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हरियाणा चुनाव में लाभ के लिए डेरा सिरसा प्रमुख को दी गई पैरोल : ज्ञानी रघबीर सिंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने डेरा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को तीसरी बार 21 दिनों की पैरोल देने पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के आगामी विधानसभा चुनाव को मुख्य रखकर ही केंद्र सरकार की ओर से गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी गई है। उन्होंनेेे कहा कि केंद्र ने हरियाणा चुनाव में फायदा लेने के लिए ही राम रहीम को पैरोल पर रिहा किया है।
जत्थेदार ने कहा कि एक तरफ दुष्कर्म के मामले में दोषी राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जा रही है, जबकि बंदी सिखों की सजा पूरी होने के बावजूद केंद्र सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही है। सिखों से अन्याय एवं भेदभाव किया जा रहा है। बलवंत सिंह राजोआना की सजा पूरी होने के 12 साल के बाद भी केंद्र सरकार उनकी रिहाई के बारे कोई फैसला नहीं ले पाई है।
ज्ञानी रघबीर सिंह कहा कि सरकार को बंदी सिखों को तुरंत रिहा करना चाहिए। 15 अगस्त 1947 को देश के विभाजन के 78 साल हो जाने के बाद भी संसद में बंटवारे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि के लिए समारोह आयोजित नहीं किया जाता है, जबकि एसजीपीसी की ओर से हर साल विभाजन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के आम चुनाव किसी भी समय हो सकते हैं, लेकिन अफसोस वाली बात है कि सिख मतदाताओं के वोट बहुत ही कम बने हैं। सिखों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में एसजीपीसी के चुनावों के लिए अपना वोट बनवाना चाहिए।
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अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने डेरा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को तीसरी बार 21 दिनों की पैरोल देने पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के आगामी विधानसभा चुनाव को मुख्य रखकर ही केंद्र सरकार की ओर से गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी गई है। उन्होंनेेे कहा कि केंद्र ने हरियाणा चुनाव में फायदा लेने के लिए ही राम रहीम को पैरोल पर रिहा किया है।
जत्थेदार ने कहा कि एक तरफ दुष्कर्म के मामले में दोषी राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जा रही है, जबकि बंदी सिखों की सजा पूरी होने के बावजूद केंद्र सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही है। सिखों से अन्याय एवं भेदभाव किया जा रहा है। बलवंत सिंह राजोआना की सजा पूरी होने के 12 साल के बाद भी केंद्र सरकार उनकी रिहाई के बारे कोई फैसला नहीं ले पाई है।
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ज्ञानी रघबीर सिंह कहा कि सरकार को बंदी सिखों को तुरंत रिहा करना चाहिए। 15 अगस्त 1947 को देश के विभाजन के 78 साल हो जाने के बाद भी संसद में बंटवारे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि के लिए समारोह आयोजित नहीं किया जाता है, जबकि एसजीपीसी की ओर से हर साल विभाजन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के आम चुनाव किसी भी समय हो सकते हैं, लेकिन अफसोस वाली बात है कि सिख मतदाताओं के वोट बहुत ही कम बने हैं। सिखों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में एसजीपीसी के चुनावों के लिए अपना वोट बनवाना चाहिए।
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