मौत के मुंह से लौटा बलविंदर: डंकी रूट से अमेरिका... अमेजन के जंगलों में भटका, घास खाकर जिंदा रहा, सुनाई आपबीती
डंकी रूट के जरिये पंजाब से अमेरिका गया युवक यूएस तो नहीं पहुंचा, लेकिन उसने मौत को नजदीक के जरूर देखा। क्योंकि युवक आठ महीने तक अमेजन के जंगलों में भटकता रहा और फिर डोकरों ने उसे बंधक बना कर जान से मारने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह वह बच गया और अब सही सलामत अपने परिवार के पास लौट आया है।
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घर, परिवार, प्रदेश व अपना देश छोड़ विदेश जाने की चाह में पंजाब के युवा क्रूर यातनाएं सह रहे हैं। डंकी रूट के जरिये अमेरिका जाने की चाह युवाओं को मौत के मुंह तक ले जाती है। कई महीने जंगलों में भटकने और भूखे-प्यासे कई दिन बिताने के बावजूद अमेरिका नहीं पहुंच पाया युवक अब पंजाब लौट आया है। युवक के साथ क्या कुछ हुआ, उसने कैसी-कैसी यातनाएं सही, युवक ने अपनी आपबीती सुनाई है।
एजेंट को लाखों रुपये देकर अमेरिका गया कपूरथला के गांव बाजा का युवक बलविंदर सिंह कोलंबिया से मौत मुंह लौटा है। बलविंदर सिंह ने जो दास्तां सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। उसने बताया कि कैसे उसने अपनी आंखों के सामने मौत को देखा और उसपर व उसके साथियों पर हुए अत्याचारों का खौफनाक मंजर देखा। बलविंदर ने बताया कि जब उसके साथियों को डोकरों ने बंधक बनाकर बेरहमी से प्रताड़ित किया, तो उसे भी लगने लगा कि अब उसका अंत निकट है।
बलविंदर सिंह राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से सही सलामत परिवार के पास लौट आया है। बलविंदर सिंह वीरवार को परिवार सहित सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया में संत सीचेवाल का धन्यवाद करने पहुंचा था।
कई देशों के जगलों में भटका, पंजाब-हरियाणा के युवक भी बंदी
बलविंदर ने बताया कि वह जुलाई 2024 में भारत से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था। एजेंटों ने उसे दिल्ली से मुंबई, फिर नीदरलैंड, सिएरा लियोन, घाना, अमेजन के जंगलों के रास्ते ब्राजील पहुंचाया। इसके बाद बोलिविया, पेरू और इक्वाडोर होते हुए अंत में कोलंबिया के जंगलों में डोकरों के हवाले कर दिया गया। वहां उसका पासपोर्ट और मोबाइल छीन लिया गया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। वहां पंजाब, हरियाणा और अन्य देशों के युवकों को भी बंदी बनाकर रखा गया था। उसने दावा किया कि डोकरों ने पास के ही इलाके में नेपाल की लड़कियों को भी बंदी बना कर रखा हुआ था। डोकर वहां बंदी युवकों के शरीर पर ब्लेड से वार कर उन्हें लहूलुहान करते थे, उन पर पिघली हुई प्लास्टिक और गर्म रॉड लगाई गई। इन दरिंदों ने इन क्रूर यातनाओं की वीडियो बनाकर भारत में माता-पिता को भेज कर करोड़ों रुपयों की मांग की।
डोकरों ने दी थी गोली मारने की धमकी
बलविंदर ने बताया कि जब उसे गोली मारने की धमकी दी गई तो उसने सोचा कि मरना तो तय है, क्यों न भागने की कोशिश की जाए। फिर वह उसी रात को वहां किसी तरह से डोकरों की चंगुल से भाग निकला। उसने बताया कि उसका यह प्रयास तब सफल साबित हुआ जब जंगल से भागते हुए वे एक मुख्य मार्ग तक पहुंच गया, जहां एक बाइक सवार ने उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। सुरक्षित जगह पहुंचने तो करीब पांच महीने बाद परिवार से संपर्क कर पाया। इसके बाद उसकी मां और बहन राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया और उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क कर बलविंदर की वापसी के लिए जरूरी कदम उठवाए।
मां बोली- बेटे का हुआ दूसरा जन्म
निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंची बलविंदर की माता शिंदर कौर ने संत सीचेवाल का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह मेरे बेटे का दूसरा जन्म है। एजेंटों ने पहले ही उनकी जमीन और मकान बिकवा दिया था। ऐसे हालात में अगर संत सीचेवाल बलविंदर की मदद न करवाते तो उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे अपने बेटे को वापस बुला पाते।
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