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श्री अकाल तख्त साहिब कोई थाना या शिकायत निवारण केंद्र नहीं है: जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह

Sat, 16 May 2020 11:14 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, अमृतसर
अमर उजाला, अमृतसर Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 16 May 2020 11:14 AM IST
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Shri Akal Takht is not a police station or a grievance redressal center, jathedar giani harpreet singh
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह - फोटो : फाइल फोटो
श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में शिकायतों के आ रहे सैलाब पर जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जत्थेदार ने कहा है कि शिकायतकर्ता श्री अकाल तख्त में आने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की धर्म प्रचार कमेटी के पास शिकायत लेकर जाएं।
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जत्थेदार के अनुसार पिछले कुछ समय यह रुझान शुरू हो गया है कि कुछ व्यक्ति या संगठन किसी भी मामले को लेकर श्री अकाल तख्त में शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकतर शिकायतों का संबंध श्री अकाल तख्त साहिब से नहीं होता।
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अधिकतर शिकायतकर्ता अखबारों में समाचार प्रकाशित करने या सोशल मीडिया में वीडियो डालने के लिए ही शिकायत करते हैं। ऐसे में लोग अपनी शिकायत पहले एसजीपीसी के धर्म प्रचार कमेटी को भेजे, उसके बाद जरूरत पड़ने पर मामला श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे।
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जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब कोई थाना या शिकायत निवारण केंद्र नहीं है। बीते कुछ समय से श्री अकाल तख्त को कुछ ऐसे मुद्दों में उलझाया जा रहा है, जिनका श्री अकाल तख्त से कोई वास्ता नहीं होता।

जिन पंथक मुद्दों को सिख विद्वानों के बीच विचार के लिए रखना चाहिए, उन मुद्दों पर आम लोग सोशल मीडिया में चर्चा कर पंथक विचारधारा पर चोट कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में जत्थेदार ने कहा कि हैरानी की बात है कि सरकार लोगों के गुरुघरों और अन्य धार्मिक अस्थानों में नतमस्तक होने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की बात करती है, लेकिन शराब के ठेकों पर चुप साधे है।


बता दें कि पंजाबी गायक सतिंदर सरताज द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह की बाणी फतेहनाम के फारसी उच्चारण को लेकर एसजीपीसी के धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य अभिलाषी व दमदमी टकसाल के पर्वत ने श्री अकाल तख्त साहिब में शिकायत की थी। जत्थेदार ने पूरे मामले की जांच करवा कर सरताज को क्लीन चिट भी दे दी थी। इसके बावजूद भी विवाद थम नहीं रहा है। जत्थेदार ने प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह को जफरनामा का प्राचीन प्रारूप दिखाने के निर्देश दिए हैं।
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