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लापता पावन स्वरूपों की जांच रिपोर्ट नकली नहीं : तेलंगाना
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अमृतसर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लापता 328 पावन स्वरूपों के मामले की जांच कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट ईशर सिंह तेलंगाना ने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व अध्यक्ष भाई रणजीत सिंह पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि रणजीत सिंह उनका नाम लेकर संगत को गुमराह कर रहे हैं। संगत उनके बयान से सावधान रहे।
एडवोकेट तेलंगाना ने जारी वीडियो संदेश में कहा कि भाई रणजीत सिंह का यह कहना कि एसजीपीसी ने नकली जांच रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है वह सरासर झूठ है। जांच रिपोर्ट की कोई नकली कॉपी नहीं है। एक कॉपी उनके पास है। इस रिपोर्ट के हर पन्ने पर उनके व जांच कमेटी के अन्य दो सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। जांच रिपोर्ट की दो कॉपी जो श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी गई थी उसके अंतिम पन्ने पर सभी जांच अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
तेलंगाना ने आरोप लगाया कि जब भाई रणजीत सिंह सिखों की सर्वोच्च अदालत की सेवा निभा रहे थे तब उनकी बाणी ऊंचे पद की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं थी। अब भी उन्होंने झूठ बोलते हुए संगत को गुमराह करते हुए कहा था कि 125 पावन स्वरूप जिनकी जिल्दसाजी हो चुकी थी, उनकी बेअदबी हुई है। ऐसा कुछ भी नहीं था। जांच में यह तथ्य सामने आए कि अतिरिक्त अंगों से बिना जिल्दसाजी के पावन स्वरूप तैयार किए गए थे। भाई रणजीत सिंह कह रहे हैं कि रिपोर्ट में बादल परिवार का नाम शामिल है। सच यह है कि जब उन्होंने पंजाब मानव अधिकारी संगठन (जस्टिस एएस बैंस) के पदाधिकारी सरबजीत सिंह वेरका व अजित सिंह बैंस के बेटे से चंडीगढ़ जाकर पूछा था कि यदि उनके पास बेअदबी मामले के बारे में बादल परिवार के बारे में कोई सबूत है तो वह जांच कमेटी के समक्ष रखें। तब उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि उनके पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं। बिना तथ्यों के किसी को भी जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जा सकता।
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एडवोकेट तेलंगाना ने कहा कि भाई रणजीत सिंह का यह कहना है कि वह जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के सहपाठी रहे हैं, झूठ है। उनकी आयु जत्थेदार से काफी ज्यादा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य उनके समक्ष आए हैं। उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।
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एडवोकेट तेलंगाना ने जारी वीडियो संदेश में कहा कि भाई रणजीत सिंह का यह कहना कि एसजीपीसी ने नकली जांच रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है वह सरासर झूठ है। जांच रिपोर्ट की कोई नकली कॉपी नहीं है। एक कॉपी उनके पास है। इस रिपोर्ट के हर पन्ने पर उनके व जांच कमेटी के अन्य दो सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। जांच रिपोर्ट की दो कॉपी जो श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी गई थी उसके अंतिम पन्ने पर सभी जांच अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
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तेलंगाना ने आरोप लगाया कि जब भाई रणजीत सिंह सिखों की सर्वोच्च अदालत की सेवा निभा रहे थे तब उनकी बाणी ऊंचे पद की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं थी। अब भी उन्होंने झूठ बोलते हुए संगत को गुमराह करते हुए कहा था कि 125 पावन स्वरूप जिनकी जिल्दसाजी हो चुकी थी, उनकी बेअदबी हुई है। ऐसा कुछ भी नहीं था। जांच में यह तथ्य सामने आए कि अतिरिक्त अंगों से बिना जिल्दसाजी के पावन स्वरूप तैयार किए गए थे। भाई रणजीत सिंह कह रहे हैं कि रिपोर्ट में बादल परिवार का नाम शामिल है। सच यह है कि जब उन्होंने पंजाब मानव अधिकारी संगठन (जस्टिस एएस बैंस) के पदाधिकारी सरबजीत सिंह वेरका व अजित सिंह बैंस के बेटे से चंडीगढ़ जाकर पूछा था कि यदि उनके पास बेअदबी मामले के बारे में बादल परिवार के बारे में कोई सबूत है तो वह जांच कमेटी के समक्ष रखें। तब उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि उनके पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं। बिना तथ्यों के किसी को भी जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जा सकता।
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एडवोकेट तेलंगाना ने कहा कि भाई रणजीत सिंह का यह कहना है कि वह जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के सहपाठी रहे हैं, झूठ है। उनकी आयु जत्थेदार से काफी ज्यादा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य उनके समक्ष आए हैं। उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।