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Amritsar: उग्रवाद के दौर में छह आतंकियों को किया था ढेर, अब ये ASI अपने विभाग की अनदेखी से ही नाराज

Fri, 21 Jul 2023 12:02 PM IST
निवेदिता वर्मा रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 21 Jul 2023 12:02 PM IST
सार

एएसआई रसबीर सिंह ने बताया कि उनका गांव पंजवड़ झब्बाल थाने में आता है। साल 1988-1989 में जब पंजाब में आतंकवाद का पूरा जोर था, तो वहां पुलिस चौकी बनाई गई जो साल 1993 में वहां से हटा ली गई। उनके पिता पंजाब पुलिस में थे, तो वह भी 1989 में बतौर एसपीओ भर्ती हो गया। तब उसने आतंकियों से लोहा लिया था।

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Punjab Police ASI who fought against terrorists during terrorism angry with system
एएसआई रसबीर सिंह। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब पुलिस का एक ऐसा जांबाज सिपाही, जिसने आतंकवाद के दौरान खतरनाक आंतकियों से लोहा लिया और अपने परिवार के सदस्यों को भी खोया, अब नाराज है। आतंकियों को मारने की एवज में तत्कालीन अधिकारियों ने इसे कई सुविधाएं देने का वादा किया था। लेकिन ये वादे पूरे नहीं हुए और 35 साल बाद भी ये सिपाही रेगुलर एएसआई नहीं बन सका है। ये कहानी है अमृतसर कमिश्नरेट के ट्रैफिक विंग में तैनात एएसआई रसबीर सिंह की। 

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आंतकियों के गढ़ कहे जाने वाले तरनतान के गांव पंजवड़ में पुलिस की ड्यूटी के दौरान कई बार आतंकियों ने रसबीर सिंह को मारने की कोशिश की लेकिन उसने इलाके के छह इनामी खतरनाक आतंकियों को मार डाला। तब विभाग के अधिकारियों ने इसकी खूब तारीफ भी की और मारे गए आतंकियों पर ईनाम की राशि देने समेत कई अन्य सुविधाएं देने के बड़े-बड़े वादे किए। मगर आज हालात यह हैं कि पुलिस का यह जांबाज सिपाही करीब 35 साल की सेवाएं देने के बाद भी रेगुलर एएसआई नहीं बन सका। वे आज अपने बच्चों के भविष्य के लिए अधिकारियों के सामने गुहार लगाते रहते हैं। 
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1989 में बतौर एसपीओ भर्ती हुए थे रसबीर सिंह
एएसआई रसबीर सिंह ने बताया कि उनका गांव पंजवड़ झब्बाल थाने में आता है। साल 1988-1989 में जब पंजाब में आतंकवाद का पूरा जोर था, तो वहां पुलिस चौकी बनाई गई जो साल 1993 में वहां से हटा ली गई। उनके पिता पंजाब पुलिस में थे, तो वह भी 1989 में बतौर एसपीओ भर्ती हो गया। उन्होंने गांव की ही पुलिस चौकी में पूरी ईमानदारी से ड्यूटी की। तब आतंकियों ने पंजवड़ में उन्हें मारने के लिए कई बार हमले किए। उन्होंने बहादुरी से मुकाबला किया और छह बड़े इनामी आंतकियों को मार डाला।

एएसआई रसबीर सिंह ने बताया कि तब अधिकारियों ने उसके साथ बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी आज तक न तो उसे किसी ईनाम की राशि ही मिली और न ही विभाग में कोई एक्स्ट्रा पदोन्नति ही उसे दी गई। उसने बताया कि वह विभाग में 35 साल की सेवाएं देने के बाद भी रेगुलर थानेदार नहीं बन सका। अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह कई बार आला अधिकारियों से मिला, ताकि बच्चों को पंजाब पुलिस में भर्ती करवा सके, लेकिन उसे कोई भी पॉजिटिव रिस्पांस ही मिला।
 

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