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किसान आंदोलन से हिल रहा था कारोबार: 13 माह में 10 हजार करोड़ का नुकसान, दो लाख करोड़ का निवेश रुका
Fri, 21 Mar 2025 09:05 AM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 21 Mar 2025 09:05 AM IST
सार
पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव सुनील मेहरा ने कहा कि बंद बाॅर्डर ने सूबे की तरक्की को ही बंद कर दिया था। पंजाब को दो लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है, क्योंकि निवेश रुक गया है। कई इकाइयों ने विस्तार के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर लिया।
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किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद
विस्तार
शंभू व खनौरी बॉर्डर बंद होने से अब तक पंजाब के उद्योगपतियों व व्यापारियों को 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। साथ ही दो लाख करोड़ का निवेश भी रुका है। यह एक बड़ा कारण है कि पंजाब सरकार ने दोनों बॉर्डर खुलवाने के लिए बड़े एक्शन का फैसला लिया।
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आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से बैठक के दौरान भी उद्योगपतियों ने यही मामला उठाया था। लुधियाना, जालंधर व अमृतसर के कारोबार पर सर्वाधिक असर पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकारों को किसानों से बातचीत करने और उन्हें राजमार्ग से हटाने के लिए राजी करने का आदेश दिया था।
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लुधियाना उपचुनाव के कारण भी पड़ा असर
वहीं, लुधियाना पश्चिम सीट पर उपचुनाव भी होना है। इससे सरकार पर दवाब बढ़ रहा था। शंभू व खनौरी बॉर्डर के नजदीकी एरिया में भी कारोबार पूरी तरह ठप था। कई औद्योगिक इकाइयों पर ताला तक लग गया था।यह भी पढ़ें: शंभू से ग्राउंड रिपोर्ट: जहां ढाई किमी तक बसी थी टेंट सिटी, अब वहां मलबे के ढेर; पसरा है सन्नाटा
माल मंगवाने या बाहर भेजने के लिए लंबी दूरी व कच्चों रास्तों का सहारा लेना पड़ा रहा था। 40 से 50 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी पड़ रही थी। इस कारण ट्रांसपोर्टरों ने भी अपना किराया बढ़ा दिया था। इसी तरह बॉर्डर बंद होने से पंजाब की लिंक सड़कें भी टूट गई थीं।
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रोजाना 27 करोड़ का नुकसान
ऑल इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम के प्रधान बदीश जिंदल ने बताया कि बॉर्डर बंद होने से रोजाना उद्योगपतियों को रोजाना 27 करोड़ रुपये का नुक्सान हो रहा था। हर महीने प्रदेश के उद्योपतियों व व्यापारियों को 800 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा था। बड़ी कंपनियों ने भी प्रदेश से किनारा करना शुरू कर दिया था, जिस कारण पिछले एक साल से ट्रेड ने सबसे अधिक मार झेली है।कोरोना के बाद उन पर बॉर्डर बंद होने से उनका सभी अधिक नुकसान हुआ है, इसलिए हाईवे खुलने का वे स्वागत करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर पंजाब बंद से भी सरकार को हर बार 90 करोड़ रुपये के राजस्व से धोना पड़ रहा था। सरकार को 60 करोड़ रुपये जीएसटी, 20 करोड़ रुपये डीजल व वैट और 10 करोड़ अन्य टैक्स छोटे-मोटे टैक्स से कमाई होती है।