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चंडीगढ़ को मिलेगा स्वतंत्र प्रशासक: पंजाब राज्यपाल का सांविधानिक दायरा होगा खत्म! ...विधेयक लाएगी केंद्र सरकार

Sun, 23 Nov 2025 09:12 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 23 Nov 2025 09:12 AM IST
सार

चंडीगढ़ को मिलेगा स्वतंत्र प्रशासक, पंजाब राज्यपाल का सांविधानिक दायरा खत्म करने की तैयारी है। केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2025 लाएगी। पंजाब में सियासी हंगामा मच गया है।

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Chandigarh to get independent administrator Preparations to end constitutional scope of Punjab Governor
चंडीगढ़ को मिलेगा स्वतंत्र प्रशासक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ को पंजाब राज्यपाल के सांविधानिक दायरे से बाहर लाने की तैयारी की जा रही है। 01 दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार इस संदर्भ में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2025 लाएगी। 
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इसके तहत चंडीगढ़ का अलग प्रशासक नियुक्त किया जा सकेगा। फिलहाल पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं। अब यहां अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह स्वतंत्र प्रशासक एलजी स्तर का नियुक्त किया जा सकता है।
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केंद्र ने यूटी चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है, जो राष्ट्रपति को इस संबंध में सीधे कानून बनाने का अधिकार देता है। इस विधेयक का मकसद चंडीगढ़ को अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा नगर हवेली और दमन व दीव और पुडुचेरी (जब वहां की विधानसभा भंग या निलंबित हो) जैसे बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों की तरह संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाना है।
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संसद में पेश होने वाले इस संशोधन विधेयक के बाद पंजाब में सियासी हंगामा शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी समेत कांग्रेस व शिअद के नेताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी इस पर कड़ा विरोध जताया है। 
 

इस संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद चंडीगढ़ पर पंजाब का प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण खत्म हो जाएगा। 
 

नेताओं का आरोप है कि ऐसा कर चंडीगढ़ को हरियाणा को सौंपने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है। अभी यूटी चंडीगढ़ में कर्मचारी अनुपात हरियाणा का 40 प्रतिशत जबकि पंजाब का 60 प्रतिशत है। दोनों राज्यों से ये कर्मचारी व अधिकारी यूटी में डेपुटेशन पर भेजे जाते हैं।

 

चंडीगढ़ पर सिर्फ पंजाब का हक : मान
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल का आप सरकार कड़ा विरोध करती है। यह संशोधन पंजाब के हितों के विरुद्ध है। हम पंजाब के खिलाफ रची जा रही साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। पंजाब की धरती पर बने चंडीगढ़ पर सिर्फ हमारा हक है। हम अपना हक यूं ही जाने नहीं देंगे। इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, हम उठाएंगे।- भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
 

गृहमंत्री शाह मामले में स्थिति स्पष्ट करें
पंजाब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी स्थिति साफ करने की अपील की है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का है और इसे छीनने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी अपील की है कि वे तुरंत इस मसले पर केंद्र से बात करें।-अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रदेशाध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस
 

पंजाब से चडीगढ़ को छीनने की कोशिश
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि संशोधन बिल पारित हुआ तो यह उन पंजाबियों के साथ धोखा होगा जिन्होंने देश के लिए सबसे अधिक बलिदान दिया है। यह चंडीगढ़ को पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण से स्थायी रूप से बाहर करने की कोशिश है। यह संघवाद की भावना के भी खिलाफ है।-सुखबीर सिंह बादल, अध्यक्ष, शिरोमणि अकाली दल

चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने का आया था प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने साल 1970 में चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने संबंधी एक प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया था। बाद में राजीव-लोंगोवाल समझौते में चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की समय सीमा जनवरी 1986 तय की गई थी। इस समझौते को संसद ने भी मंजूरी दी थी लेकिन यह लागू नहीं हो सका। अब यदि यह संशोधन विधेयक पारित होता है तो चंडीगढ़ पर पंजाब का सांविधानिक अधिकार कम हो जाएगा।

हरियाणा बनने से पहले पंजाब की राजधानी था चंडीगढ़
  • पंजाब पुनर्गठन अधिनियम-1966 की धारा-4 के तहत पंजाब सूबे का एक बड़ा क्षेत्र अलग कर उसे हरियाणा राज्य बनाया गया था। इस अधिनियम को 18 सितंबर 1966 को संसद द्वारा पारित किया गया था। इस तरह हरियाणा के नए राज्य का गठन हुआ जोकि 1 नवंबर 1966 से लागू हुआ था। बाद में पंजाब राज्य के कुछ क्षेत्र को हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित कर दिया गया।

  • पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी के रूप में कार्य करने के लिए एक अस्थायी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था।

  • अनुच्छेद 239 के अधीन यूटी में नियुक्त प्रशासक को उप राज्यपाल के रूप में पदनामित किया जाता है मगर केंद्र ने यूटी चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अंतर्गत चंडीगढ़ को स्वतंत्र प्रशासक तो मिलेगा मगर उसके उप राज्यपाल होने की संभावनाएं कम रहेंगी।

  • साल 1952 से 1966 तक चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी थी। शहर के लोगों का राज्य की विधानसभा में प्रतिनिधित्व था और एक मुख्य आयुक्त स्थानीय प्रशासन का नेतृत्व करता था। पंजाब के विभाजन के समय, केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया और इसका प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के अधीन कार्य करता था। केंद्र शासित प्रदेश यानी चंडीगढ़ के लिए मुख्य आयुक्त नामक प्रशासक नियुक्त करने की प्रथा 31 मई, 1984 तक जारी रही।

  • 1 जून, 1984 को पंजाब के राज्यपाल ने प्रशासक के रूप में केंद्र शासित प्रदेश का प्रत्यक्ष प्रशासन अपने हाथ में ले लिया। मुख्य आयुक्त का नाम बदलकर प्रशासक का सलाहकार कर दिया गया। जून 1984 से, पंजाब के राज्यपाल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब नए संशोधन विधेयक के बाद चंडीगढ़ पर पंजाब के राज्यपाल का सांविधानिक दायरा खत्म करने की तैयारी है।
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