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कांग्रेस में कलह बाकी: पंजाब में अब मंत्री आमने-सामने, रंधावा बोले- सिद्धू को प्रदेशाध्यक्ष न मनाने वाले कर रहे अनुशासनहीनता
Wed, 21 Jul 2021 09:54 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 21 Jul 2021 09:54 PM IST
सार
पंजाब कांग्रेस में कलह अभी जारी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मतभेद खत्म होने से पहले दो मंत्री आमने-सामने हैं। कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने खुलकर कैप्टन अमरिंदर सिंह का समर्थन किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जब तक सिद्धू कैप्टन से मतभेद खत्म नहीं कर लेत हैं, तब तक मैं उनसे मुलाकात नहीं करूंगा। इस बयान पर अब जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पलटवार किया है। उन्होंने इसे अनुशासनहीनता बता दिया।
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ब्रह्म मोहिंद्रा, सुखजिंदर सिंह रंधावा।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार अमृतसर पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू ने चुप्पी साध रखी और उनके सुरक्षा गार्ड ने मीडिया कर्मियों को सिद्धू के पास फटकने नहीं दिया। हालांकि इस दौरान पंजाब के सहकारिता और जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा के बहाने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा।
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रंधावा ने कहा कि सिद्धू को हाईकमान ने पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी है। जो लोग यह नहीं मान रहे, वे सीधे-सीधे पार्टी में अनुशासनहीनता कर रहे हैं। रंधावा ने कहा कि जब वर्ष 2016 में ब्रह्म मोहिंद्रा और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच मनमुटाव था तो एक पुल के तौर पर काम कर दोनों के बीच मतभेद खत्म किया। आज वही मोहिंद्रा कह रहे हैं कि जब तक सिद्धू और कैप्टन के मनमुटाव खत्म नहीं हो जाते, वे सिद्धू से नहीं मिलेंगे। यह पूरी तरह से गलत है और पार्टी में अनुशासनहीनता है।
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रंधावा ने जानकारी दी कि नवजोत सिंह सिद्धू ने ब्रह्म मोहिंद्रा को फोन किया। इस दौरान मोहिंद्रा ने तबीयत ठीक न होने की बात कही। तबीयत ठीक होने पर तीन-चार दिनों बाद मिलेंगे। कैप्टन पर पूछे गए सवाल पर रंधावा ने कहा कि कैप्टन ने अगर हाईकमान के आदेशों को ही चुनौती देनी थी तो वे सोनिया और हरीश रावत को पहले स्पष्ट कर देते। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी ने सिद्धू को जिम्मेदारी दी है तो हम सभी को उनके साथ मिलकर चलना चाहिए। इस समय पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की सबसे बड़ी जरूरत है।
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नवजोत सिंह सिद्धू ने श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका
नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार दोपहर श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने पहुंचे। उनके साथ पंजाब के चार कैबिनेट मंत्रियों के अलावा 58 अन्य विधायक भी मौजूद रहे। सिद्धू दोपहर करीब 1.40 बजे श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे।
जहां पहले से मौजूद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। परिक्रमा करने के बाद वे मंत्रियों और कुछ विधायकों के साथ सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने पहुंचे। जहां उन्होंने वाहेगुरु के सामने माथा टेका और सरबत के भले की अरदास की। वे श्री दरबार साहिब में करीब डेढ़ घंटा रहे और उसके बाद श्री दुर्ग्याणा मंदिर में माथा टेकने पहुंचे।
सिद्धू के विरोध करने पर अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज
नवांशहर में प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू का मंगलवार को किसानों द्वारा किए गए विरोध के मामले में बंगा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रधान बनने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू पहली बार खटकड़कलां आए थे तथा वहां पहुंचने से पहले किसानों द्वारा सिद्धू के विरोध का कार्यक्रम बनाया था। सिद्धू के खटकड़कलां से जाने के बाद किसानों द्वारा मुख्य मार्ग पर जाम लगाया गया था। किसानों का कहना था कि जिला प्रशासन द्वारा उन्हें सिद्धू के सामने अपनी बात रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उन्हें धोखे में नजरबंद करके रखा गया। इस मामले में बंगा सदर थाना इंचार्ज सब इंस्पेक्टर नरेश कुमारी के बयानों पर दर्ज किए गए मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रोड जाम करने के तहत नेशनल हाईवे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
इस मामले में किसान नेता हरमेश ढेसी, सुरिंदर बैंस व अमरजीत सिंह ने कहा कि किसानों ने जब पहले ही राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम तब तक न करने को कहा है, जब तक किसानों का मामला हल नहीं हो जाता। ऐसे में राजनीतिक दल जानबूझकर किसानों को उग्र करने को मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को किसी भी किसान ने किसी तरह का कानून नहीं तोड़ा तथा वहां पर अपनी बात ही करने गए थे।
इस मामले में किसान नेता हरमेश ढेसी, सुरिंदर बैंस व अमरजीत सिंह ने कहा कि किसानों ने जब पहले ही राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम तब तक न करने को कहा है, जब तक किसानों का मामला हल नहीं हो जाता। ऐसे में राजनीतिक दल जानबूझकर किसानों को उग्र करने को मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को किसी भी किसान ने किसी तरह का कानून नहीं तोड़ा तथा वहां पर अपनी बात ही करने गए थे।