छा गए गुरु: नवजोत सिद्धू ने पांच महीने में घटाया 33 किलो वजन, बोले- असंभव कुछ भी नहीं, काम आएंगे उनके टिप्स
नवजोत सिंह सिद्धू ने पांच महीने में अपना 33 किलो वेट कम किया है। सिद्धू ने सोशल मीडिया पर अपनी दो तस्वीरें शेयरकी हैं। तस्वीर के नीचे कैप्शन में लिखा कि आहार, प्राणायाम और लंबी सैर ने उन्हें इस फिटनेस लक्ष्य को हासिल करने में मदद की है।
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विस्तार
पूर्व भारतीय क्रिकेटर व पंजाब कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू भले ही राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वह खूब एक्टिव रहते हैं। बड़ी बात यह है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना 33 किलो वजह कम किया है। वो भी महज पांच महीनों में। सिद्धू ने सोशल मीडिया पर इसका खुलासा भी किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिद्धू ने अपने दो फोटो शेयर किए हैं, जिसमें एक पुराना फोटो है और लेटेस्ट फोटो का भी कोलाज बनाया है। दोनों फोटो में दिन रात का अंतर है। नवजोत सिंह सिद्धू ने दावा किया है कि उन्होंने मात्र पांच महीने में अपना 33 किलोग्राम वजन कम किया है।
इसके साथ ही सिद्धू ने एक मैसेज भी लिखा है। उन्होंने लिखा कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सही जीवनशैली अपनाने से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सिद्धू ने बताया कि उन्होंने अगस्त 2023 से वजन को कम करना शुरू किया था। हालांकि यह परिवर्तन की दूसरों के लिए प्रेरणादायक है।
कैसे हुआ यह बदलाव
सिद्धू ने बताया कि वजन कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका इच्छाशक्ति, अनुशासन और सही प्रक्रिया की है। वजन घटाने के लिए सख्त डाइट, प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), वेट ट्रेनिंग और नियमित वॉक को अपनाया। इस पूरे प्रकरण के दौरान फिटनेस पर लगातार ध्यान दिया और धीरे-धीरे शरीर में सकारात्मक बदलाव आने लगे।
असंभव कुछ भी नहीं
सिद्धू की इस सफलता के बाद संदेश स्पष्ट है असंभव कुछ भी नहीं। जब तक कोई अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह समर्पित रहता है और सही दिशा में प्रयास करता है, तब तक कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
सिद्धू की पत्नी ने जीती कैंसर से जंग
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने कैंसर हाल ही में कैंसर से भी जंग जीती थी। नवजोत कौर को ब्रेस्ट कैंसर से जंग जीतने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने मीडिया के सामने पत्नी की इस खतरनाक बीमारी पार पाने के सफर के बारे में भी बताया था। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने व उनके परिवार ने अमृतसर नहीं छोड़ा है। वह अमृतसर निवासियों की सेवा करते रहेंगे। अमृतसर की धरती उनकी कर्मभूमि है।