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समानता के नाम पर अल्पसंख्यकों व अनुसूचित वर्ग के साथ किया जा रहा है भेदभाव:जत्थेदार

Sun, 15 Nov 2020 09:59 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Sun, 15 Nov 2020 09:59 PM IST
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Jathedar says, minorities are being discriminated against in the name of equality in the country
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश से पूर्व व बाद का एतिहासिक काल विशेष महत्व रखता है। बंदीछोड़ दिवस पर इतिहास के इस कालखंड की समीक्षा करना हर सिख के लिए महत्वपूर्ण है। श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश से पहले सिकंदर सहित अन्य छोटे-बड़े हमलावर भारत की सीमाओं को लांघकर हमला करते और लूटमार कर अपने देश लौट जाते। विदेशी ताकतों के हमले सदियों तक होते रहे। इनका विरोध करने वाली सभी शक्तियां विभाजित, ईर्ष्या सेे ग्रसित व कमजोर थीं। इन ताकतों ने समाज को धार्मिक कर्मकांड, पाखंड, जात-पात व रीति रिवाजों में बांटकर गुलामी व बरबादी की तरफ धकेल दिया।
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जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह बंदीछोड़ दिवस के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब से सिख कौम के नाम संदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय के इतिहास की समीक्षा जज्बातों से हटकर बुद्धि से करने की जरूरत है। सिख लहर ने भारत को महान नायक दिए। उनकी नीतियों ने ही इस क्षेत्र के लोगों को आजादी का एहसास करवाया।
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देश में समानता के नाम पर अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों व आदिवासियों सहित हर वर्ग से भेदभाव हो रहा है। कमजोर की आवाज को सियासी ताकत से दबाने की साजिशें रची जा रही हैं, काले कानून थोपकर बुद्धिजीवियों व आम नागरिकों को जेलों में बंद किया जा रहा है। ऐसे में हर सिख विशेष कर सिख नौजवान को अपनी जिमेदारी का अहसास होना चाहिए।
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किसानों के आंदोलन की धार बने खालसा पंथ
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गिरफ्तार सिखों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 35 वर्षों से देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। 2020 का बंदीछोड़ दिवस उस समय मनाया जा रहा है, जब देश का किसान व उसका परिवार अपने अधिकारों के लिए सड़कों व रेल ट्रैक पर बैठा है। किसानों की जमीन को छीनकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सौंपने कि साजिश रची जा रही है। खालसा पंथ किसानों, मजदूरों व अन्य शोषित समाज को केवल यह विश्वास दिलाने तक सीमित न रहे कि उनके पीछे पंथ की ताकत है, बल्कि इस आंदोलन की धार बनकर इस लड़ाई को लड़ने के लिए आगे आए।
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