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मंदिर के कब्जे को लेकर वक्फ बोर्ड और मुल्ला आमने-सामने
अमर उजाला ब्यूरो अमृतसर
Updated Sun, 29 Dec 2013 10:24 PM IST
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पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी के राजा बाजार स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा पर कब्जा किए जाने के बाद अब भूमाफिया उक्त क्षेत्र में मौजूद एक पुरातन मंदिर को हड़पने की तैयारी में है।
पाकिस्तान स्थित हिंदू-सिखों के धार्मिक स्थलों और विरासती स्मारकों पर पैनी नजर रखने वाले इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने इसका खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि रावलपिंडी के राजा बाजार मंदिर तथा मंदिर की भूमि रावलपिंडी के भूमी रिकार्ड कार्यालय में खसरा न. यू-1310, यू-1311/ए, यू- 1330, 1331 तथा 1332 के अधीन दर्ज है।
मंदिर के आसपास 103 दुकानों वाली मदीना मार्केट तथा 22 दुकानों वाला अल-उमर-प्लाजा बन जाने के कारण इस मंदिर की मौजूदगी के बारे में रावलपिंडी में रह रहे हिंदुओं को भी कोई जानकारी नहीं थी।
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कोछड़ के अनुसार उक्त बाजार में नवंबर के अंत में एक मुस्लिम धार्मिक समारोह में हुई हिंसक लड़ाई में लगी आग के बाद जब पिछले हफ्ते हलिमटन रोड पर मंदिर के साथ सटी एक पुरातन सिख हवेली तथा अन्य कुछ इमारतों को गिराया गया, तब वहां मंदिर के मौजूद होने का स्थानीय हिंदुओं को पता चला।
दो दिन पहले 27 दिसंबर को जब ईटीपीबी के अधिकारी उक्त बाजार में मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से बनाए जा रहे तालेअमूल कुरान मदरसे तथा उसके साथ सटी मस्जिद को हटाने पहुंचे तो मस्जिद के केयर टेकर मौलाना अशरफ अली ने ईटीपीबी के अधिकारियों को यह कहकर चलता कर दिया कि देश के बंटवारे के समय रावलपिंडी के हिंदू खुद उसके पिता मौलाना गुलाम अल्ला खां को मंदिर के स्थान पर मस्जिद तथा मदरसा बना लेने की अनुमति देकर गए थे।
जबकि ईटीपीबी के अधिकारी आसिफ खां का कहना है कि उनका विभाग देश के बंटवारे के दौरान इस प्रकार के हुए किसी भी समझौते मान्याता नहीं देता और वह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अदालती कार्रवाई करेंगे।
कोछड़ ने बताया कि मौजूदा समय में रावलपिंडी के सदर क्षेत्र में कृष्णा मंदिर के अतिरिक्त वाल्मीकि मंदिर ही आबाद है, जबकि भारत में उठे बाबरी मस्जिद विवाद की आड़ में रावलपिंडी के पूरे एक दर्जन मंदिर गिराकर वहां प्लाजा बन चुके हैं।
अब शेष बचे सरवर रोड स्थित प्राचीन मंदिर, टीपू रोड के मंदिर लाला तनसुख राय, कोहाटी बाजार के कलियाण दास मंदिर, लंडा बाजार के मोहन मंदिर, कसाई बाजार के जैन मंदिर, बोहड़ बाजार के आर्य समाज मंदिर सहित बाग सरदारां आबादी में मौजूद तीनों मंदिरों का भविष्य ज्यादा सुरक्षित नहीं है।
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पाकिस्तान स्थित हिंदू-सिखों के धार्मिक स्थलों और विरासती स्मारकों पर पैनी नजर रखने वाले इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने इसका खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि रावलपिंडी के राजा बाजार मंदिर तथा मंदिर की भूमि रावलपिंडी के भूमी रिकार्ड कार्यालय में खसरा न. यू-1310, यू-1311/ए, यू- 1330, 1331 तथा 1332 के अधीन दर्ज है।
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मंदिर के आसपास 103 दुकानों वाली मदीना मार्केट तथा 22 दुकानों वाला अल-उमर-प्लाजा बन जाने के कारण इस मंदिर की मौजूदगी के बारे में रावलपिंडी में रह रहे हिंदुओं को भी कोई जानकारी नहीं थी।
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कोछड़ के अनुसार उक्त बाजार में नवंबर के अंत में एक मुस्लिम धार्मिक समारोह में हुई हिंसक लड़ाई में लगी आग के बाद जब पिछले हफ्ते हलिमटन रोड पर मंदिर के साथ सटी एक पुरातन सिख हवेली तथा अन्य कुछ इमारतों को गिराया गया, तब वहां मंदिर के मौजूद होने का स्थानीय हिंदुओं को पता चला।
दो दिन पहले 27 दिसंबर को जब ईटीपीबी के अधिकारी उक्त बाजार में मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से बनाए जा रहे तालेअमूल कुरान मदरसे तथा उसके साथ सटी मस्जिद को हटाने पहुंचे तो मस्जिद के केयर टेकर मौलाना अशरफ अली ने ईटीपीबी के अधिकारियों को यह कहकर चलता कर दिया कि देश के बंटवारे के समय रावलपिंडी के हिंदू खुद उसके पिता मौलाना गुलाम अल्ला खां को मंदिर के स्थान पर मस्जिद तथा मदरसा बना लेने की अनुमति देकर गए थे।
जबकि ईटीपीबी के अधिकारी आसिफ खां का कहना है कि उनका विभाग देश के बंटवारे के दौरान इस प्रकार के हुए किसी भी समझौते मान्याता नहीं देता और वह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अदालती कार्रवाई करेंगे।
कोछड़ ने बताया कि मौजूदा समय में रावलपिंडी के सदर क्षेत्र में कृष्णा मंदिर के अतिरिक्त वाल्मीकि मंदिर ही आबाद है, जबकि भारत में उठे बाबरी मस्जिद विवाद की आड़ में रावलपिंडी के पूरे एक दर्जन मंदिर गिराकर वहां प्लाजा बन चुके हैं।
अब शेष बचे सरवर रोड स्थित प्राचीन मंदिर, टीपू रोड के मंदिर लाला तनसुख राय, कोहाटी बाजार के कलियाण दास मंदिर, लंडा बाजार के मोहन मंदिर, कसाई बाजार के जैन मंदिर, बोहड़ बाजार के आर्य समाज मंदिर सहित बाग सरदारां आबादी में मौजूद तीनों मंदिरों का भविष्य ज्यादा सुरक्षित नहीं है।