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Highcourt: 31 साल पुराने अवैध गिरफ्तारी-हत्या के मामले में CBI को नोटिस, पूर्व पुलिस अधिकारियों ने की थी मांग
Sun, 13 Jul 2025 02:05 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 13 Jul 2025 02:05 PM IST
सार
यह मामला बलविंदर सिंह और अन्य की कथित अवैध गिरफ्तारी, गलत हिरासत और हत्या से जुड़ा है। यह याचिका उन सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने दाखिल की है जो इस मामले में आरोपी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें फंसाया गया है और मौजूदा ट्रायल कोर्ट में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं मिल रहा।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
31 साल पुराने अवैध गिरफ्तारी, अवैध हिरासत और हत्या के मामले का ट्रायल मोहाली सीबीआई अदालत से किसी अन्य अदालत में भेजने की पूर्व पुलिस अधिकारियों की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है।
यह मामला बलविंदर सिंह और अन्य की कथित अवैध गिरफ्तारी, गलत हिरासत और हत्या से जुड़ा है। यह याचिका उन सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने दाखिल की है जो इस मामले में आरोपी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें फंसाया गया है और मौजूदा ट्रायल कोर्ट में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि अदालत उनके वकीलों को जांच अधिकारी समेत अभियोजन पक्ष के गवाहों से प्रभावी ढंग से जिरह करने की अनुमति नहीं दे रही है, जिससे उनका पक्ष कमजोर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने 6 जून को मोहाली के सेशन्स जज की ओर से ट्रायल ट्रांसफर की याचिका को खारिज करने के आदेश को भी चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश तथ्यों और परिस्थितियों की समुचित जांच किए बिना यांत्रिक ढंग से पारित किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि एफआईआर 12 सितंबर 1994 को दर्ज की गई थी और चालान 31 मई 1996 को दाखिल किया गया था। इसके बावजूद अब तक अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं और फिलहाल जांच अधिकारी की आगे की जिरह सूचीबद्ध है।
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याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि मौजूदा ट्रायल कोर्ट में उनके मुवक्किलों के खिलाफ पूर्वाग्रह है और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त तय की है। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक आकाशदीप सिंह ने नोटिस स्वीकार कर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
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यह मामला बलविंदर सिंह और अन्य की कथित अवैध गिरफ्तारी, गलत हिरासत और हत्या से जुड़ा है। यह याचिका उन सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने दाखिल की है जो इस मामले में आरोपी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें फंसाया गया है और मौजूदा ट्रायल कोर्ट में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि अदालत उनके वकीलों को जांच अधिकारी समेत अभियोजन पक्ष के गवाहों से प्रभावी ढंग से जिरह करने की अनुमति नहीं दे रही है, जिससे उनका पक्ष कमजोर पड़ रहा है।
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याचिकाकर्ताओं ने 6 जून को मोहाली के सेशन्स जज की ओर से ट्रायल ट्रांसफर की याचिका को खारिज करने के आदेश को भी चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश तथ्यों और परिस्थितियों की समुचित जांच किए बिना यांत्रिक ढंग से पारित किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि एफआईआर 12 सितंबर 1994 को दर्ज की गई थी और चालान 31 मई 1996 को दाखिल किया गया था। इसके बावजूद अब तक अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं और फिलहाल जांच अधिकारी की आगे की जिरह सूचीबद्ध है।
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याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि मौजूदा ट्रायल कोर्ट में उनके मुवक्किलों के खिलाफ पूर्वाग्रह है और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त तय की है। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक आकाशदीप सिंह ने नोटिस स्वीकार कर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।