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प्रोटोकाल पर हावी रहा अकाली भाजपा का गठबंधन

Sat, 09 Nov 2019 10:00 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2019 10:00 PM IST
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The Akali-BJP alliance dominated the protocol, gave more importance than Sukhbir Badal on the stage of SGPC
डेरा बाबा नानक में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित करते पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिं - फोटो : GURDASPUR
करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह पर लैंड पोर्ट अथारिटी आफ इंडिया और एसजीपीसी की ओर से कराए गए समारोह में प्रोटोकाल पर अकाली-भाजपा का गठबंधन हावी दिखा। इस मौके पर मंच पर सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री से अधिक महत्व दिया गया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शिष्टाचार का पालन किया लेकिन मंच पर बोलबाला अकाली दल का ही रहा। जो लोगों में बेहद चर्चा का विषय रहा।
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एसपीजीसी की स्टेज पर अकाली दल और भाजपा के ही नेता और मंत्री दिखे। मंच पर मुख्य तौर पर मंत्री हरसिमरत कौर बादल, एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सांसद सुखबीर सिंह बादल, गवर्नर वीपी सिंह बदनौर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, भाजपा प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, मंत्री सोमप्रकाश और सांसद सनी देओल मौजूद रहे। वहीं एक वीडियो भी सामने आया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह से आगमन पर हाथ भी नहीं मिलाया। जिसे देखने से लोगों में इस रवैये की निराशा रही।
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वहीं श्रद्धालुओं का कहना था कि राम मंदिर का फैसला आने से राष्ट्रीय स्तर पर कॉरिडोर के उद्घाटन का मामला दब गया है। निरंजन सिंह का कहना था कि अगर फैसला एक दो दिन लेट आता तो राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करतारपुर कॉरिडोर छा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस उद्घाटन को जो महत्व मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।
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दूसरी तरफ अयोध्या पर आए फैसले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी सवाल उठाए। कुरैशी का कहना था कि आज ही के दिन यह फैसला क्यों सुनाया गया है। पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरिन मजारी ने भी एक ही दिन फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि फैसला पहले सुनाया जाता तो संभवत: करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन नहीं हो पाता।
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