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लंगर में दाल पकाकर फल-सब्जियों के लाखों के फर्जी बिल बनाए, एसजीपीसी ने निलंबित किए पांच
Thu, 02 Jul 2020 11:05 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, अमृतसर/श्री आनंदपुर साहिब
अमर उजाला, अमृतसर/श्री आनंदपुर साहिब
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 11:05 AM IST
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लंगर में पकाई दाल
- फोटो : फाइल फोटो
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लॉकडाउन व कर्फ्यू के दौरान प्रवासी मजदूरों व अन्य जरूरतमंदों के लिए शुरू किए लंगर में तैयार की जानी वाली सब्जी में हुए घोटाले में शामिल तख्त श्री केशगढ़ साहिब के मैनेजर जसवीर सिंह सहित पांच कर्मचारियों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने निलंबित कर दिया है। निलंबित तख्त श्री केशगढ़ साहिब के मैनेजर जसवीर सिंह, मीत मैनेजर लखविंदर सिंह, एक लेखाकार, स्टोरकीपर व गुरुद्वारा इंस्पेक्टर भी शामिल है।
एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह ने इन कर्मचारियों को एक साथ निलंबित किए जाने की पुष्टि की है। डॉ. रूप सिंह के अनुसार उन्होंने जांच अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद दो दिन पहले ही लौंगोवाल को इनके विरुद्ध करवाई के लिए लिखा था। लौंगोवाल ने तख्त केशगढ़ का कार्य सुचारु ढंग से चलाने के लिए गुरदीप सिंह कंग को मैनेजर की जिम्मेदारी सौंप दी है। कंग इससे पहले गुरुद्वारा माछीवाड़ा साहिब में प्रबंधक की जिमेदारी संभाल रहे थे।
कोरोना संकट के दौरान संगत की आमद गुरुद्वारा साहिबान में बहुत कम थी। इस दौरान एसजीपीसी जरूरतमंदों के लिए गुरुद्वारा साहिबान से लंगर तैयार कर संगत के लिए भेज रही थी। इस दौरान मैनेजर ने लंगर में तैयार होने वाली सब्जी के बिलों में लाखों का घोटाला किया। निलंबित मैनेजर ने अप्रैल, मई व जून के तीन महीनों में लाखों की सब्जी खरीद के फर्जी बिल अकाउंट विभाग में जमा करवाकर लाखों का घोटाला किया। इसमें दोषी पाए गए कर्मचारी भी शामिल थे।
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जब इस घोटाले के बारे में संगत के बिच चर्चा छिड़ी तब एसजीपीसी ने इंस्पेक्शन ब्रांच से जांच करवाई। रिपोर्ट के बाद डॉ. रूप सिंह ने इन पांचों कर्मचारियों को निलंबित करने की सिफारिश लौंगोवाल से की। बता दें कि सांसद व अकाली दल से बागी हुए सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी गुरुद्वारा साहिब में हो रहे घोटाले के बारे में बयान दिया था।
86 दिन में गोलक में जमा हुए एक लाख, फलों के बिल ढाई लाख
लॉकडाउन के दौरान तख्त केशगढ़ साहिब की गोलक में 86 दिन में केवल एक लाख रुपये की भेंट चढ़ी। मैनेजर ने साथियों के साथ मिलकर केवल फलों की खरीददारी का बिल ढाई लाख का जमा करवाकर राशि जारी करवाई। जानकारी के अनुसार एक अप्रैल से 24 जून तक, करीब तीन महीने में लंगर और स्टोर बिलों की जांच में यह गड़बड़ी मिली। निलंबित मैनेजर ने लंगर की सामग्री में भी हेराफेरी की थी। जांच टीम के अधिकारी इंस्पेक्टर गुलजार सिंह व उनकी टीम ने जब स्टोर के रिकॉर्ड की जांच की तो कई समान स्टॉक से कम मिले थे। गुलजार सिंह ने स्टोर कीपर को मौके पर ही 20 हजार का जुर्माना किया था।
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एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह ने इन कर्मचारियों को एक साथ निलंबित किए जाने की पुष्टि की है। डॉ. रूप सिंह के अनुसार उन्होंने जांच अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद दो दिन पहले ही लौंगोवाल को इनके विरुद्ध करवाई के लिए लिखा था। लौंगोवाल ने तख्त केशगढ़ का कार्य सुचारु ढंग से चलाने के लिए गुरदीप सिंह कंग को मैनेजर की जिम्मेदारी सौंप दी है। कंग इससे पहले गुरुद्वारा माछीवाड़ा साहिब में प्रबंधक की जिमेदारी संभाल रहे थे।
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कोरोना संकट के दौरान संगत की आमद गुरुद्वारा साहिबान में बहुत कम थी। इस दौरान एसजीपीसी जरूरतमंदों के लिए गुरुद्वारा साहिबान से लंगर तैयार कर संगत के लिए भेज रही थी। इस दौरान मैनेजर ने लंगर में तैयार होने वाली सब्जी के बिलों में लाखों का घोटाला किया। निलंबित मैनेजर ने अप्रैल, मई व जून के तीन महीनों में लाखों की सब्जी खरीद के फर्जी बिल अकाउंट विभाग में जमा करवाकर लाखों का घोटाला किया। इसमें दोषी पाए गए कर्मचारी भी शामिल थे।
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जब इस घोटाले के बारे में संगत के बिच चर्चा छिड़ी तब एसजीपीसी ने इंस्पेक्शन ब्रांच से जांच करवाई। रिपोर्ट के बाद डॉ. रूप सिंह ने इन पांचों कर्मचारियों को निलंबित करने की सिफारिश लौंगोवाल से की। बता दें कि सांसद व अकाली दल से बागी हुए सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी गुरुद्वारा साहिब में हो रहे घोटाले के बारे में बयान दिया था।
86 दिन में गोलक में जमा हुए एक लाख, फलों के बिल ढाई लाख
लॉकडाउन के दौरान तख्त केशगढ़ साहिब की गोलक में 86 दिन में केवल एक लाख रुपये की भेंट चढ़ी। मैनेजर ने साथियों के साथ मिलकर केवल फलों की खरीददारी का बिल ढाई लाख का जमा करवाकर राशि जारी करवाई। जानकारी के अनुसार एक अप्रैल से 24 जून तक, करीब तीन महीने में लंगर और स्टोर बिलों की जांच में यह गड़बड़ी मिली। निलंबित मैनेजर ने लंगर की सामग्री में भी हेराफेरी की थी। जांच टीम के अधिकारी इंस्पेक्टर गुलजार सिंह व उनकी टीम ने जब स्टोर के रिकॉर्ड की जांच की तो कई समान स्टॉक से कम मिले थे। गुलजार सिंह ने स्टोर कीपर को मौके पर ही 20 हजार का जुर्माना किया था।