चंडीगढ़ निगम में वित्तीय संकट: विकास की रफ्तार अभी थमी रहेगी, जुलाई तक आएगा 250 करोड़ रुपये का बजट
बजट न होने की वजह से माैजूदा समय शहर में 100 से ज्यादा छोटे- बड़े काम रूके हैं। यहां तक की करीब 35 करोड़ रुपये का भुगतान न होने की वजह से सिविल सेक्टर के ठेकेदारों ने काम भी बंद कर दिया है।
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चंडीगढ़ में विकास की रफ्तार अभी थमी रहेगी। वित्तीय संकट झेल रहे नगर निगम को अभी केंद्र से बजट मिलने में करीब दो महीने का समय लग सकता है।
नगर निगम की तरफ से खुद मेयर हरप्रीत काैर बबला ने केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये का बजट मांगा था। इसके लिए वह गृहमंत्री अमित शाह से भी मिली थीं। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बजट जुलाई से पहले नहीं मिलेगा। हालांकि उस दाैरान 200 की जगह करीब 250 करोड़ रुपये का पैकेज मिल सकता है।
बजट न होने की वजह से माैजूदा समय शहर में 100 से ज्यादा छोटे- बड़े काम रूके हैं। यहां तक की करीब 35 करोड़ रुपये का भुगतान न होने की वजह से सिविल सेक्टर के ठेकेदारों ने काम भी बंद कर दिया है। ठेकेदारों ने भुगतान को लेकर काफी लंबे समय तक आंदोलन भी चलाया था। लेकिन उनका पैसा नहीं आया। अब उन लोगों ने काम बंद कर रखा है।
मेयर हरप्रीत काैर बबला ने बताया कि बजट के लिए लगातार बात हो रही है। अभी केंद्र सरकार में गृह मंत्रालय के साथ मीटिंग भी है। उम्मीद है कि पैसा जल्द मिल जाएगा।
हर महीने न्यूनतम 70 करोड़ का खर्च
निगम की हर महीने कमिटिड लायबिलिटी (प्रतिबद्ध देनदारियां) करीब 70 करोड़ रुपये की है। इसमें कर्मचारियों को वेतन, वेजेस, पेंशन व अन्य अनिवार्य बिलों का भुगतान आता है। वार्डों के विकास कार्यों पर किए जाने वाला खर्च अलग है। निगम की स्थिति इन दिनों ऐसी है कि उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली कई सड़कों की हालत खस्ता है, लेकिन पैसों की कमी की वजह से उन्हें बनवा नहीं पा रहा है।
निगम शहर की 2000 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग क्षेत्रों का रखरखाव करता है। इनमें से 270 किलोमीटर सड़कों और पार्किंग स्थलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। इसके लिए करीब 54 करोड़ रुपये चाहिए।