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आप को तगड़ा झटका: राघव चड्ढा ने अंदरखाने गिरा दिए सात विकेट, क्यों बढ़ी पंजाब के सांसदों की केजरीवाल से दूरी
Fri, 24 Apr 2026 04:16 PM IST
Nivedita
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Fri, 24 Apr 2026 04:16 PM IST
सार
आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया था। इसके बाद से पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ गई थी जो आज पार्टी में टूट के ताैर पर सामने आई।
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आप से अलग हुए राघव चड्ढा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आम आदमी पार्टी और उसके युवा चेहरे राघव चड्ढा के रास्ते अलग हो गए हैं। राघव ने भाजपा में शामिल होने का एलान किया है। उनके साथ पंजाब के सांसद अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और हरभजन सिंह के भी भाजपा में जाने की बात सामने आ रही है।
कुछ दिन पहले राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से चड्ढा को हटाकर उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया गया था। इस फैसले ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे।
पार्टी ने नेतृत्व में बदलाव करने के बाद राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया था कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। इसके बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच दूरियों की चर्चा शुरू हो गई थी। जो आज पार्टी में टूट के ताैर पर सामने आ गई।
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कुछ दिन पहले राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से चड्ढा को हटाकर उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया गया था। इस फैसले ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे।
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पार्टी ने नेतृत्व में बदलाव करने के बाद राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया था कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। इसके बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच दूरियों की चर्चा शुरू हो गई थी। जो आज पार्टी में टूट के ताैर पर सामने आ गई।
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काैन हैं राघव चड्ढा
राघव चड्ढा अरविंद केजरीवाल के काफी नजदीकी माने जाते थे। आंदोलन के समय से दोनों साथ थे। चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से अपनी राजनीति शुरू की थी। 2015 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे 2019 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2020 में राजेंद्र नगर से दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।इसके बाद उन्हें आम आदमी पार्टी का पंजाब प्रभारी बनाया गया। 21 मार्च, 2022 को आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य हैं। वे पूर्व दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से 2022 तक विधायक रह चुके हैं।
कैसे बिगड़ी थी बात
दरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी दिन से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परिनीति के साथ लंदन में घूमते व मस्ती की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे। राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया। औपचारिक तौर पर वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर नजर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे।विपक्ष जहां इसे आप के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा था। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।
राघव चड्ढा ने खुद को बताया दरिया
राघव चड्ढा ने सीधे तौर पर पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इशारों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो तरह की तस्वीर सामने आ रही है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे सामान्य बदलाव बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राघव चड्ढा के इशारे इसे आवाज दबाने की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहे हैं।
पार्टी की छवि पर असर
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ता है, तो इसका असर पार्टी की छवि और आंतरिक संतुलन दोनों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय स्तर पर आप अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामला अनुशासन का है या रणनीति का, लेकिन इतना तय है कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने सियासत में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद यहीं थमता है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका बनता है।