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पानी में घातक धातु फसलों पर डाल रहे प्रभाव: पंजाब के 16 जिलों में फसलों के लिए जाएंगे सैंपल

Mon, 03 Feb 2025 03:05 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 03 Feb 2025 03:05 PM IST
सार

सरकार की तरफ से 337 लोकेशनों से दूषित पानी का पता लगाने के लिए सैंपल लिए गए थे, जिसें 34 लोकेशनों का पानी दूषित पाया गया था। इन लोकेशनों के जल स्रोतों को सील कर दिया गया है, जिसमें ट्यूबवेल समेत अन्य जल स्रोत शामिल हैं।

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Deadly metals in water are affecting crops in Punjab samples will be taken in 16 districts
भूजल - फोटो : iStock

विस्तार

पंजाब के पानी में मौजूद घातक धातु लोगों की सेहत के साथ ही फसलों पर भी प्रभाव डाल रहे हैं, जिसके चलते राज्य सरकार 16 जिलों में फसलों के सैंपल लेने जा रही है। 
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कृषि खाद्य उत्पादों में यूरेनियम समेत अन्य भारी धातुओं का पता लगाने के लिए इन सैंपलों की जांच की जाएगी और इसके आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट तैयारी होगी।

रिपोर्ट के नतीजे सामने आने के बाद ही सरकार दूषित पानी के खतरे को कम करने के लिए उचित कदम उठाएगी। प्रदेश के 34 लोकेशनों पर जल स्रोत को सील कर दिया गया है, क्योंकि जांच में इनका पानी दूषित पाया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में प्रदेश सरकार की तरफ से इस संबंध में जानकारी दी गई है।
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पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर मोहाली करेगी स्टडी

जानकारी के अनुसार पंजाब में उगाई जाने वाली फसलों में भारी धातुओं की जांच के लिए यह स्टडी की जा रही है, जिसका काम पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर (पीबीटीआई) मोहाली का सौंपा गया है। इसके तहत 16 जिलों में कृषि खाद्य उत्पाद दालें, अनाज, फल, सब्जियां और दूध के 1700 सैंपल लिए जाएंगे, जिसमें यूरेनियम समेत 10 भारी धातुओं की जांच की जाएगी।

इसी तरह उन स्थानों से मिट्टी के 600 सैंपलों की जांच भी की जाएगी, जहां से कृषि खाद्य उत्पादों के सैंपल लिए जाने हैं। इसी तरह इन फसलों की सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले नहरी व ट्यूबवेलों के पानी के सैंपल भी लिए जाएंगे। स्टडी का उद्देश्य कृषि खाद्य उत्पादों, मिट्टी और सिंचाई जल के विश्लेषण के माध्यम से फूड चेन में मौजूद भारी धातुओं का आकलन करना है। जिन जिलों की 34 लोकेशनों से ये सैंपल लिए जाने हैं उनमें अमृतसर, तरनतारन, पटियाला, संगरूर, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, लुधियाना, फरीदकोट, जालंधर, कपूरथला, मोगा, बरनाला, नवांशहर, मोहाली और बठिंडा शामिल हैं। यह स्टडी एजेंसी डेढ़ साल के अंदर पूरी करेगी।

दूषित जल की लोकेशनों को सील करने के बाद की यह कार्रवाई 

हाल ही में सरकार की तरफ से 337 लोकेशनों से दूषित पानी का पता लगाने के लिए सैंपल लिए गए थे, जिसें 34 लोकेशनों का पानी दूषित पाया गया था। इन लोकेशनों के जल स्रोतों को सील कर दिया गया है, जिसमें ट्यूबवेल समेत अन्य जल स्रोत शामिल हैं। इनमें 18 लोकेशन जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग और 16 लोकेशन स्थानीय निकाय विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। इन सभी जगहों पर दोनों विभागों की तरफ से पीने योग्य पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। फतेहगढ़ साहिब की चुन्नी कलां और भुगराना को सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के साथ कवर किया गया है।

पानी के लिए की जा रही वैकल्पिक व्यवस्था

स्थानीय विभाग के अंदर आती अन्य निकटतम म्युनिसिपल जल स्रोतों के माध्यम से 16 सील स्थानों पर पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पास के म्युनिसिपल स्रोत से पानी के सैंपल एकत्र किए गए और भारी धातुओं की पहचान के लिए 24 मापदंडों के लिए उनका विश्लेषण किया गया। इन 16 में से 10 लोकेशनों पर नतीजे स्वीकार्य सीमा के भीतर पाए गए। बाकी छह लोकेशन पर भिखीविंड, जगरांव, निहाल सिंह वाला, राहों, कोठा गुरु और भदौड़ में वैकल्पिक निकटवर्ती स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने के लिए काम किया जा रहा है। राज्य के कई जिलों के पानी में यूरेनियम व फ्लोराइड की मात्रा अधिक है।

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