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चंडीगढ़: ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ा आपदाओं का खतरा, हम वहां पहुंच रहे जहां पहले नहीं थी मानवीय हलचल: डॉ. रविंद्र
Sat, 29 Aug 2026 04:13 PM IST
शाहिल शर्मा
एएनआई, चंडीगढ़
एएनआई, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 29 Aug 2026 04:13 PM IST
सार
हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन है लगातार बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग से यह खतरा बढ़ गया है।
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डॉ. रविंद्र खैवाल
- फोटो : ANI
विस्तार
हाल की बाढ़ स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग के डॉ. रविंद्र खैवाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन है। उन्होंने बताया यदि हम हिमालय क्षेत्र को देखें तो यह प्राकृतिक आपदाओं के मामले में बहुत संवेदनशील क्षेत्र है।
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#WATCH | Chandigarh: On the recent flood situation, Department of Community Medicine and School of Public Health Dr Ravindra Khaiwal says, "... If we look at the Himalayan region, it is a very sensitive zone in terms of natural disasters. The Eurasian and Indian plates are… pic.twitter.com/dALdqPDiLf
— ANI (@ANI) August 29, 2026
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यूरेशियन और भारतीय प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा रही हैं, जिससे यह क्षेत्र अत्यधिक अस्थिर हो गया है। इससे भूकंप, भूस्खलन तथा हिमस्खलन जैसी आपदाओं के प्रति प्रवण है। मुख्य कारण भूगर्भीय अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है, जिससे हिमालय क्षेत्र में हजारों वर्षों से जमी बर्फ पिघल रही है। ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं और मिट्टी ढीली पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ये कारक क्षेत्र में बाढ़ और अन्य आपदाओं के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
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वहीं, हम अब उन क्षेत्रों में सड़कें और डैम बना रहे हैं जहां पहले कोई जाता तक नहीं था जिसका असर भी हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है।