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आर्मी इंटेलिजेंस होगी और मजबूत: अब डेफ एआई से खतरे की खुफिया जानकारी जुटाएगी सेना, केंद्र करेगा मदद
Tue, 22 Jul 2025 09:06 AM IST
निवेदिता वर्मा
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 22 Jul 2025 09:06 AM IST
सार
डेफएआई प्रणाली मेलवेयर व फिशिंग हमलों से सैन्य बलों को सतर्क रखने में सहायक होगी। इसके जरिये सेना रक्षा साइबर सुरक्षा और एआई के अतर्संबंध को समझेगी। मेलवेयर यानी हैकर्स की ओर से डाटा चुराने व उसे नष्ट करने और कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के लिए विकसित किए जाने वाले सॉफ्टवेयर का पता लगाने में भी इससे मदद मिलेगी।
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डेफएआई
- फोटो : AI
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विस्तार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सभी सैन्य व अर्ध सैन्य बल अपने खुफिया तंत्रों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस ऑपरेशन के बाद यह बात साफ हो गई है कि साइबर और आईटी युग में सैन्य बलों को अब देश की सुरक्षा और सीमा पार के खतरे को भांपने के लिए कई तरह की नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए सेना अब अपनी इंटेलिजेंस विंग को और मजबूत करते हुए डेफ एआई (डिफेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से खतरे की खुफिया जानकारियां जुटाएगी।
भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र इसमें भारतीय सेना की मदद कर रहा है। सैन्य अफसरों का मानना है कि दुश्मनों से खतरे का पूर्वानुमान लगने में एआई आधारित इस सिस्टम से बड़ी मदद मिलेगी। वर्तमान वार फेयर परिदृश्य में सैन्यबलों के समक्ष डीप फेक, लेजर लाइट माड्यूल और क्वांटम खतरे, ये बड़ी चुनौतियां हैं।
यह भी पढ़ें: केंद्र के खिलाफ SKM का आंदोलन: 31 अगस्त को देशभर में ट्रैक्टर मार्च, 26 नवंबर को बड़ी लड़ाई की चेतावनी
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डीप फेक एक ऐसा एआई सिस्टम है, जिसका उपयोग विश्वसनीय दिखने वाले फर्जी चित्र, ध्वनी और वीडियो बनाने के लिए किया जा रहा है। यह ऐसे लोगों और घटनाओं का निर्माण करता है जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं या घटित ही नहीं हुए हैं। डीपफेक तकनीक का सबसे अधिक उपयोग झूठी जानकारियां या दुष्प्रचार फैलाकर गुमराह करना होता है।
इसी तरह लेजर लाइट मॉड्यूल (एलएलएम) विभिन्न प्रकार के लाइट सोर्सिस का उपयोग कर सटीक लक्ष्य प्राप्ति और लक्ष्य को चिह्नित करने में मददगार बनता है। उधर डिजिटल परिदृश्य में क्वांटम खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है। इस तकनीक के जरिये सूचनाओं को ऐसे तरीकों से परिवर्तित व डेवलप किया जा सकता है जो कि पारंपरिक कंप्यूटरों से असंभव माने जाते हैं। उक्त तरह की खतरों
की पहचान के लिए भारतीय सेना अब डेफएआई की मदद लेगी।
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भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र इसमें भारतीय सेना की मदद कर रहा है। सैन्य अफसरों का मानना है कि दुश्मनों से खतरे का पूर्वानुमान लगने में एआई आधारित इस सिस्टम से बड़ी मदद मिलेगी। वर्तमान वार फेयर परिदृश्य में सैन्यबलों के समक्ष डीप फेक, लेजर लाइट माड्यूल और क्वांटम खतरे, ये बड़ी चुनौतियां हैं।
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डीप फेक एक ऐसा एआई सिस्टम है, जिसका उपयोग विश्वसनीय दिखने वाले फर्जी चित्र, ध्वनी और वीडियो बनाने के लिए किया जा रहा है। यह ऐसे लोगों और घटनाओं का निर्माण करता है जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं या घटित ही नहीं हुए हैं। डीपफेक तकनीक का सबसे अधिक उपयोग झूठी जानकारियां या दुष्प्रचार फैलाकर गुमराह करना होता है।
इसी तरह लेजर लाइट मॉड्यूल (एलएलएम) विभिन्न प्रकार के लाइट सोर्सिस का उपयोग कर सटीक लक्ष्य प्राप्ति और लक्ष्य को चिह्नित करने में मददगार बनता है। उधर डिजिटल परिदृश्य में क्वांटम खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है। इस तकनीक के जरिये सूचनाओं को ऐसे तरीकों से परिवर्तित व डेवलप किया जा सकता है जो कि पारंपरिक कंप्यूटरों से असंभव माने जाते हैं। उक्त तरह की खतरों
की पहचान के लिए भारतीय सेना अब डेफएआई की मदद लेगी।