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बेदर्द पाकिस्तान: अपने ही लोगों को अपनाने से इनकार, इस कदम के बाद बढ़ी नागरिकों की दिक्कत; अब आगे क्या

Fri, 02 May 2025 09:29 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 May 2025 09:29 AM IST
सार

पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश दिया था। हालांकि इसकी समयसीमा 30 अप्रैल की थी। पाकिस्तानी नागरिक घंटों इंतजार करते रहे लेकिन पाकिस्तानी रेंजर्स ने दरवाजे नहीं खोले।

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Pakistan refused to take its own citizens
अटारी बाॅर्डर पर गेट खुलने का इंतजार करते बच्चे। - फोटो : संवाद

विस्तार

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव के चलते वीरवार को पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों को लेने से मना कर दिया और गेट नहीं खोले। 
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हालांकि भारत सरकार की ओर से पाकिस्तानी नागरिकों को वापिस भेजने के दी गई डेड लाइन 30 अप्रैल को समाप्त हो गई है। फिर भी कहा जा रहा था कि पाकिस्तान अगर गेट खोलता तो नागरिकों को भेजा जा सकता था। ऐसे में वीरवार देर शाम तक लोगों को बार्डर पर रोके रखा गया। पाकिस्तानी नागरिक अटारी बार्डर पर पहुंचे और घंटों इंतजार करते रहे। लेकिन जब पाकिस्तानी रेंजर्स की ओर से गेट न खोलने व लोगों को लेने से मना कर दिया तो शाम को सभी लोग वापस लौट गए। 

यह भी पढ़ें: हेराफेरी: जिस हवाई पट्टी से पाकिस्तान को खदेड़ा गया, उसी को बेच डाला; हाईकोर्ट ने कहा-विजिलेंस जांच करेगी
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इतना ही नहीं पाकिस्तानी की तरफ से गेट न खोले जाने के चलते भारतीय नागरिक भी सीमा के इस पार नहीं आ सके और दोनों तरफ से लोग फंस गए। पाकिस्तानी नागरिकों की ओर से लगातार गुहार लगाई जाती रही कि उन्हें अपने देश वापिस आने दिया जाए। इसी बीच दोनों तरफ फंसे लोगों के मन में डर का माहौल बन गया।
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पाकिस्तानी पासपोर्ट न होने के कारण महिलाओं को रोका और बच्चों को भेज दिया  

अपनी बीमार मां का हाल जानने के लिए बच्चों के साथ पाकिस्तान से भारत आई दो बहनों नबीला और शरमीन को वापस नहीं जाने दिया गया। जबकि उनके बच्चों को बुधवार को ही बार्डर क्रास करवा दिया था। 

नबीला और शरमीन ने बताया कि उनका विवाह कुछ साल पहले पाकिस्तान में हुआ था। वह दोनों 45 दिन के वीजा लेकर भारत आई थी। ताकि अपनी बीमार मां से मिल सकें। लेकिन अब जब उन्हें वापस लौटना है, भारतीय पासपोर्ट होने के चलते जाने नहीं दिया जा रहा है। जबकि उनके बच्चे भी साथ आए थे। उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट थे। उन्हें भेज दिया गया है।

हरिद्वार स्नान करने आए राजेश को परिवार सहित रोका  

तीस दिन के वीजा पर भारत आए राजेश कुमार ने बताया कि वह अपने परिवार के 16 सदस्यों के साथ हरिद्वार स्नान के लिए आए थे। तनाव बढ़ने की सूचना मिली तो 30 अप्रैल शाम को वह लोग अटारी पहुंच गए। लेकिन देरी होने के कारण उन्हें बार्डर क्रास नहीं करवाया गया। आज वीरवार को जब वह पाकिस्तान जाने के लिए पहुंचे तो बीएसएफ ने रोक दिया। उनका यहां पर कोई ठिकाना भी नहीं है। जहां पर वह दिन व्यतीत कर सके। 

मां का इंतजार करती रही फातिमा 

बुधवार को लाहौर से भारत आई 15 साल की फातिमा वीरवार को भी अटारी बार्डर पर अपनी मां के वापिस आने का इंतजार करती रही। फातिमा ने बताया कि वह अपनी बहन व मां के साथ भारत से लाहौर गई थी। दोनों देशों के लोगों को जब डिपोर्ट किया जाने लगा तो फातिमा व उसकी बहन को अटारी सीमा पर भेज दिया गया, लेकिन मां का वीजा समाप्त होने के कारण रोक लिया गया। अटारी सीमा पर फातिमा व उसकी बहन को रिसीव करने पहुंचे पिता की आंखें नम थीं। फातिमा ने बताया कि पापा के पास आकर अच्छा लग रहा है, पर मम्मा को छोड़कर आई हूं यह बहुत ही दुखदायी है। उसका निवेदन है कि सरकार उनकी मां को वापिस लाने के लिए प्रयास करे।

बच्चों सहित अटारी बार्डर पर बैठी रही रजिया 

वहीं कराची से भारत बच्चों के साथ आई रजिया वीरवार को पूरा दिन वापिस जाने के इंतजार में बैठी रही। उसने बताया कि वह कुछ दिन पहले भारत अपने रिश्तेदार के पास आई थी। आज वह वापिस जाने के लिए बार्डर पर पहुंची तो उसे रोक दिया गया। वापिस न जा पाने के कारण बहुत ही दुख हो रहा है। इसलिए उनका निवेदन है कि जो लोग पाकिस्तान में रह गए है। उन्हें भी वापिस भेज दिया जाए।
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