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National Sports Day: पूर्व खिलाड़ियों की शिकायत, पंजाब सरकार में खेलों के प्रति दूरदृष्टि की कमी

Mon, 29 Aug 2022 01:26 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 29 Aug 2022 01:26 PM IST
सार

अर्जुन अवार्डी और महाराजा रंजीत सिंह अवार्ड विजेता पूर्व ओलंपियन व सेवामुक्त ब्रिगेडियर हरचरण सिंह कहते हैं कि पंजाब सरकार की खेल नीति भी एडहॉक शिक्षकों की तरह ही चलती है। जबकि इसके लिए लगातार पॉलिसी होनी चाहिए।

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Punjab government lacks vision towards sports, Complains Former players
स्पोर्टस - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब सरकार हर साल खेल दिवस धूमधाम से मनाती है। इस पर हर साल करोड़ों रुपये भी खर्च किए जाते हैं। लेकिन न तो सरकार का खेलों के प्रति गंभीर दृष्टिकोण रहा और न ही खेलों को प्रमोट करने के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित ही किया जाता है। दूसरी तरफ पंजाब के बाद अस्तित्व में आया प्रदेश हरियाणा आज कहीं आगे निकल चुका है।

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इसका बड़ा कारण जहां स्पष्ट खेल नीतियां हैं, वहीं खिलाड़ियों को निचले स्तर से ऊपर तक ले जाने के लिए ढांचागत मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का होना है। आज पंजाब के स्कूलों के हालात यह हैं कि न तो इनमें डीपीआई हैं और न ही खिलाड़ियों के लिए कोच की ही व्यवस्था है। यह बात पूर्व ओलंपियन व सेवामुक्त ब्रिगेडियर हरचरण सिंह तथा पूर्व ओलंपियन बलविंदर सिंह शम्मी ने स्पोर्ट्स दिवस की पूर्व संध्या पर कही। 
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साल 1988 में सियोल में आयोजित 24वें ओलंपिक और इससे पहले सियोल में ही 1986 में एशियन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके बलविंदर सिंह शम्मी मानते हैं कि पंजाब से बहुत बाद अस्तित्व में आया हरियाणा आज खेलों में बहुत आगे निकल चुका है। राष्ट्रीय हाकी टीम में 80 फीसदी योगदान पंजाब का रहता है, लेकिन इस खेल को प्रमोट करने के प्रयास भी पंजाब सरकार के लगभग नहीं के बराबर हैं। पंजाब सरकार ने 5-6 साल पहले हॉकी को प्रमोट करने के लिए लुधियाना में पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (पीआईएस) शुरू किया। हर साल यहां लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन आजतक इसका नतीजा शून्य रहा है। उन्होंने इस इंस्टीट्यूट को लुधियाना से अमृतसर में शिफ्ट करने का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि हाल में अमृतसर जिला के तीन हाकी खिलाड़ी ओलंपिक खेल कर आए हैं।  
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अर्जुन अवार्डी और महाराजा रंजीत सिंह अवार्ड विजेता पूर्व ओलंपियन व सेवामुक्त ब्रिगेडियर हरचरण सिंह कहते हैं कि पंजाब सरकार की खेल नीति भी एडहॉक शिक्षकों की तरह ही चलती है। जबकि इसके लिए लगातार पॉलिसी होनी चाहिए। तीन बार हॉकी वर्ल्ड कप 1971 (बारिसोलोना), 1973 (एमस्टर्डम) और 1975 (क्वालालांपुर) और दो बार हॉकी ओलंपिक 1972 (म्युनिक) जर्मनी तथा 1976 मोंटरियल (कनाडा) में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके ब्रिगेडियर ने कहा कि पंजाब सरकार को स्कूल स्तर पर ही इसके लिए पॉलिसी बना कर खिलाड़ी तैयार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर देना चाहिए। हरियाणा सरकार तो अपने खिलाड़ियों को नेशनल मुकाबलों में गोल्ड, सिल्वर या ब्रांड मेडल लाने पर क्रमश: 5 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपये देती है। मगर पंजाब में तो कई बार खिलाड़ियों को खेलों में शामिल होने के बाद सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए ही मशक्कत करनी पड़ती है।


एशियन खेलों में देश के नाम गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल कर चुके ब्रिगेडियर सिंह और बलविंदर शम्मी ने बताया कि आज से 40 साल पहले पंजाब के स्कूलों में डीपीआई (ड्रिल प्रेक्टिस इंस्ट्रक्टर) और अलग-अलग खेलों के लिए कोच होते थे। लेकिन आज पंजाब के किसी भी स्कूल में न तो डीपीआई है और न ही कोच। हमारे खिलाड़ियों को तो विश्व के खिलाड़ियों से मुकाबला करना है मगर आज हमारे खिलाड़ी हरियाणा के खिलाड़ियों से ही मुकाबला नहीं कर पा रहे। सरकार की नीतियों के चलते पंजाब के कई नामी खिलाड़ी हरियाणा के लिए खेल रहे हैं। जबकि पंजाब सरकार खेलों को प्रमोट करने के लिए सिर्फ बातें ही करती है और जमीनी स्तर पर इसकी कोई स्पष्ट नीति कभी नहीं बनाई गई। 

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