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गेहूं के अंबार को लिफ्टिंग का इंतजार
Updated Thu, 28 Apr 2016 10:16 PM IST
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भगतांवाला दाना मंडी में लगे गेहूं से भरी बोरियों के अंबार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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करीब दस दिन से पड़ रही चिलचिलाती धूप से गेहूं की आमद में खासी तेजी आई हैं, वहीं लिफ्टिंग को लेकर सरकारी चाल अभी भी सुस्त दिखाई दे रही है।
इतना ही नहीं, आढ़ती फसल ला रहे जमींदार को दो घंटे के अंदर भुगतान कर रहे हैं, जबकि उनकी निगाहें सरकारी भुगतान की ओर टकटकी लगाकर देख रही हैं।
करीब 100 एकड़ में फैली भगतांवाला दाना मंडी में रोजाना करीब दो लाख बोरी (पचास किलो प्रति बोरी) के हिसाब से गेहूं की आमद हो रही है। अब तक 12 लाख बोरी मंडी में आ चुकी है। मंडी के खुले मैदान में बोरियों के दूर-दूर तक अंबार लगे हैं, लेकिन लिफ्टिंग न होने से आढ़ती के माथे पर शिकन दिखाई देने लगी है। अधिकारियों के अनुसार सरकारी रेट 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 12 प्रतिशत तक की नमी वाली गेहूं की खरीद नियमित तौर पर जारी हैं।
महीने की फसल पांच दिनों में पहुंची
तेज धूप में सूख रही फसल की कंबाइन से हो रही कटाई के चलते उसकी आमद जोरों पर हैं। गल्ला आढ़ती यूनियन के प्रधान नरेंद्र बहल के अनुसार जो फसल एक महीने में आती थी, वह मशीनी कटाई के कारण पांच दिनों में आ रही हैं, जबकि मंडी में फसल की तुलाई, भराई तथा ट्रकों में लदाई मैन्युअल होता है। इसलिए लिफ्ंिटग में थोड़ा समय लग रहा है।
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इतना ही नहीं, आढ़ती फसल ला रहे जमींदार को दो घंटे के अंदर भुगतान कर रहे हैं, जबकि उनकी निगाहें सरकारी भुगतान की ओर टकटकी लगाकर देख रही हैं।
करीब 100 एकड़ में फैली भगतांवाला दाना मंडी में रोजाना करीब दो लाख बोरी (पचास किलो प्रति बोरी) के हिसाब से गेहूं की आमद हो रही है। अब तक 12 लाख बोरी मंडी में आ चुकी है। मंडी के खुले मैदान में बोरियों के दूर-दूर तक अंबार लगे हैं, लेकिन लिफ्टिंग न होने से आढ़ती के माथे पर शिकन दिखाई देने लगी है। अधिकारियों के अनुसार सरकारी रेट 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 12 प्रतिशत तक की नमी वाली गेहूं की खरीद नियमित तौर पर जारी हैं।
महीने की फसल पांच दिनों में पहुंची
तेज धूप में सूख रही फसल की कंबाइन से हो रही कटाई के चलते उसकी आमद जोरों पर हैं। गल्ला आढ़ती यूनियन के प्रधान नरेंद्र बहल के अनुसार जो फसल एक महीने में आती थी, वह मशीनी कटाई के कारण पांच दिनों में आ रही हैं, जबकि मंडी में फसल की तुलाई, भराई तथा ट्रकों में लदाई मैन्युअल होता है। इसलिए लिफ्ंिटग में थोड़ा समय लग रहा है।
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