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HC: पंजाब के लाखों कर्मचारियों के हक में फैसला, 15 दिन में खाते में आएगी बड़ी धनराशि; मान सरकार को फटकार

Mon, 03 Aug 2026 04:20 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Mon, 03 Aug 2026 04:20 PM IST
सार

पंजाब में करीब साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारी इस मामले से सीधे जुड़े हैं। हाईकोर्ट के फैसले से सरकार पर डीए और उसके बकाये के भुगतान का दबाव बढ़ गया है।

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Major relief for High Court employees and pensioners in Punjab
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महंगाई भत्ता (डीए) बकाया मामले में पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर अपील सोमवार को खारिज कर दी। खंडपीठ ने सरकार को 15 दिन के भीतर कर्मचारियों और पेंशनधारियों का डीए बकाया चुकाने का निर्देश दिया है। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर सरकार को 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि डीए का बकाया चुकाए बिना सरकार बड़े स्तर पर विज्ञापन और प्रचार अभियान नहीं चला सकेगी

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों और पेंशनधारियों का अर्जित सेवा लाभ है। केवल वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देकर इसका भुगतान नहीं रोका जा सकता। सरकार की वित्तीय प्राथमिकताएं कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकतीं।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भुगतान में असमर्थता जताते हुए वित्तीय तंगी का तर्क रखा, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनधारियों का वैध बकाया चुकाए बिना सरकारी धन को बड़े पैमाने पर विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर खर्च करना उचित नहीं है। इसलिए बकाया भुगतान होने तक सरकार बड़े प्रचार अभियानों पर खर्च नहीं कर सकेगी।

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साढ़े सात लाख परिवारों पर पड़ेगा असर
पंजाब में करीब साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारी इस मामले से सीधे जुड़े हैं। हाईकोर्ट के फैसले से सरकार पर डीए और उसके बकाये के भुगतान का दबाव बढ़ गया है। भुगतान होने पर लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और घरेलू खर्च पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। इसलिए यह फैसला राज्य के सबसे बड़े कर्मचारी वर्ग से जुड़े अहम मामलों में माना जा रहा है।

कर्मचारियों के अधिकारों को दी प्राथमिकता

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों और पेंशनधारियों का अर्जित सेवा लाभ है। वित्तीय तंगी का हवाला देकर इसका भुगतान नहीं रोका जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों का वैध बकाया चुकाए बिना सरकारी धन को बड़े स्तर पर विज्ञापन और प्रचार पर खर्च करना उचित नहीं है। सरकार को पहले अपने वैधानिक दायित्व पूरे करने होंगे।

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