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शहीद भगत सिंह स्टेट टेक्निकल कैंपस अपनाएगा सीचेवाल मॉडल
ब्यूरो, अमर उजाला/अमृतसर
Updated Thu, 07 Apr 2016 10:11 PM IST
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सुल्तानपुर लोधी में संत सीचेवाल की ओर से तैयार किए गए देसी ट्रीटमेंट प्लांट का अवलोकन करते अधिकारी।
- फोटो : amarujala
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नमामि गंगे के बाद अब सीचेवाल मॉडल को फिरोजपुर का शहीद भगत सिंह स्टेट टेक्निकल कैंपस अपनाने जा रहा है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल की देसी तकनीक को कैंपस में अपनाकर 100 एकड़ भूमि की सिंचाई करने की योजना है। इस तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए डायरेक्टर डॉ. टीएस सिद्धू के नेतृत्व में टीम ने पवित्र काली बेईं का दौरा किया है।
डायरेक्टर डॉ. सिद्धू ने पवित्र बेईं का अवलोकन करने के बाद बताया कि उनका कैंपस 100 एकड़ भूमि में है। वहां के गंदे पानी को संशोधित करके वह खेती के इस्तेमाल में लाना चाहते हैं। इस मकसद की पूर्ति के लिए वह संत सीचेवाल की ओर से इस क्षेत्र में किए गए कार्यों को देखने के लिए आए हैं।
उन्होंने बताया कि कैंपस में ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए सरकार ने दो करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया है, लेकिन इस प्लांट को लगातार चालू हालत रखना काफी खर्चीला है। सरकार की ओर से बनाए गए दो करोड़ के बजट के स्थान पर संत सीचवेाल ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनके देसी तकनीक वाला प्रोजेक्ट महज 15 से 20 लाख रुपये में तैयार हो जाएगा और इसे चलाने का खर्चा भी कम आएगा।
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डॉ. सिद्धू ने कहा कि संत सीचेवाल ने सादे ढंग से गंदे पानी को संशोधित करके खेती के इस्तेमाल में लाने का जो तरीका ईजाद किया है, इससे पंजाब के किसान आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकते हैं। इस दौरान संत सीचेवाल ने जब काली बेईं का टीडीएस चेक करके दिखाया तो वह 345 पाया गया।
यह देखकर डॉ. सिद्धू बोले कि मालवा के गांवों का टीडीएस तो 1000 से भी ऊपर है। फिरोजपुर से आई टीम को संत सीचेवाल काली बेईं का दौरा करवाने के अलावा देसी रूढ़ी छानने वाली मशीन की कार्यशैली भी दिखाई। इस मौके पर डॉ. एके त्यागी, प्रो. गलजप्रीत सिंह, प्रो. जपाल सिंह, प्रो. बोहड़ सिंह, प्रो. गुरप्रीत सिंह और प्रो. गुरमीत सिंह मौजूद थे।
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डायरेक्टर डॉ. सिद्धू ने पवित्र बेईं का अवलोकन करने के बाद बताया कि उनका कैंपस 100 एकड़ भूमि में है। वहां के गंदे पानी को संशोधित करके वह खेती के इस्तेमाल में लाना चाहते हैं। इस मकसद की पूर्ति के लिए वह संत सीचेवाल की ओर से इस क्षेत्र में किए गए कार्यों को देखने के लिए आए हैं।
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उन्होंने बताया कि कैंपस में ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए सरकार ने दो करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया है, लेकिन इस प्लांट को लगातार चालू हालत रखना काफी खर्चीला है। सरकार की ओर से बनाए गए दो करोड़ के बजट के स्थान पर संत सीचवेाल ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनके देसी तकनीक वाला प्रोजेक्ट महज 15 से 20 लाख रुपये में तैयार हो जाएगा और इसे चलाने का खर्चा भी कम आएगा।
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डॉ. सिद्धू ने कहा कि संत सीचेवाल ने सादे ढंग से गंदे पानी को संशोधित करके खेती के इस्तेमाल में लाने का जो तरीका ईजाद किया है, इससे पंजाब के किसान आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकते हैं। इस दौरान संत सीचेवाल ने जब काली बेईं का टीडीएस चेक करके दिखाया तो वह 345 पाया गया।
यह देखकर डॉ. सिद्धू बोले कि मालवा के गांवों का टीडीएस तो 1000 से भी ऊपर है। फिरोजपुर से आई टीम को संत सीचेवाल काली बेईं का दौरा करवाने के अलावा देसी रूढ़ी छानने वाली मशीन की कार्यशैली भी दिखाई। इस मौके पर डॉ. एके त्यागी, प्रो. गलजप्रीत सिंह, प्रो. जपाल सिंह, प्रो. बोहड़ सिंह, प्रो. गुरप्रीत सिंह और प्रो. गुरमीत सिंह मौजूद थे।