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मौसम में परिवर्तन का होगा AI आकलन: आपदा का जीरो-फेल मिशन, वेस्टर्न कमांड और एनडीएमए का एक्शन प्लान तैयार
Thu, 29 Jan 2026 06:20 AM IST
अंकेश ठाकुर
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 29 Jan 2026 06:20 AM IST
सार
उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति अधिक रहती है। पहाड़ों और ग्लेशियरों के दरकने, अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी घटनाओं का अनुमान अब एआई तकनीक से किया जाएगा।
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कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार व एनडीएमए के सदस्य और विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह।
- फोटो : सेना
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विस्तार
बरसात पहले की तुलना में अधिक क्यों हो रही है? क्यों हर साल बाढ़ जैसी आपदाएं तेजी से बढ़ रही हैं? तूफान, सूखा, भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और चट्टान-स्खलन जैसी आपदाओं का कम अंतराल में दोहराव विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब इन आपदाओं के कारणों और प्रभाव का आकलन एआई आधारित प्रणाली की ओर से किया जाएगा ताकि सामुदायिक सुरक्षा बढ़ाई जा सके और नुकसान कम किया जा सके।
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सेना की वेस्टर्न कमांड और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने इस मिशन को लेकर रणनीतिक साझेदारी की है। इसका उद्देश्य एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जिसमें तकनीक, रणनीति और मानवीय साहस का समन्वय हो। इस पहल के तहत कोई भी आपदा मिशन फेल न हो इसके लिए हर पहलू पर ध्यान दिया जाएगा।
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उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति अधिक रहती है। पहाड़ों और ग्लेशियरों के दरकने, अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी घटनाओं का अनुमान अब एआई तकनीक से किया जाएगा। मौजूदा पूर्व चेतावनी प्रणालियां केवल मौसम पूर्वानुमान तक सीमित थीं लेकिन अब उन्हें संभावित आपदा की गंभीरता और प्रभाव बताने के लिए उन्नत किया जा रहा है।
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नए उपकरणों से कम होंगे खतरे
केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) हथियारों के खतरों से निपटने के लिए नई तकनीक तैयार की जा रही है। इसमें सुरक्षा सूट, उपग्रह-लिंक्ड संचार मॉड्यूल, उच्च ऊंचाई वाले बचाव गियर और उन्नत चिकित्सा ट्रॉमा किट शामिल हैं। ये उपकरण मिलिट्री और नागरिक सुरक्षा दोनों के लिए अहम हैं।
एक्शन प्लान तैयार
वेस्टर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह और 11वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया की मौजूदगी में रणनीतिक साझेदारी के तहत एक्शन प्लान तैयार किया गया। इसका लक्ष्य राज्य सरकारों, सेना और एनडीआरएफ के बचाव प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।
आपदाओं का पूर्वानुमान बेहतर होगा
इस योजना के तहत न केवल प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान बेहतर होगा बल्कि आपदा प्रबंधन में निर्णय लेने की गति, बचाव उपकरण और मानवीय कार्रवाई को भी एकीकृत किया जाएगा जिससे उत्तर भारत में आपदा प्रबंधन का स्तर अब जीरो-फेल मिशन की दिशा में जाएगा।