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सुखबीर बादल को दिवाली के बाद सुनाई जाएगी सजा: चुनाव प्रचार में भी शामिल नहीं हो सकता तनखइया

Thu, 24 Oct 2024 02:06 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Thu, 24 Oct 2024 02:06 PM IST
सार

पंजाब में चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव में सुखबीर बादल को चुनाव प्रचार और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अकाल तख्त साहिब से छूट मिलने के कयासों पर विराम लग गया है।

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Tankhaiya Sukhbir Badal cannot participate in the election campaign Giani Raghbir Singh
सुखबीर बादल - फोटो : twitter @officeofssbadal

विस्तार

अकाल तख्त साहिब की तरफ से तनखइया करार शिअद नेता सुखबीर बादल चुनाव प्रचार व अन्य राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते। पंजाब में चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव में सुखबीर बादल को चुनाव प्रचार और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अकाल तख्त साहिब से छूट मिलने के कयासों पर विराम लग गया है। अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल मामले में अब दिवाली के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है।

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सिंह साहिब ने कहा कि दिवाली से पहले पांच तख्तों के सिंह साहिबान की कोई भी बैठक होने की संभावना नहीं है। पांच तख्तों के सिंह साहिबान की बैठक में ही विचार चर्चा करके कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। 
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ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सिख पंथ में तनखाइया व्यक्ति की एक अलग परिभाषा होती है। इसके तहत जब तक कोई तनखाइया घोषित सिख श्री अकाल तख्त साहिब से तनखाह के तहत मिली धार्मिक सजा को पूरा नहीं कर लेता और विधि पूर्वक धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपनी धार्मिक सजा को पूरा नहीं कर लेता तब तक वह धार्मिक आरोपों से बरी नहीं हो सकता है। किसी व्यक्ति को तनखइया व धार्मिक सजा लगने व उसे पूरा करने के बाद ही उसे दोषमुक्त किया जा सकता है। तब तक उसे किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती, जब तक वह धार्मिक सजा को पूरा नहीं कर लेता। इसलिए तनखाइया सुखबीर सिंह बादल को किसी भी तरह के धार्मिक, राजनीतिक व सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने व लोगों से मेलजोल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
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उल्लेखनीय है कि 22 अक्तूबर को अकाली दल बादल के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ की अध्यक्षता में शिष्टमंडल ने जत्थेदार रघबीर सिंह से मुलाकात कर उन्हें सुखबीर को चुनावी गतिविधियों में शामिल होने की इजाजत देने की अपील की थी। इससे पहले विरसा सिंह वल्टोहा के माध्यम से भी सिंह साहिबानों को सुखबीर को जल्दी व वाजिब सजा देने बात शुरू करने की कोशिश की थी। जो बाद में विवाद बन गई। 


अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने 30 अगस्त को अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को पूर्व अकाली सरकार कार्यकाल के दौरान सिख पंथ की सही तरीके से तरजमानी न करने को लेकर तनखाइया घोषित किया था।

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