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गुरदासपुर: नवां पिंड सरदारां बना बेस्ट टूरिज्म विलेज ऑफ इंडिया 2023, विश्व पर्यटन दिवस पर मिला अवार्ड
Wed, 27 Sep 2023 10:32 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)
Updated Wed, 27 Sep 2023 10:32 PM IST
सार
नवां पिंड सरदारां गांव के लोगों ने पर्यटन विभाग, पंजाब के तालमेल और मार्गदर्शन के साथ पुरखों की विरासती हवेलियों की देखभाल की और लगातार प्रयासों के स्वरूप इनको टूरिज्म के मशहूर स्थानों के तौर पर विकसित किया है। यहां पर भारत के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानी आते हैं।
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गुरदासपुर का गांव नवां पिंड सरदारां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
पंजाब के गुरदासपुर जिले के गांव नवां पिंड सरदारां को बेस्ट टूरिज्म विलेज ऑफ इंडिया 2023 अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवार्ड विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में करवाए गए लॉन्च ऑफ ग्लोबल ट्रैवल फॉर लाइफ समागम में दिया गया। इस गांव ने पंजाब की संस्कृति और विरासत को संभालने और विरासती पर्यटन को विकसित कर एक बेमिसाल कदम उठाया है।
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गांव ने अपना नाम इस अवॉर्ड के लिए समूचे भारत में से चुने गए 35 गांवों में दर्ज करवाया है। भारत के टूरिज्म क्षेत्र के उत्तम गांव की मान्यता के लिए मुकाबले में कुल 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 750 गांवों द्वारा आवेदन किया गया था। यह अवॉर्ड टूरिज्म और सभ्याचार मामले विभाग कीं प्रमुख सचिव राखी गुप्ता भंडारी, डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर डॉ. हिमांशु अग्रवाल, गांव के प्रतिनिधि सतवंत संघा, मैनेजर आंकड़े और प्रोजेक्ट्स, पर्यटन विभाग, पंजाब शीतल बहल ने केंद्रीय पर्यटन विभाग के सचिव वी. विद्यावति एवं अतिरिक्त सचिव राकेश वर्मा से हासिल किया।
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यह है गांव की खूबियां
विभाग की सचिव ने बताया कि गांवों का चयन संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संस्था (यूएनडब्ल्यूटीओ) के अलग-अलग पैमानों पर आधारित था। जिनमें सभ्याचार और प्राकृतिक संसाधन, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण स्थिरता के अलावा टूरिज्म के विकास एवं मूल श्रृंखला एकीकरण और अन्य पहलु शामिल थे। उन्होंने बताया कि गांव वासियों ने पर्यटन विभाग, पंजाब के तालमेल और मार्गदर्शन के साथ पुरखों की विरासती हवेलियों की देखभाल की और लगातार प्रयासों के स्वरूप इनको टूरिज्म के मशहूर स्थानों के तौर पर विकसित किया है। यहां पर भारत के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानी आते हैं। ब्रिटिश राज के समय की इन विरासती हवेलियों में एक का नाम ‘दा कोठी’ और दूसरी का नाम ‘पिप्पल हवेली’ है।
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