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लापता 267 पावन स्वरूपों की जांच शुरू, एसजीपीसी ने सौंपा तीन गठरी में बंधा रिकॉर्ड
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एतिहासिक गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से लापता हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 267 पावन स्वरूपों की जांच के लिए नियुक्त पंजाब-हरियाणा की जज (सेवानिवृत्त) नविता सिंह की गैर हाजिरी में बुधवार को सुबह मामले की जांच सहयोगी वकील ईशर सिंह तेलंगाना के जरिये शुरू कर दी।
वकील ईशर सिंह ने जांच शुरू करने से पहले गुरुद्वारा रामसर साहिब में लापता पावन स्वरूपों के सील किए रिकॉर्ड को देखा। गुरुद्वारा साहिबान में स्थापित गोल्डन प्रेस जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को प्रकाशित किया जाता है, वहां के कर्मचारियों से पूछताछ की। एसजीपीसी ने कपड़े की तीन गांठों में बंधा रिकॉर्ड भी जांच कमेटी के सहायक को सौंपा। जांच कमेटी के आदेश के बाद इस रिकॉर्ड को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के सचिवालय में रख दिया गया। कमेटी इसी सचिवालय में बैठकर जांच पूरी करेगी। इस अवसर पर जत्थेदार के निजी सहायक जसपाल सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह व गुरिंदर सिंह भोमा ने भी जांच कमेटी द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
उधर, जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल व उनके निजी सचिन महिंद्र सिंह अहलि के साथ अपने कार्यालय में बैठक की। इसमें 267 लापता पावन स्वरूपों की जांच शुरू होने पर संतोष जताया। मीडिया से बातचीत में जत्थेदार ने कहा कि जांच रिपोर्ट एक महीने में उनको मिल जाएगी। जांच में जो भी आरोपी पाया गया उसके विरुद्ध सख्त करवाई की जाएगी। जत्थेदार ने सभी राजनीतिक पार्टियों से कहा है कि वह इस मामले पर बयानबाजी से गुरेज करें। इस बात की संभावना है की जज नविता सिंह आगामी दिनों में जांच को अपने हाथ में ले लेंगी।
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पारिवारिक मजबूरी के कारण विदेश गया: डॉ रूप सिंह
सिख मानसिकता के साथ जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे की जांच शुरू होने से पहले छुट्टी पर गए एसजीपीसी के पूर्व सचिव डॉ. रूप सिंह ने कनाडा से जारी बयान में कहा कि वह पारिवारिक मजबूरी के कारण विदेश गए हैं। एक सिख के नाते वह इस मामले में संगत की कचहरी व गुरु की दरगाह में जवाबदेह हैं। जांच कमेटी जब भी सहयोग मांगेगी, वह हर संभव मदद करेंगे। उन्होंने एसजीपीसी के अध्यक्ष से मार्च में ही छुट्टी ले ली थी। कोरोना वायरस के कारण वह कनाडा नहीं जा सके थे। उस समय 267 पावन स्वरूपों का कोई भी मुद्दा नहीं था। उनकी गैर हाजिरी में जांच और भी निष्पक्ष ढंग से होगी।
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वकील ईशर सिंह ने जांच शुरू करने से पहले गुरुद्वारा रामसर साहिब में लापता पावन स्वरूपों के सील किए रिकॉर्ड को देखा। गुरुद्वारा साहिबान में स्थापित गोल्डन प्रेस जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को प्रकाशित किया जाता है, वहां के कर्मचारियों से पूछताछ की। एसजीपीसी ने कपड़े की तीन गांठों में बंधा रिकॉर्ड भी जांच कमेटी के सहायक को सौंपा। जांच कमेटी के आदेश के बाद इस रिकॉर्ड को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के सचिवालय में रख दिया गया। कमेटी इसी सचिवालय में बैठकर जांच पूरी करेगी। इस अवसर पर जत्थेदार के निजी सहायक जसपाल सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह व गुरिंदर सिंह भोमा ने भी जांच कमेटी द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
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उधर, जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल व उनके निजी सचिन महिंद्र सिंह अहलि के साथ अपने कार्यालय में बैठक की। इसमें 267 लापता पावन स्वरूपों की जांच शुरू होने पर संतोष जताया। मीडिया से बातचीत में जत्थेदार ने कहा कि जांच रिपोर्ट एक महीने में उनको मिल जाएगी। जांच में जो भी आरोपी पाया गया उसके विरुद्ध सख्त करवाई की जाएगी। जत्थेदार ने सभी राजनीतिक पार्टियों से कहा है कि वह इस मामले पर बयानबाजी से गुरेज करें। इस बात की संभावना है की जज नविता सिंह आगामी दिनों में जांच को अपने हाथ में ले लेंगी।
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पारिवारिक मजबूरी के कारण विदेश गया: डॉ रूप सिंह
सिख मानसिकता के साथ जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे की जांच शुरू होने से पहले छुट्टी पर गए एसजीपीसी के पूर्व सचिव डॉ. रूप सिंह ने कनाडा से जारी बयान में कहा कि वह पारिवारिक मजबूरी के कारण विदेश गए हैं। एक सिख के नाते वह इस मामले में संगत की कचहरी व गुरु की दरगाह में जवाबदेह हैं। जांच कमेटी जब भी सहयोग मांगेगी, वह हर संभव मदद करेंगे। उन्होंने एसजीपीसी के अध्यक्ष से मार्च में ही छुट्टी ले ली थी। कोरोना वायरस के कारण वह कनाडा नहीं जा सके थे। उस समय 267 पावन स्वरूपों का कोई भी मुद्दा नहीं था। उनकी गैर हाजिरी में जांच और भी निष्पक्ष ढंग से होगी।