बेअदबी कानून: राज्यपाल की मुहर के बाद पंजाब में लागू हो जाएगा कानून, राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं
पंजाब सरकार सूबे में बेअदबी कानून लागू कर रही है। इस बिल को परीक्षण के लिए सिलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया। 15 सदस्यीय यह कमेटी इस संदर्भ में आने वाले विभिन्न पक्षों के सुझाव, पेचीदगियों व पहलुओं की समीक्षा कर छह महीने के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट देगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
धार्मिक बेअदबी के खिलाफ आप सरकार की ओर से लाए जा रहे ‘पंजाब पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम अधिनियम (एस) -2025’ बिल को लागू करवाने के लिए सूबे की सरकार बहुत सधे ढंग से आगे बढ़ रही है। इस बिल को परीक्षण के लिए सिलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया। 15 सदस्यीय यह कमेटी इस संदर्भ में आने वाले विभिन्न पक्षों के सुझाव, पेचीदगियों व पहलुओं की समीक्षा कर छह महीने के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट देगी। यह एक्ट केवल श्री गुरुग्रंथ साहिब तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अन्य धर्मों व पंथों के ग्रंथों, संतों व देवी-देवताओं के बेअदबी से जुड़े मामलों को भी शामिल किए जाने की कवायद चल रही है। सिलेक्ट कमेटी के पास इस तरह के कई सुझाव पहुंच रहे हैं जबकि सदस्यगण भी विभिन्न धर्मवेत्ताओं से संपर्क कर रहे हैं।
चूंकि सरकार ने इस बिल का मसौदा एक स्टेट एक्ट के रूप में तैयार किया है, इसलिए इसे लागू होने में अड़चनें कम रह सकती हैं। विधानसभा में भी आप सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। लिहाजा विधानसभा में यह बिल आसानी से पास हो जाएगा। कानूनविद कहते हैं कि इस बिल को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास नहीं भेजना पड़ेगा। विधानसभा में पास होने के बाद यह बिल राज्यपाल के पास भेजा जाएगा और उनकी मुहर लगते ही इसे राज्य में लागू करवा दिया जाएगा। साल 2016 में बादल सरकार और साल 2018 में कैप्टन सरकार भी इससे जुड़ा एक बिल लाई थी, क्योंकि ये संशोधन बिल थे, इसलिए इन्हें मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था मगर कानूनी अड़चनों के कारण यह सिरे नहीं चढ़ पाए।
विपक्षी दल भी नहीं कर सकेंगे विरोध
यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए विरोधी दल भी इस बिल का विधानसभा में सीधा विरोध करने से बचेंगे। दूसरी ओर, इसे वोट बैंक की राजनीति बताते हुए इस एक्ट को इतनी जल्दबाजी में लाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे पंजाब के लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला भी बताया जा रहा है और यह बात भी उठ रही है कि इस एक्ट का दुरुपयोग भी हो सकता है जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पंजाब में बढ़ रही धार्मिक बेअदबी के मद्देनजर ऐसा करने वालों के दिलों में डर पैदा करने के लिए एक सख्त बिल की बहुत जरूरत है।
स्पेशल बिल है, हो जाएगा लागू
विधायी खंड को तीन भागों में बांटा गया है। संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। चूंकि यह पंजाब सरकार का एक स्पेशल एक्ट है, जो पूरी तरह राज्य सूची के दायरे में आता है। पंजाब में धार्मिक बेअदबियों की बढ़ती घटनाओं के मामलों लॉ एंड आर्डर मेनटेन रखने के लिए आज ऐसे एक्ट की बहुत जरूरत है। बादल और कैप्टन सरकार के समय में जो बिल लाया गया था, वे एक संशोधन बिल था। इससे आईपीसी की धारा 295 ए में संशोधन करना पड़ता। हालांकि इस धारा के अंतर्गत किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर सजा का प्रावधान है मगर यह जमानती धारा है और इसमें सजा का प्रावधान भी तीन साल तक है। इसलिए बेअदबियां करने वालों के दिलों में कोई खौफ नहीं रहता। अन्य राज्यों में भी सरकारों ने इस तरह के आर्गेनाइज क्राइम के विरुद्ध अलग-अलग नाम से कानून बनाए हुए हैं। इसी कड़ी में पंजाब सरकार यह विशेष कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्पेशल स्टेट एक्ट होने की वजह से इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं है। पंजाब के राज्यपाल से ही स्वीकृत्ति के बाद इसे लागू किया जा सकता है। राज्यपाल चाहें तो इसमें गाइडेंस मांग सकते हैं। - केएस बोपाराय, सीनियर एडवोकेट, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट