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अमृतसर : हरियाणा गुरुद्वारा कमेटी एक्ट को रद्द करवाने के लिए एसजीपीसी ने निकाला विरोध मार्च
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मार्च निकालते एसजीपीसी पदाधिकारी और सदस्य। संवाद
- फोटो : AMRITSAR
अमृतसर। अलग हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अधिनियम को रद्द करने व सिख मामलों में पंथ विरोधी ताकतों के हस्तक्षेप के खिलाफ, एसजीपीसी ने श्री हरिमंदिर साहिब से अमृतसर के डीसी कार्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च आयोजित किया। प्रदर्शनकारी अकाली दल और एसजीपीसी के सदस्यों व पदाधिकारियों ने पीएम मोदी के नाम डीसी हरप्रीत सिंह सूडान को एक ज्ञापन सौंपा। विरोध मार्च का नेतृत्व शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी कर रहे थे। जबकि शिरोमणि कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में इस मार्च और प्रदर्शन में भाग लिया।
विरोध के दौरान सभी ने काली पगड़ियां पहनी थी, विरोध व्यक्त करने वाले काले झंडे और तख्तियां भी उठा रखी थी। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने डीसी की अनुपस्थिति में ज्ञापन अमृतसर के एडीसी को सौंपने से इंकार कर दिया, कहा कि जब तक डीसी मांग पत्र नहीं लेते, तब तक विरोध जारी रहेगा। इसके बाद शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी के नेतृत्व में सभी सदस्य धरने पर बैठ गए और सतनाम वाहेगुरु का जाप करने लगे।
धरना करीब 2 घंटे तक चलता रहा, जिसके बाद अमृतसर के डीसी हरप्रीत सिंह सूदन ने खुद आकर शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी से ज्ञापन लिया। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने संबोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा एक्ट 2014 को मान्यता दिए जाने से सिख जगत में भारी विरोध हो रहा है और यह फैसला शिरोमणि को तोड़ने वाला है। एसजीपीसी सिखों का प्रतिनिधि संस्थान है। उन्होंने कहा कि बड़े संघर्ष और बलिदान के बाद शिरोमणि कमेटी की स्थापना हुई है, जबकि सरकारों और सिख विरोधी ताकतों का ध्यान इसे तोड़ने पर है।
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सिख पंथ किसी भी कीमत पर शिरोमणि कमेटी को विभाजित करने की अनुमति नहीं देगा। सिख विरोधी ताकतें हमेशा सिख पंथ के मुद्दों को भ्रमित करने में लगी रहती है, जिसे रोकने में सरकार उचित भूमिका नहीं निभा रही है।
धामी ने कहा कि सिखों पर हो रहे अत्याचारों के कारण हम बार-बार विरोध करने को मजबूर हुए हैं। अगर सरकारें सिख संगठन शिरोमणि कमेटी की मांग पर विचार नहीं करती हैं तो भविष्य में संघर्ष का स्वरूप और भी तेज कर दिया जाएगा।
धामी ने कहा कि आरएसएस के हिंदू राष्ट्र एजेंडे के तहत इसके मुखिया मोहन भागवत भारत के हर निवासी को हिंदू कह रहे हैं, लेकिन सरकारें चुप हैं। सरकारें किसी एक दल की प्रतिनिधि नहीं होनी चाहिए, उन्हें देश में रहने वाले प्रत्येक राष्ट्र और विशेषकर अल्पसंख्यकों को महत्व देना चाहिए। हरियाणा कमेटी की स्थापना के संबंध में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के अनुसार सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 एक अंतरराज्यीय अधिनियम बन गया है, इसलिए इसमें कोई भी संशोधन केवल केंद्र सरकार द्वारा शिरोमणि कमेटी की सिफारिशों के साथ किया जा सकता है, लेकिन नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही सिख सत्ता को कमजोर करने की कोशिश करती रही है, लेकिन अब भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है और अल्पसंख्यक सिखों को दबाने के लिए कदम उठा रही है और इसमें आप भी पीछे नहीं है। धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी को तोड़ने के खिलाफ सिख पंथ ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। अगले कार्यक्रम के तहत सात अक्तूबर 2022 को तीन जगहों से पंथक विरोध मार्च निकाला जाएगा। तख्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो और गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब अंबाल
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विरोध के दौरान सभी ने काली पगड़ियां पहनी थी, विरोध व्यक्त करने वाले काले झंडे और तख्तियां भी उठा रखी थी। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने डीसी की अनुपस्थिति में ज्ञापन अमृतसर के एडीसी को सौंपने से इंकार कर दिया, कहा कि जब तक डीसी मांग पत्र नहीं लेते, तब तक विरोध जारी रहेगा। इसके बाद शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी के नेतृत्व में सभी सदस्य धरने पर बैठ गए और सतनाम वाहेगुरु का जाप करने लगे।
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धरना करीब 2 घंटे तक चलता रहा, जिसके बाद अमृतसर के डीसी हरप्रीत सिंह सूदन ने खुद आकर शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी से ज्ञापन लिया। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने संबोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा एक्ट 2014 को मान्यता दिए जाने से सिख जगत में भारी विरोध हो रहा है और यह फैसला शिरोमणि को तोड़ने वाला है। एसजीपीसी सिखों का प्रतिनिधि संस्थान है। उन्होंने कहा कि बड़े संघर्ष और बलिदान के बाद शिरोमणि कमेटी की स्थापना हुई है, जबकि सरकारों और सिख विरोधी ताकतों का ध्यान इसे तोड़ने पर है।
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सिख पंथ किसी भी कीमत पर शिरोमणि कमेटी को विभाजित करने की अनुमति नहीं देगा। सिख विरोधी ताकतें हमेशा सिख पंथ के मुद्दों को भ्रमित करने में लगी रहती है, जिसे रोकने में सरकार उचित भूमिका नहीं निभा रही है।
धामी ने कहा कि सिखों पर हो रहे अत्याचारों के कारण हम बार-बार विरोध करने को मजबूर हुए हैं। अगर सरकारें सिख संगठन शिरोमणि कमेटी की मांग पर विचार नहीं करती हैं तो भविष्य में संघर्ष का स्वरूप और भी तेज कर दिया जाएगा।
धामी ने कहा कि आरएसएस के हिंदू राष्ट्र एजेंडे के तहत इसके मुखिया मोहन भागवत भारत के हर निवासी को हिंदू कह रहे हैं, लेकिन सरकारें चुप हैं। सरकारें किसी एक दल की प्रतिनिधि नहीं होनी चाहिए, उन्हें देश में रहने वाले प्रत्येक राष्ट्र और विशेषकर अल्पसंख्यकों को महत्व देना चाहिए। हरियाणा कमेटी की स्थापना के संबंध में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के अनुसार सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 एक अंतरराज्यीय अधिनियम बन गया है, इसलिए इसमें कोई भी संशोधन केवल केंद्र सरकार द्वारा शिरोमणि कमेटी की सिफारिशों के साथ किया जा सकता है, लेकिन नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही सिख सत्ता को कमजोर करने की कोशिश करती रही है, लेकिन अब भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है और अल्पसंख्यक सिखों को दबाने के लिए कदम उठा रही है और इसमें आप भी पीछे नहीं है। धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी को तोड़ने के खिलाफ सिख पंथ ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। अगले कार्यक्रम के तहत सात अक्तूबर 2022 को तीन जगहों से पंथक विरोध मार्च निकाला जाएगा। तख्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो और गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब अंबाल