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हाईकोर्ट का फैसला: पत्नी का कमाने में सक्षम होना भरण-पोषण से वंचित करने का आधार नहीं, देना होगा गुजारा भत्ता

Wed, 02 Jul 2025 04:19 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 02 Jul 2025 04:19 PM IST
सार

दंपती ने 2018 में शादी की थी और 2019 में एक लड़की का जन्म हुआ, जो पत्नी के पास थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि अंतरिम भरण-पोषण पर विचार के समय उनकी आय 34,033 रुपये प्रति माह थी। हालांकि बहुत से खर्च होते हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता को अन्य व्यय भी करने हैं, महत्वपूर्ण नहीं है।

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High Court decision Wife ability to earn not basis for depriving of maintenance alimony have to paid
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी को केवल इसलिए भरण-पोषण राशि से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह स्नातक है और कमाने में सक्षम है। खासकर तब जब वह कोई लाभकारी नौकरी नहीं करती है।
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जस्टिस जेएस पुरी ने कहा कि भरण-पोषण का अधिकार वैधानिक प्रावधान के माध्यम से प्रदान किया गया है। जब पत्नी की आय पति की तुलना में बहुत अधिक है और यह पाया जा सकता है कि वह अपना भरण-पोषण स्वयं करने में सक्षम है, तो उस स्थिति में वह भरण-पोषण के लिए पात्र नहीं हो सकती है। वह एक 6 वर्षीय नाबालिग बच्ची की देखभाल और संरक्षण भी कर रही है, जिसके लिए उसे केवल 25,000 रुपये की राशि की आवश्यकता है।
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ये टिप्पणियां एक पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं, जिसने पारिवारिक न्यायालय, लुधियाना द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। इसके तहत प्रतिवादियों यानी पत्नी और नाबालिग बेटी द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ भरण-पोषण के लिए धारा 125 सीआरपीसी के तहत दायर याचिका को स्वीकार कर लिया गया था और कुल भरण-पोषण राशि 14,000 रुपये प्रतिमाह (नाबालिग बेटी के लिए 5000 रुपये और पत्नी के लिए 9000 रुपये) तय की गई थी।
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दंपती ने 2018 में शादी की थी और 2019 में विवाहेतर संबंध से एक लड़की का जन्म हुआ, जो पत्नी के पास थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि अंतरिम भरण-पोषण पर विचार के समय उनकी आय 34,033 रुपये प्रति माह थी। हालांकि बहुत से खर्च होते हैं। उनके पास अन्य दायित्व भी हैं, खासकर अपने बुजुर्ग दादा-दादी की देखभाल व कई अन्य व्यय और इसलिए, वह भरण-पोषण के रूप में 14,000 रुपये प्रति माह की राशि का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं।


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता को अन्य व्यय भी करने हैं, महत्वपूर्ण नहीं है। न्यायाधीश ने इस आधार पर भरण-पोषण आदेश को रद्द करने पर विचार करने से भी इन्कार कर दिया कि पत्नी काम करने और कमाने में सक्षम है क्योंकि वह एक शिक्षित महिला है और उसके पास बीए पीजीडीसीए की योग्यता है।
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