह पूरी तरह से किसान विरोधी है।
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लुधियाना के समराला, जोधान, कूमकलां, जगरांव और डाखा में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने भी एसकेएम के आह्वान को समर्थन देते हुए अमृतसर, जालंधर, मानसा, बठिंडा और संगरूर सहित कई जिलों में ट्रैक्टर मार्च निकाला।
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केएमएम नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि राज्य सरकार को किसानों की बढ़ती नाराजगी के चलते यह नीति तुरंत वापस लेनी चाहिए।
हम ट्रैक्टर मार्च के जरिये स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि हम अपनी जमीन नहीं देंगे। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मजदूरों, युवाओं और महिलाओं की भी ऐतिहासिक भागीदारी रही। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और अब किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे।
आप सरकार की इस लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर विपक्षी दल और किसान संगठन इसकी तीखी आलोचना कर रहे हैं। इस नीति को किसानों की जमीन छीनने की लूट योजना बताया है।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए नीति को किसान हितैषी बता रही है। पंजाब कैबिनेट ने पिछले महीने लैंड पूलिंग नीति को मंजूरी दी थी और यह स्पष्ट किया था कि किसी भी जमीन मालिक से एक इंच जमीन भी जबरन नहीं ली जाएगी।सरकार के अनुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले मालिक को बदले में 1,000 वर्ग गज का विकसित रिहायशी प्लॉट और 200 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट दिया जाएगा।सरकार का दावा है कि यह नीति राज्य में पारदर्शी और योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है।